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स्व-सहायता समूहों के लिए लागू की गई ग्रामीण योजनाएं

PIB Delhi

ग्रामीण विकास मंत्रालय, ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित करने तथा उन्हें निरंतर विकसित एवं समर्थित करने के उद्देश्य से दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) कार्यान्वित कर रहा है, ताकि समय के साथ उनकी आय में सराहनीय वृद्धि हो सके तथा उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके। संचयी रूप से, 10.08 करोड़ महिलाओं को 92.30 लाख स्वयं सहायता समूहों में संचालित किया गया है। मिशन अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए चार मुख्य घटकों अर्थात (1) ग्रामीण गरीबों की स्व-प्रबंधित एवं वित्तीय रूप से टिकाऊ सामुदायिक संस्थाओं का सामाजिक संचालन, संवर्धन एवं सुदृढ़ीकरण; (2) ग्रामीण गरीबों का वित्तीय समावेशन; (3) टिकाऊ आजीविका; तथा (4) सामाजिक समावेशन एवं सामाजिक विकास में निवेश करता है। यह मिशन देश भर में 28 राज्यों एवं 6 संघ-राज्य क्षेत्रों (दिल्ली एवं चंडीगढ़ को छोड़कर) में कार्यान्वित किया जा रहा है।

मंत्रालय, डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत महिला स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत ऋण तक पहुंच उपलब्ध कराता है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत, महिला स्वयं सहायता समूह भारतीय रिज़र्व बैंक तथा राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के दिशा-निर्देशों के अनुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों तथा सहकारी बैंकों से जमानत-मुक्त ऋण प्राप्त करते हैं। इन स्वयं सहायता समूहों के प्रशिक्षण हेतु, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) इन समूहों सहित ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास एवं उद्यमशीलता प्रशिक्षण प्रदान करते हैं जिसमे महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया जाता है। ये संस्थान आजीविका एवं उद्यम विकास में सहायता प्रदान करके, बैंक ऋण संबद्धता की सुविधा प्रदान करके तथा प्रशिक्षणोपरांत व्यापक हैंडहोल्डिंग उपलब्ध कराकर स्वरोजगार को बढ़ावा देते हैं।

इसके अतिरिक्त, डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत सामुदायिक प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्रों (सीएमटीसी) को बढ़ावा दिया जाता है, जो समुदाय-स्वामित्व एवं समुदाय-प्रबंधित संस्थाएं हैं तथा क्षमता निर्माण, सहकर्मी अधिगम एवं ज्ञान के आदान-प्रदान के केंद्र के रूप में कार्य करती हैं।

डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत देश में स्थापित महिला स्वयं सहायता समूहों की कुल संख्या का राज्य-वार विवरण अनुबंध-I में दिया गया है।

स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को कई प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसमें लैंगिक असमानता, प्रवासन तथा निम्न साक्षरता जैसी सामाजिक बाधाएं शामिल हैं, जो भागीदारी एवं समावेशन को और अधिक बाधित करती हैं। इसके अतिरिक्त, विपणन सुविधाओं के विस्तार, प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुंच तथा प्राकृतिक आपदाओं, स्वास्थ्य आपातस्थितियों, जलवायु परिवर्तन एवं आर्थिक मंदी के प्रति संवेदनशीलता जैसी समस्याएं भी विद्यमान हैं।

डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक एवं संस्थागत सशक्तिकरण हेतु एक बहुआयामी रणनीति अपनाई है। इन कार्यकलापों के सकारात्मक परिणामों को मंत्रालय द्वारा प्रायोजित स्वतंत्र प्रभाव मूल्यांकन अध्ययनों के माध्यम से सत्यापित किया गया है। 9 राज्यों में लगभग 23,000 परिवारों को कवर करते हुए 2019 एवं 2024 में किए गए आंकड़ा संग्रहण के दो चरणों पर आधारित 3ie प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन (2025) में पाया गया कि एनआरएलएम ब्लॉकों में परिवारों की आय में 9.5% की वृद्धि हुई, जबकि परिपक्व सामुदायिक संस्था समूहों में आय वृद्धि 12% से 33% के बीच रही। इस अध्ययन में प्रति व्यक्ति पारिवारिक उपभोग में 6-11% की वृद्धि के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, आजीविका विविधीकरण एवं समग्र पारिवारिक कल्याण में सुधार की भी रिपोर्ट दी गई।

इसके अतिरिक्त, नीति आयोग के ग्रामीण विकास क्षेत्र में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के मूल्यांकन (2025) में डीएवाई-एनआरएलएम को एक अत्यंत प्रासंगिक एवं प्रभावी कार्यक्रम के रूप में आंका गया है, जिसमें आय वृद्धि, विविधीकृत आजीविका अवसरों, बेहतर वित्तीय समावेशन एवं साक्षरता, महिलाओं में अधिक आत्मविश्वास तथा सुदृढ़ सामुदायिक संस्थाओं एवं अन्य विकास पहलों के साथ अभिसरण के माध्यम से बेहतर सामाजिक समावेशन में इसके योगदान का उल्लेख किया गया है। ये निष्कर्ष महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने तथा ग्रामीण परिवारों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण में सुधार लाने में डीएवाई-एनआरएलएम की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हैं। इसने उल्लेखनीय सकारात्मक परिणाम दर्शाए हैं, जिसमें औसत पारिवारिक आय में 49% की वृद्धि हुई है। इसने महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण में भी योगदान दिया है, क्योंकि 58% महिलाओं ने बढ़े हुए आत्मविश्वास की जानकारी दी, 52% को आय-सृजन के अवसरों तक बेहतर पहुंच प्राप्त हुई, तथा 46% अपने बैंकिंग लेन-देन को स्वतंत्र रूप से प्रबंधित करने में सक्षम हो गईं। इसके अतिरिक्त, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों ने सिलाई, बकरी पालन एवं कृषि-व्यापार सहित विभिन्न आजीविका गतिविधियों में विविधीकरण किया है, जिससे आय के स्रोत सुदृढ़ हुए हैं तथा टिकाऊ ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा मिला है।

इसके अतिरिक्त, डीएवाई-एनआरएलएम योजना के अंतर्गत लखपति दीदी पहल एक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों की आय बढ़ाना है, ताकि उन्हें “लखपति दीदी” बनाया जा सके। इसमें स्वयं सहायता समूह सदस्यों को 1 लाख रुपये या इससे अधिक की वार्षिक आय प्राप्त करने में सहायता करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। देश भर में लखपति दीदियों की कुल संख्या 3.46 करोड़ तक पहुंच गई है, जो स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्यों की आय पर डीएवाई-एनआरएलएम योजना के प्रभाव को दर्शाती है।

                                                                                                                                                                                                अनुबंध-I

देश में स्थापित महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) का राज्य-वार विवरण:

क्र.सं.राज्य/संघ-राज्य क्षेत्रदेश में स्थापित एसएचजी (राज्यवार)
1अंडमान और निकोबार द्वीप समूह1,343
2आंध्र प्रदेश8,27,133
3अरुणाचल प्रदेश12,853
4असम3,56,760
5बिहार13,53,025
6छत्तीसगढ़2,91,453
7दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव1,823
8गोवा3,462
9गुजरात2,32,911
10हरियाणा62,921
11हिमाचल प्रदेश43,344
12जम्मू और कश्मीर96,637
13झारखंड3,20,838
14कर्नाटक2,97,982
15केरल2,38,981
16लद्दाख2,119
17लक्षद्वीप348
18मध्य प्रदेश4,68,501
19महाराष्ट्र6,67,562
20मणिपुर13,689
21मेघालय47,946
22मिजोरम10,083
23नागालैंड15,333
24ओडिशा5,51,414
25पुद्दुचेरी4,927
26पंजाब57,337
27राजस्थान3,36,928
28सिक्किम5,895
29तमिलनाडु3,48,977
30तेलंगाना3,93,845
31त्रिपुरा54,860
32उत्तर प्रदेश8,71,820
33उत्तराखंड69,811
34पश्चिम बंगाल11,67,882
कुल92,30,743

यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।


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By udaen

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