देहरादून, 11 अगस्त 2026।
उत्तराखंड में पत्रकारों की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण से जुड़े मुद्दों को लेकर Voice of Media, North Zone ने मुख्यमंत्री को 15 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा है। संगठन ने राज्य सरकार से पत्रकारों के हित में ठोस और समयबद्ध नीतिगत कदम उठाने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक एवं सामाजिक रूप से विशिष्ट राज्य में पत्रकारिता केवल समाचार प्रसारण का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र, जनसरोकार और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। विशेष रूप से दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में स्वतंत्र, ग्रामीण, डिजिटल, लघु एवं गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकार सीमित संसाधनों में कार्य कर रहे हैं।
Voice of Media, North Zone के अध्यक्ष दिनेश पी. एस. गुसाईं की ओर से मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
- पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाए तथा हिंसा, धमकी, उत्पीड़न और दबाव की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था हो।
- गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी पत्रकार कल्याण योजनाओं का लाभ दिया जाए।
- पत्रकार कल्याण कोष का विस्तार कर गंभीर बीमारी, दुर्घटना, दिव्यांगता, मृत्यु एवं आर्थिक संकट की स्थिति में तत्काल सहायता दी जाए।
- पत्रकार पेंशन योजना को सरल और व्यापक बनाया जाए तथा लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे स्वतंत्र एवं ग्रामीण पत्रकारों को भी इसका लाभ मिले।
- पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की जाए तथा प्रमुख अस्पतालों में पत्रकारों के लिए विशेष सुविधा/काउंटर की व्यवस्था हो।
- मैदानी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों के लिए सामूहिक दुर्घटना एवं जीवन बीमा उपलब्ध कराया जाए।
- लघु एवं स्वतंत्र मीडिया संस्थानों के लिए पारदर्शी विज्ञापन नीति बनाई जाए।
- सरकारी विज्ञापनों के वितरण में स्पष्ट पात्रता, दर एवं पारदर्शी प्रणाली लागू की जाए और राजनीतिक अथवा व्यक्तिगत प्रभाव के बजाय प्रसार, पहुंच, जनसरोकार एवं पत्रकारिता की गुणवत्ता को महत्व दिया जाए।
- प्रत्येक जिला मुख्यालय एवं प्रमुख विकासखंडों में पत्रकारों के लिए मीडिया सेंटर/प्रेस सुविधा केंद्र विकसित किए जाएं।
- देहरादून सहित जिला मुख्यालयों पर कार्यरत पत्रकारों के लिए सरकारी आवासीय योजनाओं में अलग कोटा निर्धारित किया जाए।
- आर्थिक रूप से कमजोर पत्रकारों के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए विशेष सहायता योजना शुरू की जाए।
- डिजिटल एवं स्वतंत्र पत्रकारिता को मान्यता देने के लिए न्यूज पोर्टल, वेब मीडिया, मोबाइल पत्रकारिता तथा स्वतंत्र पत्रकारों के लिए स्पष्ट एवं पारदर्शी व्यवस्था विकसित की जाए।
- पत्रकारों के लिए नियमित प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिनमें डिजिटल पत्रकारिता, AI, तथ्य-जांच, साइबर सुरक्षा, खोजी पत्रकारिता, आपदा रिपोर्टिंग और मीडिया कानून जैसे विषय शामिल हों।
- आपदा एवं संवेदनशील क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों के लिए विशेष सुरक्षा प्रशिक्षण, आवश्यक उपकरण और बीमा कवर उपलब्ध कराया जाए।
- पत्रकारों से जुड़े मुद्दों एवं नीतियों पर नियमित संवाद के लिए State Journalists Welfare Council का गठन किया जाए, जिसमें मान्यता प्राप्त, गैर-मान्यता प्राप्त, ग्रामीण, डिजिटल एवं स्वतंत्र पत्रकार संगठनों को उचित प्रतिनिधित्व मिले।
Voice of Media ने मुख्यमंत्री से इन मांगों पर विचार करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित कर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने तथा पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद स्थापित करने का अनुरोध किया है।
संगठन ने कहा कि पत्रकारों को सुविधाएं देना किसी व्यक्ति या संगठन को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि स्वतंत्र, जिम्मेदार और जनसरोकार वाली पत्रकारिता को मजबूत करना है। उत्तराखंड में पत्रकारिता को सुरक्षित और सक्षम वातावरण मिलने से लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा जनता के हितों को भी मजबूती मिलेगी।
