सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की आलोचना करना प्रेस का अधिकार, लेकिन तथ्यों के साथ
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पत्रकारिता आचरण मानक-2022 में सार्वजनिक अधिकारियों के कार्यों और आचरण पर टिप्पणी करने के प्रेस के अधिकार को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। लोकतंत्र में पत्रकारिता का दायित्व केवल सरकारी उपलब्धियों का प्रचार करना नहीं, बल्कि सत्ता, प्रशासन और सार्वजनिक संस्थाओं से जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है।
लोकतंत्र में प्रेस को जनता और शासन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। सरकार, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सार्वजनिक संस्थानों के फैसलों की समीक्षा करना पत्रकारिता का बुनियादी दायित्व है।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के Norms of Journalistic Conduct, 2022 में सार्वजनिक अधिकारियों के कार्यों और आचरण पर प्रेस की टिप्पणी के अधिकार से संबंधित प्रावधान इसी लोकतांत्रिक भूमिका को रेखांकित करते हैं।
क्या कहता है प्रेस काउंसिल का नियम संख्या 31?
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के मानक 2022 के नियम संख्या 31 में सार्वजनिक अधिकारियों के कार्यों और आचरण पर टिप्पणी करने के अधिकार के संबंध में महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं।
इसके प्रमुख बिंदु हैं:
1. सरकारी कामकाज की आलोचना का अधिकार: सरकार, स्थानीय निकायों और सरकारी शक्तियों का इस्तेमाल करने वाली संस्थाओं के आधिकारिक कार्यों पर आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए सामान्यतः मानहानि का दावा नहीं किया जा सकता, जब तक संबंधित अधिकारी यह स्थापित न करे कि प्रकाशन सत्य की परवाह किए बिना लापरवाही से किया गया था।
2. स्थानीय निकायों की जवाबदेही: केंद्र और स्थानीय निकायों को अपनी कार्यप्रणाली की आलोचना करने वाले लेखों या रिपोर्टों पर मानहानि की दीवानी या आपराधिक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।
3. जांच प्रभावित न हो: अधिकारियों द्वारा की जा रही जांच से संबंधित समाचार इस तरह प्रकाशित नहीं होने चाहिए कि अपराध को बढ़ावा मिले या अपराध की रोकथाम, जांच और दोषियों के अभियोजन में बाधा आए।
4. राष्ट्रीय हित और कानून: पत्रकारिता की स्वतंत्रता के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और लागू कानूनों का भी ध्यान रखना आवश्यक है।
5. न्यायपालिका और विधायिका के विशेषाधिकार: न्यायपालिका, संसद और विधानमंडलों के लिए संविधान में निर्धारित विशेष संरक्षण और विशेषाधिकारों का सम्मान जरूरी है।
इन प्रावधानों का मूल पाठ प्रेस काउंसिल के आधिकारिक दस्तावेज में उपलब्ध है। Press Council of India +1
पत्रकारों के लिए इसका व्यावहारिक अर्थ क्या है?
उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में यह विषय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
- यदि किसी अधिकारी के कार्यकाल में सरकारी योजना में अनियमितता के आरोप सामने आते हैं, तो पत्रकार उसकी जांच और रिपोर्टिंग कर सकता है।
- यदि किसी नगर निगम में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं, तो पत्रकार दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर जवाब मांग सकता है।
- यदि किसी जनप्रतिनिधि के क्षेत्र में सरकारी धन खर्च होने के बावजूद काम अधूरा है, तो उस पर सवाल उठाना पत्रकारिता का अधिकार है।
- यदि किसी विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायतें हैं, तो पत्रकार संबंधित रिकॉर्ड, टेंडर, भुगतान और जांच रिपोर्ट के आधार पर पड़ताल कर सकता है।
लेकिन आरोप को प्रमाणित तथ्य बताना, बिना सत्यापन के खबर प्रकाशित करना या किसी की प्रतिष्ठा को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना पत्रकारिता की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आता।
स्वतंत्र पत्रकारिता और जवाबदेही
प्रेस की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं कि पत्रकार किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कुछ भी लिख सकता है। इसका अर्थ यह है कि पत्रकार बिना अनुचित दबाव के जनहित के सवाल उठा सके।
पत्रकारिता के लिए प्रमाण, दस्तावेज, संबंधित पक्ष का पक्ष और निष्पक्षता जरूरी हैं। प्रेस काउंसिल के मानक भी सटीकता, निष्पक्षता और प्रकाशन से पहले तथ्यों के सत्यापन पर जोर देते हैं। Press Council of India +1
एक महत्वपूर्ण बात: किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि की आलोचना मात्र से कोई खबर मानहानिकारक नहीं हो जाती। लेकिन नियम 31 को सभी प्रकार की मानहानि से पूर्ण छूट भी नहीं समझना चाहिए। हर मामले में प्रकाशित सामग्री, उसका आधार, सार्वजनिक हित और लागू कानून देखे जाएंगे।
पत्रकारों के लिए आधिकारिक दस्तावेज
पत्रकारिता के आचरण के मानक 2022
आधिकारिक
Press Council of India – Norms of Journalistic Conduct, 2022
संपादकीय टिप्पणी
लोकतंत्र में अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह हैं और पत्रकारिता उस जवाबदेही को सार्वजनिक करने का माध्यम है। यदि पत्रकार सरकारी योजनाओं, प्रशासनिक फैसलों, जनप्रतिनिधियों के कार्यों और सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल नहीं पूछेगा, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता कैसे आएगी?
सवाल पूछना पत्रकार का अपराध नहीं, उसका पेशेवर दायित्व है। और उन सवालों का जवाब देना सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी है।
— संपादकीय डेस्क, Divyangvani / Udaen News
