Udaen news network initiative| भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तारी का मतलब नौकरी खत्म होना नहीं, निलंबन, विभागीय जांच और न्यायालय की कार्रवाई होती है अलग-अलग प्रक्रियाएं
देहरादून। सरकारी विभागों में रिश्वत लेते हुए कर्मचारियों और अधिकारियों की गिरफ्तारी की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं। विजिलेंस की टीम किसी कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ती है तो खबर सुर्खियां बन जाती है। लेकिन आम लोगों के मन में एक महत्वपूर्ण सवाल रहता है कि गिरफ्तारी के बाद उस सरकारी कर्मचारी का क्या होता है? क्या उसकी नौकरी तत्काल समाप्त हो जाती है? क्या उसे वेतन मिलता रहता है? क्या वह जेल जाता है और क्या दोषी साबित होने पर उसकी पेंशन भी बंद हो सकती है?
दरअसल, रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद सरकारी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मुकदमे के साथ-साथ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग होती हैं।
गिरफ्तारी के बाद क्या होती है कार्रवाई?
जब विजिलेंस या भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी किसी सरकारी कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ती है तो मामले में प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। रिश्वत की रकम बरामद करने, साक्ष्य जुटाने और पूछताछ के बाद कानून के अनुसार गिरफ्तारी की जाती है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत लोक सेवक द्वारा अनुचित लाभ लेने या प्राप्त करने का अपराध बन सकता है। दोष सिद्ध होने पर इसमें न्यूनतम तीन वर्ष और अधिकतम सात वर्ष तक की कैद तथा जुर्माने का प्रावधान है।
क्या गिरफ्तारी होते ही नौकरी चली जाती है?
नहीं। सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी और उसकी सेवा समाप्ति दो अलग-अलग बातें हैं।
कर्मचारी को विभाग निलंबित कर सकता है। केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों पर लागू सामान्य सेवा नियमों के अनुसार, यदि कर्मचारी 48 घंटे से अधिक हिरासत में रहता है तो उसे निर्धारित परिस्थितियों में निलंबित माना जाता है। राज्य कर्मचारियों पर संबंधित राज्य सेवा नियम लागू होते हैं।
निलंबन का अर्थ नौकरी से बर्खास्तगी नहीं है। कर्मचारी का विभाग से सेवा संबंध बना रहता है, लेकिन वह नियमित रूप से काम नहीं कर सकता।
निलंबन के दौरान मिलता है कितना वेतन?
निलंबित कर्मचारी को सामान्य वेतन के बजाय नियमानुसार निर्वाह भत्ता दिया जाता है। यह भत्ता कर्मचारी को निलंबन की अवधि में जीवनयापन के लिए दिया जाता है। इसकी दर और संशोधन संबंधित सेवा नियमों पर निर्भर करते हैं।
क्या रिश्वत लेते पकड़े जाने पर जेल जाना पड़ता है?
गिरफ्तारी के बाद कर्मचारी को न्यायालय के सामने पेश किया जाता है। न्यायालय मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जमानत या न्यायिक हिरासत का निर्णय करता है।
सिर्फ गिरफ्तारी से कर्मचारी अपराधी साबित नहीं हो जाता। अंतिम दोषसिद्धि न्यायालय में मुकदमे के बाद होती है।
दोषी साबित होने पर क्या नौकरी चली जाती है?
यदि न्यायालय भ्रष्टाचार के अपराध में कर्मचारी को दोषी ठहराता है तो उसके खिलाफ सेवा नियमों के तहत बर्खास्तगी, सेवा से हटाने या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
संविधान के अनुच्छेद 311(2)(a) के तहत किसी सरकारी कर्मचारी को आपराधिक आरोप में दोषसिद्धि के आधार पर निर्धारित संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार बर्खास्त या सेवा से हटाया जा सकता है। इसके लिए सामान्य विभागीय जांच की प्रक्रिया में विशेष छूट उपलब्ध है।
क्या पेंशन भी बंद हो सकती है?
दोषसिद्धि और सेवा से बर्खास्तगी के बाद पेंशन तथा अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, पेंशन का अंतिम निर्णय लागू पेंशन नियमों, कर्मचारी की सेवा स्थिति और संबंधित आदेशों पर निर्भर करता है।
आपराधिक मुकदमा और विभागीय जांच अलग-अलग
किसी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का आपराधिक मुकदमा चलने के साथ विभागीय जांच भी हो सकती है। विभागीय जांच में सेवा नियमों का उल्लंघन और कर्मचारी की जिम्मेदारी देखी जाती है, जबकि आपराधिक मुकदमे में अपराध साबित करने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की होती है।
आम जनता के लिए जानना जरूरी है कि रिश्वत लेते पकड़े जाने का मतलब तत्काल बर्खास्तगी नहीं है। गिरफ्तारी, निलंबन, मुकदमा, दोषसिद्धि और सेवा समाप्ति अलग-अलग चरण हैं।
