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तीलू रौतेली की वीरगाथा को डाक टिकट से मिला राष्ट्रीय सम्मान, कोटद्वार में गूंजा वीरभूमि का गौरवजयंती पर तीलू रौतेली चौक में विशेष कार्यक्रम, शौर्य और मातृभूमि के प्रति समर्पण को किया गया नमनकोटद्वार। उत्तराखंड की वीरभूमि की महान वीरांगना तीलू रौतेली की जयंती के अवसर पर कोटद्वार में उनकी गौरवगाथा को सम्मान देने वाला विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। तीलू रौतेली चौक पर आयोजित कार्यक्रम में डाक विभाग द्वारा वीरांगना तीलू रौतेली के सम्मान में विशेष डाक टिकट जारी किए जाने के अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया।कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने तीलू रौतेली के साहस, शौर्य, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति उनके समर्पण को नमन किया। वक्ताओं ने कहा कि तीलू रौतेली केवल उत्तराखंड की वीरांगना नहीं, बल्कि भारतीय नारी शक्ति, साहस और स्वाभिमान की प्रेरणादायी प्रतीक हैं।युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणावक्ताओं ने कहा कि तीलू रौतेली का जीवन संघर्ष और साहस की ऐसी गाथा है, जो आज भी युवा पीढ़ी को विपरीत परिस्थितियों में डटकर खड़े रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने अपने अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता से उत्तराखंड के इतिहास में अमिट स्थान बनाया।कार्यक्रम में कहा गया कि आज जब युवा पीढ़ी इतिहास और स्थानीय विरासत से दूर होती जा रही है, ऐसे आयोजनों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उत्तराखंड की वीर परंपरा, लोकनायकों और वीरांगनाओं के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।डाक टिकट जारी होना ऐतिहासिक सम्मानवक्ताओं ने तीलू रौतेली के सम्मान में डाक टिकट जारी किए जाने को उत्तराखंड की गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि डाक टिकट देश के इतिहास और महान व्यक्तित्वों की स्मृति को व्यापक स्तर पर संरक्षित करने का प्रभावी माध्यम है।तीलू रौतेली के नाम पर जारी डाक टिकट उनकी वीरता और योगदान को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे उत्तराखंड की वीर परंपरा को राष्ट्रीय पहचान मिलने के साथ ही तीलू रौतेली के जीवन और संघर्ष पर शोध तथा अध्ययन को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।तीलू रौतेली की विरासत को संरक्षित करने की जरूरतकार्यक्रम में यह भी जोर दिया गया कि तीलू रौतेली की स्मृति को केवल जयंती समारोहों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनके जीवन, संघर्ष और ऐतिहासिक योगदान को पाठ्यक्रम, शोध, साहित्य, संग्रहालयों और डिजिटल माध्यमों के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है।विशेषकर कोटद्वार और पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र को तीलू रौतेली की ऐतिहासिक विरासत से जोड़ते हुए पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को विकसित किया जा सकता है। इससे क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान मजबूत होने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने महान वीरांगना तीलू रौतेली को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।वीरांगना तीलू रौतेली को उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन।


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By udaen

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