पंचायत प्रतिनिधियों के बीमा में भी भेदभाव? प्रमुख और अध्यक्ष सुरक्षित, सदस्य क्यों बाहर!
उत्तराखंड में पंचायत प्रतिनिधियों के बीमा प्रस्ताव पर उठे सवाल, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्यों का नाम सूची से गायब
देहरादून। उत्तराखंड में पंचायत प्रतिनिधियों के लिए जीवन बीमा और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की व्यवस्था को लेकर पंचायतीराज विभाग के एक पत्र ने नई बहस छेड़ दी है। निदेशालय पंचायतीराज, उत्तराखंड की ओर से 3 नवंबर 2026 को जारी पत्र में पंचायत प्रतिनिधियों के लिए प्रस्तावित बीमा राशि का विवरण दिया गया है।

पत्र के अनुसार प्रस्तावित बीमा व्यवस्था में चार श्रेणियां शामिल की गई हैं।
प्रस्तावित बीमा राशि इस प्रकार है:
| जनप्रतिनिधि | जीवन बीमा | दुर्घटना बीमा |
|---|---|---|
| ग्राम प्रधान | ₹5 लाख | ₹20 लाख |
| उप ग्राम प्रधान | ₹5 लाख | ₹20 लाख |
| क्षेत्र पंचायत प्रमुख | ₹10 लाख | ₹25 लाख |
| जिला पंचायत अध्यक्ष | ₹15 लाख | ₹35 लाख |
लेकिन इस सूची में क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी सदस्य) और जिला पंचायत सदस्य का कहीं उल्लेख नहीं है।
यही सबसे बड़ा सवाल है। क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के निर्वाचित सदस्य भी जनता के बीच रहकर काम करते हैं। गांवों की समस्याओं को उठाते हैं, विकास योजनाओं में भागीदारी करते हैं और अपने क्षेत्र की जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं। इसके बावजूद बीमा सुरक्षा की प्रस्तावित सूची में उन्हें जगह क्यों नहीं दी गई?
क्या पंचायतों में केवल प्रमुख और अध्यक्ष ही जनप्रतिनिधि हैं? क्या क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्यों की जिम्मेदारी और जनसेवा का कोई महत्व नहीं है?
सरकार को बताना चाहिए कि बीमा सुरक्षा का आधार क्या है और निर्वाचित सदस्यों को इससे बाहर रखने का औचित्य क्या है?
लोकतांत्रिक व्यवस्था में पदों की जिम्मेदारियां अलग हो सकती हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा के मामले में समानता और पारदर्शिता होनी चाहिए।
उत्तराखंड सरकार से मांग है कि प्रस्तावित बीमा व्यवस्था में क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत सदस्यों को भी शामिल किया जाए।
सवाल स्पष्ट है—जब बीमा पंचायत प्रतिनिधियों का है तो पंचायत के निर्वाचित सदस्य इससे वंचित क्यों?
