Category: Rural devlopment

उत्तराखंड:  नाबार्ड स्थापना दिवस पर स्वयं सहायता समूहों ने साझा की सफलता की कहानियां

उत्तराखंड:  नाबार्ड स्थापना दिवस पर स्वयं सहायता समूहों ने साझा की सफलता की कहानियां नैनीताल जनपद में नाबार्ड स्थापना दिवस…

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने “राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन” में एआई-सक्षम ‘ग्रामीण आंतरिक लेखापरीक्षा पोर्टल’ का शुभारंभ किया

“ग्रामीण आंतरिक लेखापरीक्षा पोर्टल”: जोखिम-आधारित और अनुपालन लेखापरीक्षाओं सहित आंतरिक लेखापरीक्षाओं के संपूर्ण प्रबंधन के लिए अपनी तरह का पहला…

पेट्रोल पंपों पर खुलेंगे महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री के लिए ‘हिलान्स आउटलेट’

महिलाओं द्धारा तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री के लिए अब पैट्रोल पम्पों पर ‘हिलान्स आउटलेट’ स्थापित किए जा रहे…

पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों के माध्यम से नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया

जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट सेवा प्रदान करने में शीर्ष प्रदर्शन करने वाली ग्राम पंचायतें और ग्राम स्तरीय उद्यमी सम्मानित किए…

उत्तराखंड ट्रेड एक्सपो का भव्य शुभारंभ, स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता को मिला नया मंच

उत्तराखंड ट्रेड एक्सपो का भव्य शुभारंभ, स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता को मिला नया मंच देहरादून, 20 जून। उत्तराखंड की समृद्ध…

बुक्सा महिलाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र का लोकार्पण, मिलेंगे नए अवसर

बुक्सा महिलाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र का लोकार्पण, मिलेंगे नए अवसर बुक्सा जनजाति की महिलाओं को स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता से…

सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर समाज निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है सहकार भारती: रविन्द्र कुमार ,प्रदेश मंत्री एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सहकार भारती

सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर समाज निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है सहकार भारती कोटद्वार। सहकारिता आधारित आर्थिक…

गरीबों का सशक्तिकरण: समावेशी परिवर्तन का एक दशक

गरीबों का सशक्तिकरण: समावेशी परिवर्तन का एक दशक PIB Delhi पिछले बारह वर्षों में, भारत के लगातार सरकारी प्रयासों ने ज़रूरी सेवाओं तक पहुंच बढ़ाई है, जिससे वंचित परिवारों में अभाव कम हुआ है। कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा उपायों के विस्तार से लगभग 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं। ग्रामीण इलाकों में नल के पानी की सुविधा 2019 के 3.23 करोड़ घरों से बढ़कर मई 2026 तक 15.84 करोड़ घरों तक पहुंच गई है। 12.11 करोड़ से ज़्यादा घरों में शौचालय बनाए गए, जिससे ग्रामीण स्वच्छता कवरेज 2014 के 39 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो गया। पीएम उज्ज्वला योजना के तहत 10.57 करोड़ से ज़्यादा मुफ़्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए, जिससे महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर हुआ और घरों के अंदर होने वाला प्रदूषण कम हुआ। आयुष्मान भारत के तहत 43.93 करोड़ हेल्थ कार्ड जारी किए गए, जिससे आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ी। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना ने 81 करोड़ से ज़्यादा लाभार्थियों को मुफ़्त अनाज उपलब्ध कराया, जिससे पूरे देश में गरीब परिवारों की खाद्य सुरक्षा मज़बूत हुई। प्राथमिक स्कूलों में लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर 2013-14 के 4.6 प्रतिशत से तेज़ी से घटकर 2024-25 में 0.3प्रतिशत  रह गई। डिजिटल शासन सुधारों की मदद से आधार–आधारित राशन वितरण संभव हो पाया। आकांक्षी ज़िलों और आदिवासी इलाकों में भी पानी, स्वच्छता और आजीविका से जुड़े विशेष प्रयासों के ज़रिए कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार किया गया। गरीबी उन्मूलन और  बहु–क्षेत्रीय कल्याण में रणनीतिक प्रतिमान पिछले एक दशक में, भारत ने गरीबी कम करने, सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुँचाने के मामले में एक बड़ा बदलाव देखा है। पब्लिक पॉलिसी को समावेश, पहुंच और आखिरी व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के सिद्धांतों से दिशा मिली है। इससे यह पक्का हुआ है कि आर्थिक विकास का लाभ सभी लोगों तक पहुंचे। खास बात यह है कि औसत महंगाई दर 2004–2014 के दौरान 8.1 प्रतिशत से घटकर 2014–2025 के दौरान 5.1 प्रतिशत रह गई। इससे कीमतों में ज़्यादा स्थिरता आई और परिवारों की खरीदने की क्षमता में सुधार हुआ। साथ ही, भारत में बहुआयामी गरीबी 2013–14 में 29.17 प्रतिशत से तेज़ी से घटकर 2022–23 में 11.28 प्रतिशत  रह गई। यह 17.89 प्रतिशत अंकों की कमी को दिखाता है। इस दौरान लगभग 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले। यह प्रगति कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा उपायों के बड़े पैमाने पर विस्तार के कारण संभव हुई है। मुख्य उपायों में वित्तीय समावेश, सस्ती स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सुरक्षा, आवास, आजीविका सहायता और डिजिटल शासन सुधार शामिल हैं। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक सर्विस डिलीवरी ने इन प्रयासों को और मज़बूत किया है। कुल मिलाकर, इन पहलों ने ग्रामीण और शहरी भारत के लाखों गरीब परिवारों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया है। गरिमा का आधार: मूलभूत जरूरतों तक सार्वभौमिक पहुंच सरकारी प्रयासों का ध्यान पूरे ग्रामीण और शहरी भारत में नल के पानी की कनेक्टिविटी, स्वच्छता कवरेज, एलपीजी की उपलब्धता और ग्रामीण विद्युतीकरण पर केंद्रित रहा है। ये प्रयास जीवन की बेहतर गुणवत्ता, मानव विकास और बड़े पैमाने पर बुनियादी सेवाओं की डिलीवरी की दिशा में हो रहे एक व्यापक बदलाव को दर्शाते हैं। I.  जल, स्वच्छता और साफ सफाई (डबल्यूएएसएच) तक सार्वभौमिक पहुंच पिछले एक दशक में, स्वच्छ ऊर्जा, सुरक्षित पेयजल और बेहतर स्वच्छता तक पहुंच भारत की कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति का एक मुख्य आधार बनकर उभरी है। बड़े पैमाने पर किए गए उपायों ने जीवन की गुणवत्ता में काफ़ी सुधार किया है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम किया है। इससे मानवीय गरिमा को मज़बूती मिली है, विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में। जल जीवन मिशन…

माय भारत ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख के सीमावर्ती गांवों में युवाओं की सहभागिता को सुदृढ़ करने के लिए विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 का शुभारंभ किया

भारत भर से 500 युवा ‘माई भारत’ स्वयंसेवक सीमावर्ती गांवों में एक सप्ताह तक चलने वाले गहन कार्यक्रम में भाग…

उत्तराखंड: ग्राम पंचायतों के विकास को मिलेगा नया आधार

उत्तराखंड: ग्राम पंचायतों के विकास को मिलेगा नया आधार प्रदेश की ग्राम पंचायतों को आदर्श और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा…

टिहरी गढ़वाल से वैश्विक ब्रांड तक: मीरा कुलकर्णी ने कैसे खड़ा किया 8,300 करोड़ का ‘फॉरेस्ट एसेंशियल्स’ साम्राज्य

टिहरी गढ़वाल से वैश्विक ब्रांड तक: मीरा कुलकर्णी ने कैसे खड़ा किया 8,300 करोड़ का ‘फॉरेस्ट एसेंशियल्स’ साम्राज्य नई दिल्ली/टिहरी…