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संपादकीय | पंचायतों को मिला संसाधन, अब ज़रूरत है जवाबदेही और परिणामों की

उत्तराखंड की पंचायती राज संस्थाओं को 15वें वित्त आयोग के तहत 94 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान मिलना निस्संदेह ग्रामीण लोकतंत्र और विकेंद्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह राशि राज्य की जिला पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और ग्राम पंचायतों तक पहुँची है, जो इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार ग्रामीण विकास की धुरी के रूप में पंचायतों की भूमिका को स्वीकार कर रही है।

इस अनुदान का उद्देश्य केवल धन वितरण नहीं, बल्कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास को प्रोत्साहित करना है। अबद्ध अनुदान के माध्यम से पंचायतों को यह अधिकार मिलता है कि वे अपने क्षेत्र की ज़मीनी ज़रूरतों—जैसे सड़क, जल संरक्षण, स्थानीय आजीविका, सार्वजनिक सुविधाएँ—पर खर्च तय कर सकें। यह संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित विकेंद्रीकृत शासन की भावना के अनुरूप है।

वहीं, बद्ध अनुदानों को स्वच्छता, पेयजल, अपशिष्ट प्रबंधन और ODF स्थिति के रखरखाव जैसी बुनियादी सेवाओं से जोड़कर यह स्पष्ट किया गया है कि धन का उपयोग केवल इमारतें खड़ी करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए होना चाहिए। पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय की सिफारिशों पर वित्त मंत्रालय द्वारा दो किस्तों में अनुदान जारी करने की व्यवस्था, वित्तीय अनुशासन की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल है।

लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या पंचायतें इस धन का प्रभावी और पारदर्शी उपयोग कर पाएँगी? उत्तराखंड में पहले भी यह देखा गया है कि कई ग्राम पंचायतों में तकनीकी क्षमता, योजना निर्माण और निगरानी की कमी के कारण अनुदान का पूरा लाभ जनता तक नहीं पहुँच पाता। कई बार धन खर्च तो हो जाता है, पर परिणाम ज़मीन पर दिखाई नहीं देते।

ज़रूरत इस बात की है कि:

  • ग्राम सभाओं को वास्तविक निर्णयकारी मंच बनाया जाए,
  • सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) को अनिवार्य और प्रभावी किया जाए,
  • और पंचायत प्रतिनिधियों को योजना, लेखा और निगरानी का नियमित प्रशिक्षण दिया जाए।

यदि यह 94 करोड़ रुपये केवल फाइलों और औपचारिकताओं में सिमट गए, तो यह अवसर चूक जाएगा। लेकिन यदि इन्हें जनभागीदारी, पारदर्शिता और ज़मीनी ज़रूरतों के साथ जोड़ा गया, तो यही अनुदान उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, जल सुरक्षा और स्थानीय विकास की दिशा में वास्तविक बदलाव ला सकता है।

धन आ गया है, अब परीक्षा पंचायतों की है।


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By udaen

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