देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक में न्यायिक एवं खेल आधारभूत ढांचे, पशुपालन, श्रमिक हित, शिक्षा, ग्रामीण पेयजल, ईको टूरिज्म और औद्योगिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार के मुताबिक इन फैसलों का उद्देश्य रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामाजिक कल्याण और आधारभूत सुविधाओं को गति देना है।
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी महानिदेशक सूचना एवं अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दी।
हल्द्वानी में हाईकोर्ट परिसर के लिए 30 हेक्टेयर भूमि
कैबिनेट ने हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में उपलब्ध लगभग 73 हेक्टेयर वन भूमि में से आवश्यकता के अनुसार करीब 30 हेक्टेयर भूमि उच्च न्यायालय परिसर के निर्माण के लिए हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
यह फैसला न्यायिक आधारभूत ढांचे के विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि वन भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया में लागू केंद्रीय वन एवं पर्यावरण संबंधी अनुमतियों तथा अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन भी आवश्यक होगा।
सामान्य वर्ग के पशुपालकों को भी मिलेगा अनुदान
राज्य सेक्टर की गौ पालन योजना का विस्तार करते हुए अब सामान्य वर्ग के पशुपालकों को भी योजना में शामिल किया गया है। लाभार्थी गाय के साथ भैंस खरीदने का विकल्प भी चुन सकेंगे।
कैबिनेट ने पशु की यूनिट लागत को 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये करने का निर्णय लिया है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को अधिकतम 90 प्रतिशत, जबकि सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को अधिकतम 60 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी।
सरकार के अनुसार पहले वर्ष में करीब 2,128 पशुपालकों को इसका लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का दावा है कि इससे पशुपालन आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
मजदूरी संहिता नियमावली-2026 को मंजूरी
कैबिनेट ने मजदूरी संहिता, 2019 के तहत उत्तराखण्ड मजदूरी संहिता नियमावली-2026 लागू करने को मंजूरी दी है।
नियमावली में न्यूनतम मजदूरी, ओवरटाइम के लिए दोगुना भुगतान, प्रत्येक माह की सात तारीख तक वेतन भुगतान, डिजिटल भुगतान तथा समान कार्य के लिए महिला और पुरुष श्रमिकों को समान वेतन जैसे प्रावधान शामिल हैं।
यह निर्णय प्रदेश में श्रमिकों के वेतन भुगतान और रोजगार संबंधी अधिकारों को अधिक स्पष्ट एवं विनियमित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एससी-एसटी छात्रावासों के लिए नई संचालन नियमावली
समाज कल्याण विभाग के अधीन संचालित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति छात्रावासों के लिए संचालन नियमावली-2026 लागू करने का निर्णय लिया गया है।
इसका उद्देश्य छात्र-छात्राओं को बेहतर आवास, भोजन, अध्ययन का वातावरण और सर्वांगीण विकास की सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
ईको टूरिज्म के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति में बदलाव
राज्य में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति की संरचना में संशोधन किया गया है। समिति में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया जाएगा।
सरकार के अनुसार इससे पर्यावरण संरक्षण, जड़ी-बूटी प्रबंधन, कूड़ा नियंत्रण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा।
उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में ईको टूरिज्म और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना इस फैसले की महत्वपूर्ण चुनौती भी होगी।
GST कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश
केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधनों के अनुरूप उत्तराखण्ड माल एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 में आवश्यक संशोधन के लिए अध्यादेश लाने को कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
इसका उद्देश्य राज्य की कर व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर किए गए कानूनी बदलावों के अनुरूप अद्यतन करना है।
राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय में 122 पद सृजित
गौलापार, हल्द्वानी स्थित उत्तराखण्ड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन के लिए 122 नियमित पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा तकनीकी और सहायक आवश्यकताओं के लिए आउटसोर्स व्यवस्था से पदों की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार का कहना है कि इससे खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं और संस्थागत समर्थन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
बंगाली एससी समुदाय के सहायता कोष में प्रतिनिधित्व
दिनेशपुर और शक्तिफार्म क्षेत्र के बंगाली मूल के अनुसूचित जाति समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए सहायता कोष संचालन समिति में उपाध्यक्ष और सदस्य पदों पर उसी समुदाय से नामांकन का निर्णय लिया गया है।
सहकारी समिति नियमावली से भेदभावपूर्ण प्रावधान हटेंगे
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में उत्तराखण्ड सहकारी समिति नियमावली, 2004 में संशोधन किया जाएगा।
इसके तहत कुष्ठ रोग से संबंधित भेदभावपूर्ण प्रावधानों को हटाकर न्यायालय द्वारा घोषित संबंधित प्रावधानों को शामिल किया जाएगा। यह कदम सामाजिक समानता और भेदभाव समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
जल जीवन मिशन की योजनाओं के हस्तांतरण के लिए नया प्रोटोकॉल
ग्रामीण पेयजल योजनाओं की कमीशनिंग तथा ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को योजनाओं के हस्तांतरण के लिए भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल को राज्य में लागू करने का निर्णय लिया गया है।
इससे योजनाओं के निर्माण के बाद उनके संचालन और स्थानीय स्तर पर हस्तांतरण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
वन विकास निगम में स्केलर भर्ती प्रक्रिया में बदलाव
उत्तराखण्ड वन विकास निगम सेवा की संशोधित विनियमावली-2026 को मंजूरी देते हुए स्केलर पदों पर भर्ती के लिए 100 अंकों की लिखित परीक्षा का प्रावधान किया गया है।
सरकार के अनुसार इससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और भर्ती व्यवस्था को आयोग की चयन प्रणाली के अनुरूप बनाया जा सकेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के बीच गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से हरिद्वार तक विस्तारित करने के लिए समझौता ज्ञापन किए जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
इससे दोनों राज्यों के बीच बेहतर सड़क संपर्क के साथ धार्मिक पर्यटन, व्यापार, औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
औद्योगिक संबंध नियमावली-2026 को मंजूरी
कैबिनेट ने औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत उत्तराखण्ड औद्योगिक संबंध नियमावली-2026 को मंजूरी दी है।
इसमें औद्योगिक विवादों के समयबद्ध समाधान, ट्रेड यूनियनों की मान्यता, शिकायत निवारण समितियों, हड़ताल और तालाबंदी की प्रक्रिया तथा श्रमिकों के लिए री-स्किलिंग फंड जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।
फैसलों का व्यापक प्रभाव कितना होगा?
धामी कैबिनेट के फैसलों का दायरा व्यापक है। एक ओर सरकार ने न्यायिक और खेल आधारभूत ढांचे के विस्तार को मंजूरी दी है, तो दूसरी ओर पशुपालन, श्रमिक हित और ग्रामीण पेयजल जैसी योजनाओं पर भी जोर दिया गया है।
विशेष रूप से पशुपालकों की सब्सिडी बढ़ाने का फैसला ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि पात्र लाभार्थियों तक योजना कितनी पारदर्शिता से पहुंचती है और पशुपालन के लिए चारा, पशु चिकित्सा, बाजार तथा दुग्ध खरीद जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं कितनी मजबूत की जाती हैं।
इसी तरह ईको टूरिज्म और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं में आर्थिक गतिविधियों के साथ पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभावों का संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रहेगा।
कैबिनेट के फैसलों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार ने जनकल्याण, रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, श्रमिक अधिकार, न्यायिक आधारभूत ढांचे और निवेश-संबंधी अवसंरचना को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की है। अब इन निर्णयों की वास्तविक सफलता इनके प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और समयबद्ध परिणामों से तय होगी।
