सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर समाज निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है सहकार भारती

कोटद्वार। सहकारिता आधारित आर्थिक एवं सामाजिक विकास को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम में सहकार भारती के प्रदेश महामंत्री एवं राष्ट्रिय कार्यकारिणी सदस्य रविंदर कुमार ने संगठन की विचारधारा, विजन और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का शुभारंभ जिला अध्यक्ष बृजमोहन माधवाल द्वारा मुख्य अतिथि रविंदर कुमार के स्वागत से हुआ। इस अवसर पर फेडरेशन की अध्यक्ष दीपा कुमारी, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं, कृषक, काश्तकार तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में रविंदर कुमार ने बताया कि सहकार भारती की स्थापना वर्ष 1978 में हुई थी। संगठन का मूल मंत्र “बिना संस्कार नहीं सहकार, बिना सहकार नहीं उद्धार” है। उन्होंने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि समाज में विश्वास, सहयोग और आत्मनिर्भरता का संस्कार विकसित करने का माध्यम है।
उन्होंने बताया कि सहकार भारती का विजन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समर्पित सहकार कार्यकर्ताओं का ऐसा सशक्त नेटवर्क तैयार करना है, जो सहकारिता आंदोलन को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान कर सके। संगठन छोटे किसानों, महिलाओं, वनवासी समुदायों तथा समाज के वंचित वर्गों को सहकारिता के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। साथ ही विकेंद्रीकृत और श्रम-आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर समावेशी विकास का मॉडल स्थापित करना संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
रविंदर कुमार ने कहा कि सहकार भारती का मिशन लोगों को सहकारिता के सिद्धांतों और लाभों के प्रति जागरूक करना, नई सहकारी संस्थाओं की स्थापना को प्रोत्साहित करना, सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता को मजबूत करना तथा प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से सहकारिता नेतृत्व का निर्माण करना है। संगठन उत्पादक, उपभोक्ता और वितरक के बीच समन्वय स्थापित कर सहकारिता आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कार्य कर रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में सहकार भारती देशभर में 22 प्रकोष्ठों के माध्यम से कार्य कर रही है। शिक्षा, कचरा प्रबंधन, जड़ी-बूटी संवर्धन, कृषि, महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे अनेक क्षेत्रों में संगठन सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और किसानों ने सहकारिता आधारित विकास मॉडल को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से ही आत्मनिर्भर गांव, सशक्त किसान और समृद्ध भारत का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम के अंत में संगठन के विस्तार, आगामी गतिविधियों और नए सहकारी प्रयासों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई तथा अधिकाधिक लोगों को सहकारिता आंदोलन से जोड़ने का आह्वान किया गया।
