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PIB Delhi

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज ‘डिजिटल कनेक्टिविटी विनियम, 2024 (2024 का 7) के लिए संपत्तियों का मूल्‍यांकन की समीक्षा’ पर एक परामर्श पत्र जारी किया है।

डिजिटल कनेक्टिविटी आधुनिक जीवन और आर्थिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण आधार बन गई है। पिछले दशक में तीव्र डिजिटलीकरण ने शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, वाणिज्य, नवाचार और सामाजिक संपर्क को बदल दिया है। अध्ययन और उद्योग रिपोर्ट दर्शाते हैं कि डेटा खपत का एक महत्वपूर्ण भाग इमारतों के अंदर होता है। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से 4जी और 5जी जैसी उन्नत मोबाइल तकनीकों के उपयोग के साथ अधिक स्पष्ट है, जो उच्च डेटा दर प्रदान करने के लिए उच्च आवृत्ति बैंड पर काम करती हैं, लेकिन दीवारों, भवन निर्माण सामग्री और निर्माण डिजाइन के कारण सिग्नल क्षीणन के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। परिणामस्वरूप, भवन के अंदर डिजिटल कनेक्टिविटी उपयोगकर्ता अनुभव और सेवा की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण निर्धारक बन गई है।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवा की गुणवत्ता के मानक निर्धारित करता है और सेवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है तथा दूरसंचार सेवाओं के उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान की जाने वाली ऐसी सेवाओं का आवधिक सर्वेक्षण करता है।

भवनों के अंदर सेवा की गुणवत्ता से संबंधित इन चुनौतियों का सुव्यवस्थित ढंग से समाधान करने के लिए, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने 25 अक्टूबर 2024 को ‘डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए संपत्तियों का मूल्यांकन विनियम, 2024 (2024 का 7)’ अधिसूचित किया था, जिसके तहत संपत्तियों का मूल्यांकन उनकी डिजिटल कनेक्टिविटी तत्परता के आधार पर किया जाएगा। इस ढांचे का उद्देश्य संपत्ति प्रबंधकों, डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग एजेंसियों (डीसीआरए), सेवा प्रदाताओं और अन्य हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है, साथ ही पारदर्शिता, जवाबदेही और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना है।

विनियमों को क्रियान्वित करने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने 13 अगस्त, 2025 को रेटिंग मैनुअल जारी किया। यह रेटिंग मैनुअल डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग फ्रेमवर्क का परिचालन आधार प्रदान करता है, जिसमें हितधारकों की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां, मूल्‍यांकन पद्धति और मूल्यांकन चरण, मूल्‍यांकन के लिए मानदंड और उप-मानदंड, उनके स्कोरिंग दृष्टिकोण सहित, और आवेदन, मूल्यांकन, प्रमाणीकरण, नवीनीकरण और अपील के लिए विस्तृत प्रक्रियाएं निर्धारित की गई हैं।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने विभिन्न हितधारकों के लिए कई जागरूकता और प्रस्तुति सत्र भी आयोजित किए हैं। डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग फ्रेमवर्क के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए जागरूकता और प्रस्तुति सत्रों के दौरान प्राप्त हितधारकों के सुझावों के आधार पर यह पाया गया है कि यद्यपि विनियम एक सुदृढ़ और व्यापक ढांचा प्रदान करते हैं, फिर भी कुछ क्षेत्रों में अतिरिक्त स्पष्टता और सुधार के लिए समीक्षा की आवश्यकता है। इन सुधारों का उद्देश्य उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता बढ़ाना, कार्यान्वयन के दौरान संपत्ति प्रबंधकों और डीसीआरए द्वारा सामना की जाने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करना और यह सुनिश्चित करना है कि फ्रेमवर्क अपने मूल उद्देश्य, सिद्धांतों या मूल्यांकन पद्धति को बदले बिना जमीनी हकीकतों के अनुरूप बना रहे।

यह देखा गया है कि मौजूदा फाइव-स्टार रेटिंग में सुधार की आवश्यकता है ताकि डिजिटल कनेक्टिविटी प्रदर्शन के विभिन्न स्तरों वाली संपत्तियों के बीच पर्याप्त अंतर किया जा सके, विशेष रूप से उन मामलों में जहां स्कोर सीमा मूल्यों के करीब हैं। तदनुसार, परामर्श पत्र में मूल्‍यांकन पैमाने को परिष्कृत करने के लिए अतिरिक्त हाफ-स्टार स्तरों को शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है, जिससे रेटिंग पैमाने को पांच से बढ़ाकर नौ स्तर कर दिया जाएगा।

निर्माणाधीन संपत्तियों के संबंध में यह देखा गया है कि बड़ी संख्या में संपत्तियों का विपणन और विक्रय निर्माण चरण के दौरान ही हो जाता है, जबकि मौजूदा ढांचा डिजिटल कनेक्टिविटी अवसंरचना (डीसीआई) के पूर्ण होने और डियू डिलिजेंस चरण-II के तहत जमीनी मूल्यांकन के बाद ही रेटिंग प्रदान करता है। इस कमी को दूर करने के लिए, परामर्श पत्र में निर्माणाधीन संपत्तियों के लिए डिजाइन-चरण मूल्यांकन और प्रमाणन तंत्र शुरू करके मौजूदा रेटिंग प्रक्रिया को पूरक बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। अंतिम डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग निर्माण और डियू डिलिजेंस चरण-II के पूर्ण होने के बाद ही प्रदान की जाएगी, जिससे मूल्यांकन की निष्पक्षता बनी रहेगी।

संपत्ति प्रकारों के वर्गीकरण के संबंध में, यह देखा गया है कि विनियम के अंतर्गत कुछ संपत्ति श्रेणियां वास्तविक उपयोग पैटर्न और डिजिटल कनेक्टिविटी आवश्यकताओं के साथ पूरी तरह से मेल नहीं खाती हैं। चूंकि विनियमों के अंतर्गत वर्गीकरण का उद्देश्य केवल प्रासंगिक रेटिंग मानदंडों की प्रयोज्यता निर्धारित करना है, इसलिए मूल्यांकन ढांचे की संगति, प्रासंगिकता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए कुछ संपत्ति प्रकारों को श्रेणी ‘ए’ और श्रेणी ‘बी’ के बीच पुनर्व्यवस्थित करने का प्रस्ताव दिया गया है।

इसके अलावा, हितधारकों ने संकेत दिया कि कुछ संपत्ति प्रबंधक औपचारिक रेटिंग के लिए आवेदन करने से पहले अपनी संपत्तियों में डिजिटल कनेक्टिविटी अवसंरचना के वर्तमान स्तर का आकलन करना और सुधार करना पसंद कर सकते हैं, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि स्वीकृत रेटिंग सार्वजनिक रूप से दिखाई देती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, एक वैकल्पिक डिजिटल कनेक्टिविटी ऑडिट तंत्र को सक्षम करने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसके तहत संपत्ति प्रबंधक मूल्यांकन और सुधार उद्देश्यों के लिए निर्धारित मानदंडों और उप-मानदंडों के आधार पर डिजिटल कनेक्टिविटी ऑडिट करने के लिए एक पंजीकृत डीसीआरए को नियुक्त कर सकते हैं।

डिजिटल कनेक्टिविटी विनियमों, 2024 (2024 का 7) के तहत संपत्तियों की रेटिंग की समीक्षा पर परामर्श पत्र भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है, जिसमें हितधारकों और दूरसंचार उपभोक्ताओं से सुझाव मांगे गए हैं। परामर्श पत्र में उठाए गए मुद्दों पर लिखित टिप्पणियां, या कोई अतिरिक्त सुझाव, परामर्श पत्र के अनुलग्नक-I में उल्लिखित विशिष्ट प्रारूप में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण की वेबसाइट पर या adv-qos1@trai.gov.in पर ईमेल के माध्यम से ja.qos1@trai.gov.in को एक प्रति के साथ 23 मार्च, 2026 तक भेजे जा सकते हैं ।

अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें:- श्री तेजपाल सिंह, सलाहकार (क्यूओएस-1) ईमेल:              adv-qos1@trai.gov.in  | दूरभाष: +91-11-20907759  

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By udaen

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