Category: disaster

उत्तराखंड में बारिश का रेड अलर्ट जारी, राहत एजेंसियां को 24 घंटे सक्रिय रहने के निर्देश

उत्तराखंड में बारिश का रेड अलर्ट जारी, राहत एजेंसियां को 24 घंटे सक्रिय रहने के निर्देश मौसम विभाग ने 20…

उत्तराखंड: देहरादून में एयर अटैक मॉक ड्रिल, ब्लैकआउट के बीच आपदा तैयारियों की जांच

देहरादून में शुक्रवार देर रात मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें एयर अटैक जैसी परिस्थितियों में आपदा प्रबंधन तंत्र की…

उत्तराखंड: देहरादून में लगातार बारिश और तूफान से गेहूं समेत फसलों को भारी नुकसान

उत्तराखंड: देहरादून में लगातार बारिश और तूफान से गेहूं समेत फसलों को भारी नुकसान देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में पिछले…

उत्तराखंड: अंधड़, बारिश और खाद संकट से गेंहू की फसल तबाह, किसानों की बढ़ी परेशानी

राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से तेज हवाओं के साथ रुक रुक कर हो रही बारिश से…

भारत की बहु-आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणालीभारत की बहु-आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली

पूर्वानुमान और आपदा जोखिम घटाने में डिजिटल परिवर्तन PIB Delhi मुख्य बातें बहु-आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली ने अलग-अलग पूर्वानुमान की बजाय एकीकृत, स्वचालित पूर्वानुमान की ओर पूर्ण डिजिटल परिवर्तन को संभव बनाया है।भारत और इसके पड़ोसी क्षेत्रों की लगभग 80 प्रतिशत आबादी तक अब प्रभाव-आधारित, स्थान-विशिष्ट चेतावनियां पहुंच रही हैं।रियल-टाइम पूर्वानुमान और प्रभाव-आधारित चेतावनियों ने पूर्वानुमान तैयार करने के समय में 50 प्रतिशत की कमी की है और पूर्वानुमान की सटीकता में 30 प्रतिशत का सुधार हुआ है।एमएचईडबल्यू-डीएसएस को लागू करने से, 1999 से 2024 के बीच लोगों को सुरक्षित निकालने की लागत घटकर एक-तिहाई रह गई है। ऐसा इसलिए संभव हुआ क्योंकि आईएमडी द्वारा 3 से 5 पहले जारी किए जाने वाले पूर्वानुमानों में चक्रवात के टकराने के स्थान से संबंधित त्रुटियों में कमी आई है। परिचय भारत अपनी विविध भौगोलिक संरचना, लंबी तटरेखा और मानसून-आधारित जलवायु के कारण चक्रवात, बाढ़, लू, सूखा और भूस्खलन जैसी मौसम संबंधी घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, भारत हर वर्ष इस तरह की सैकड़ों मौसम संबंधी घटनाओं का सामना करता है, जिनमें बाढ़ लगभग 4 करोड़ हेक्टेयर भूमि को प्रभावित करती है और हाल के दशकों में लू की घटनाएं बढ़ी हैं। ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (सीईईडबल्यू) के अनुसार, भारत के 75 प्रतिशत से अधिक जिले कई प्रकार के जलवायु संबंधी खतरों के दायरे में हैं, जबकि केवल चक्रवात और बाढ़ ही आपदा-संबंधी क्षति के अधिकांश हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं। इस संदर्भ में, बहु–आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली (एमएचईडबल्यू-डीएसएस) का स्वदेशी विकास एक समयोचित और रणनीतिक कदम है, क्योंकि सटीक पूर्वानुमान और एकीकृत जोखिम विश्लेषण से आपदा से होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचा जा सकता है। इससे समय पर निकासी और तैयारी उपायों पर ध्यान दिया जा सकता है और जटिल मौसम संबंधी आंकड़ों को सरकारों, समुदायों और आपातकालीन प्रतिक्रिया दल से साझा करके सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ायी जा सकती है। एमएचईडबल्यू–डीएसएस के मुख्य उद्देश्य एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस एक उन्नत डिजिटल पूर्वानुमान प्लेटफ़ॉर्म है, जिसे भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने ओपन-सोर्स तकनीक और अपनी आंतरिक विशेषज्ञता का उपयोग करके विकसित किया है। मिशन मौसम के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण डिजिटल परिवर्तन पहल के रूप में प्रस्तुत यह प्रणाली भारत की रियल-टाइम मौसम निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी क्षमताओं को सुदृढ़ करती है। एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस को आधिकारिक रूप से जनवरी 2024 में लॉन्च किया गया था और यह भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) मानचित्रों जैसे उपकरणों का उपयोग करते हुए रियल-टाइम में कार्य करता है। इससे पूर्वानुमानकर्ताओं को मौसम संबंधी जानकारी को तेजी से एकत्र करने, विश्लेषण करने और स्पष्ट तथा आसान तरीके से उपयोगकर्ता तक प्रसारित करने में मदद मिलती है। उपग्रह और रडार डेटा सहित विभिन्न आंकड़ों तथा आधुनिक पूर्वानुमान उपकरणों को एकीकृत करके, यह प्रणाली तेज़ और अधिक विश्वसनीय प्रारंभिक चेतावनियां प्रदान करती है और किसानों, परिवहन सेवाओं, मछुआरों, ऊर्जा प्रदाताओं तथा पर्यटन क्षेत्र के लिए क्षेत्र-विशिष्ट अलर्ट उपलब्ध कराती है। एमएचईडब्ल्यू-डीएसएस का मुख्य उद्देश्य एक एकीकृत और स्वदेशी पूर्वानुमान प्रणाली का निर्माण करना है, जो पूरे भारत में सटीक, रियल-टाइम और प्रभाव-आधारित बहु-आपदा पूर्वानुमान प्रदान करने में सक्षम हो। यह प्रणाली पूर्वानुमानकर्ताओं, निर्णय-कर्ताओं और समुदायों को सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे सूचना के प्रवाह में सुधार हो और समय पर प्रारंभिक चेतावनियां जारी की जा सकें। इन क्षमताओं के माध्यम से, यह प्रणाली प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और जोखिम-आधारित चेतावनियों का समर्थन करती है, जिससे आईएमडी के पूर्वानुमानकर्ता जटिल मौसम संबंधी आंकड़ों को उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोगी जानकारी में परिवर्तित कर सकें। यह दृष्टिकोण आपदा तैयारी को मजबूत करता है और सार्वजनिक सुरक्षा को बढ़ाता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि पूर्व चेतावनी से संबंधित जानकारी विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के लिए सुलभ, विश्वसनीय और प्रासंगिक हो।…

उत्तराखंड: फूलों की घाटी में वनाग्नि पर काबू के लिए हेलीकॉप्टर से रेकी

उत्तराखंड: फूलों की घाटी में वनाग्नि पर काबू के लिए हेलीकॉप्टर से रेकी मौसम की बेरुखी के चलते विश्व धरोहर…

धराली आपदा पीड़ितों से पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार ने घर-घर जाकर जताई संवेदना

धराली आपदा पीड़ितों से पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार ने घर-घर जाकर जताई संवेदना धराली/कोटद्वार, दिनांक:2/12/2025धराली क्षेत्र में हाल ही…

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा में सहयोग करने वाले कर्मियों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा में सहयोग करने वाले कर्मियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी…

आपदा प्रभावितों के साथ सरकार, मंत्री सुबोध उनियाल ने ली आपदा की समीक्षा बैठक

कार्यालय जिला सूचना अधिकारी, पौड़ी गढ़वाल आपदा प्रबंधन की समीक्षा बैठक में मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा: पेयजल, बिजली, सड़क…