Category: Editorial

आखिर खनिज किसके हैं?—उत्तराखंड में पहाड़, खनिज और अधिकार की नई लड़ाई

संपादकीय: आखिर खनिज किसके हैं?—उत्तराखंड में पहाड़, खनिज और अधिकार की नई लड़ाई उत्तराखंड को हम देवभूमि कहते हैं। लेकिन…

प्रशांत किशोर, बिहार की राजनीति और ‘न्यू वर्ल्ड ऑर्डर’ की बहस: तथ्य, आशंकाएँ और लोकतंत्र की कसौटी

बिहार की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर का…

संपादकीय: क्या नरेंद्र मोदी एक महान नेता हैं, या भारत के सबसे सफल राजनीतिक ऑर्गेनाइज़र?

भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी का नाम पिछले एक दशक से अधिक समय से सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में गिना जाता…

पत्रकारिता का संकट: क्या कलम सचमुच स्वतंत्र है, या स्वतंत्र होने का भ्रम बचा है?

“लोकतंत्र का चौथा स्तंभ”—यह उपाधि किसी संविधान की धारा में लिखी हुई नहीं है, फिर भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारिता…

कोटद्वार की राजनीति का बड़ा सवाल: क्या संगठनात्मक क्षमता नेतृत्व का विकल्प बन सकती है?

संपादकीय: ऋतु खंडूरी की सबसे बड़ी ताकत नेतृत्व है या संगठनात्मक क्षमता? कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र उत्तराखंड की उन महत्वपूर्ण सीटों…

संविधान की प्रस्तावना—लोकतंत्र का पथप्रदर्शक या केवल औपचारिक पाठ?

संपादकीय: संविधान की प्रस्तावना—लोकतंत्र का पथप्रदर्शक या केवल औपचारिक पाठ? हर वर्ष 26 जनवरी और 26 नवंबर को संविधान की…

संपादकीय: जल संकट की दस्तक—कोसी नदी बेसिन पर मंडराता जलवायु परिवर्तन का खतरा

संपादकीय: जल संकट की दस्तक—कोसी नदी बेसिन पर मंडराता जलवायु परिवर्तन का खतरा उत्तराखंड की पहचान केवल हिमालय, नदियों और…

संपादकीय: कागज़ से क्लिक तक—क्या नेवा विधानसभाओं में लोकतंत्र को और मजबूत करेगा?

संपादकीय: कागज़ से क्लिक तक—क्या नेवा विधानसभाओं में लोकतंत्र को और मजबूत करेगा? भारत का लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित…