वित्त वर्ष 2025–26 में जीईएम के ज़रिए एमएसएमई से खरीद 2.37 लाख करोड़ रुपये तक पहुंची
PIB Delhi
30 जुलाई, 2026 तक सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पर पंजीकृत एमएसएमई, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों तथा स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की श्रेणी-वार संख्या निम्नलिखित है:
| विक्रेता समूह | अखिल भारतीय | कर्नाटक | बेंगलुरु |
| एमएसएमई | 11,75,001 | 55,053 | 16,091 |
| स्टार्टअप | 37,758 | 2,772 | 1,951 |
| महिला उद्यमी | 2,17,155 | 10,896 | 3,052 |
| स्वयं सहायता समूह | 3,784 | 266 | 09 |
जी हां, पिछले पांच वर्षों के दौरान जीईएम के माध्यम से एमएसएमई से खरीद में वृद्धि हुई है। पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान जीईएम के माध्यम से एमएसएमई से की गई खरीद का विवरण निम्नलिखित है:
| वित्त वर्ष | कुल ऑर्डर मूल्य (₹ करोड़ में) | एमएसएमई ऑर्डर मूल्य (₹ करोड़ में) | खरीद का अनुपात |
| वित्त वर्ष 21-22 | 1,06,597 | 59,033 | 0.554 |
| वित्त वर्ष 22-23 | 2,01,317 | 97,332 | 0.483 |
| वित्त वर्ष 23-24 | 4,03,569 | 1,90,485 | 0.472 |
| वित्त वर्ष 24-25 | 5,41,602 | 1,95,976 | 0.362 |
| वित्त वर्ष 25-26 | 5,02,776 | 2,37,235 | 0.472 |
जीईएम ने संभावित खरीद पैटर्न की पहचान के लिए एआई/एमएल आधारित विश्लेषणात्मक मॉडलों का उपयोग शुरू कर दिया है। इनमें खरीदार-विक्रेता की संभावित मिलीभगत, असामान्य मूल्य निर्धारण तथा बार-बार भागीदारी जैसे पैटर्न शामिल हैं। ये मॉडल ऑर्डरों के विभाजन (ऑर्डर स्प्लिटिंग), समान डिजिटल पहचान के आधार पर खरीदार-विक्रेता की संदिग्ध मिलीभगत, बोलीदाताओं के अर्हता अनुपात, खरीद मूल्यों की उत्पादों के माध्यिका मूल्यों के साथ तुलना आदि से संबंधित मामलों की पहचान करने में सहायता करते हैं। इन विश्लेषणात्मक उपकरणों के माध्यम से चिह्नित मामलों को संबंधित खरीदार संगठनों के सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष आगे की समीक्षा एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु उपलब्ध कराया जाता है।
जीईएम, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के टूलकिट का उपयोग करते हुए बोलीदाताओं की डिजिटल पहचान, जैसे आईपी एड्रेस, बोली मूल्य, बोली प्रस्तुत करने का समय आदि के आधार पर संभावित कार्टेल की पहचान करने का प्रयास करता है। जीईएम ने एक घटना प्रबंधन ढांचा स्थापित किया है, जिसके अंतर्गत झूठे दस्तावेज प्रस्तुत करने, कपटपूर्ण गतिविधियों, मिलीभगतपूर्ण व्यवहार तथा अन्य दुराचार से संबंधित उल्लंघनों की जांच की जाती है और जीईएम की नीतियों के अनुसार निलंबन सहित उपयुक्त प्रशासनिक कार्रवाई तथा अन्य उपाय नियमित रूप से किए जाते हैं।
पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान निलंबित किए गए विक्रेताओं की संख्या निम्नलिखित है:
| वित्त वर्ष | दर्ज किए गए मामले | निलंबित किए गए विक्रेता |
| 2023-24 | 1,96,793 | 72,902 |
| 2024-25 | 1,96,803 | 62,091 |
| 2025-26 | 1,81,035 | 55,772 |
निलंबन के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- उत्पादों/सेवाओं को गलत श्रेणी में या गलत विनिर्देशों के साथ सूचीबद्ध करना
- अनुचित ऑफ़र मूल्य देना
- डिलीवरी में अनुबंध में तय तिथि के मुकाबले विलंब
- अनुबंध सम्पन्न होने के बाद उत्पादों/सेवाओं की आपूर्ति करने से इंकार करना
जीईएम ने विक्रेता सत्यापन और खरीद प्रक्रिया की अखंडता को सुदृढ़ करने के लिए निम्नलिखित सहित अनेक सुरक्षा उपाय लागू किए हैं:
- जीईएम में विक्रेताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन है
- जीईएम ने ऑर्डरों के विभाजन (ऑर्डर स्प्लिटिंग), संदिग्ध बोली, असामान्य मूल्य निर्धारण तथा संभावित मिलीभगत जैसी खरीद संबंधी अनियमितताओं का पता लगाने के लिए उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरण तैनात किए हैं। इन उपकरणों द्वारा चिह्नित मामलों को कार्रवाई हेतु प्राथमिक खरीदारों के डैशबोर्ड पर प्रदर्शित किया जाता है।
प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार अथवा कार्टेल गठन को जीईएम के घटना प्रबंधन ढांचे के अंतर्गत गंभीर/अत्यंत गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में रखा गया है, और ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होने पर 365 दिनों तक के निलंबन का प्रावधान है।
यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
