पूछड़ी में बच्चों की पाठशाला पर भी संकट! वन विभाग ले गया बैनर, व्हाइट बोर्ड और पढ़ाई का सामान

घर उजड़ने के बाद खुले आसमान के नीचे शुरू हुई थी सावित्रीबाई फुले-ज्योतिबा फुले सायंकालीन पाठशाला, अब बच्चों से पढ़ाई का यह सहारा भी छिनने की चिंता
कोटद्वार। पूछड़ी से सामने आई एक घटना ने बच्चों की शिक्षा और प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन परिवारों के आशियाने उजड़ चुके हैं, उनके बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उनके जीवन में उम्मीद जगाने के उद्देश्य से खुले आसमान के नीचे सावित्रीबाई फुले-ज्योतिबा फुले सायंकालीन स्कूल शुरू किया गया था।
लेकिन आज इस अस्थायी पाठशाला से वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा स्कूल का बैनर, व्हाइट बोर्ड और पढ़ाई से संबंधित अन्य सामग्री अपने साथ ले जाने की बात सामने आई है। इससे उन बच्चों की पढ़ाई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिनके लिए यह पाठशाला शिक्षा का एक छोटा-सा सहारा बनी थी।
सवाल यह है कि जिन बच्चों के परिवार पहले ही घर और सुरक्षित आश्रय खोने का दर्द झेल रहे हैं, उनकी शिक्षा के लिए की गई एक छोटी-सी पहल से आखिर किसे परेशानी हो सकती है?
बच्चे किसी जमीन के मालिकाना हक की लड़ाई नहीं लड़ रहे। वे केवल पढ़ना चाहते हैं, आगे बढ़ना चाहते हैं और अपने भविष्य के सपने पूरे करना चाहते हैं। उनके लिए शिक्षा का यह छोटा-सा प्रयास किसी राजनीतिक या प्रशासनिक विवाद का विषय नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।
वन विभाग और जिला प्रशासन को इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि स्कूल की जगह या वन भूमि को लेकर कोई कानूनी अथवा प्रशासनिक आपत्ति है, तो उसका समाधान बच्चों की पढ़ाई बाधित किए बिना निकाला जाना चाहिए। पढ़ाई की सामग्री वापस दिलाने और बच्चों के लिए वैकल्पिक सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल होनी चाहिए।
घर उजड़ने का दर्द बच्चों ने पहले ही झेला है, अब उनके सपनों की पाठशाला भी उजड़ने न दी जाए।
आखिर शिक्षा किसी जमीन की मोहताज नहीं होनी चाहिए और बच्चों का भविष्य प्रशासनिक विवादों की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए।
