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द इंडियन एक्सप्रेस की खोजी रिपोर्ट के बाद निर्वाचन आयोग ने बदले कई फैसले, दो चुनाव आयुक्तों की 10 महीनों में दर्ज 14 आपत्तियों पर हुई कार्रवाई

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग को लेकर द इंडियन एक्सप्रेस की खोजी पत्रकार रितिका चोपड़ा की पड़ताल के बाद आयोग ने पिछले पांच सप्ताह के भीतर कई महत्वपूर्ण फैसलों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में बदलाव किया है। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित घोषणा को पूरी तरह अलग करना भी शामिल है।

4 नवंबर को प्रकाशित रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कामकाज और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े कम से कम 14 मामलों में लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया, अधिकारियों के अधिकार, तकनीकी व्यवस्था और आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।

फॉर्म-6 से हटाई गई SIR की घोषणा

विवाद का प्रमुख मुद्दा नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाला फॉर्म-6 था। इसके ऑनलाइन संस्करण में जुलाई 2026 में SIR से जुड़ी एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। इसमें आवेदकों से पूछा जा रहा था कि क्या उनका नाम अथवा उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण वाली मतदाता सूची में शामिल था।

इस घोषणा का जवाब दिए बिना ऑनलाइन आवेदन आगे नहीं बढ़ाया जा सकता था।

चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने 16 मई को इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि निर्धारित नियमों के तहत फॉर्म में बदलाव केंद्र सरकार ही कर सकती है। सुखबीर सिंह संधू ने भी 19 मई को इस आपत्ति का समर्थन किया और 13 अगस्त को इसे अनधिकृत एवं अवैध बताते हुए हटाने की बात कही।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 अक्टूबर को आयोग के निर्वाचन सूची प्रभाग ने फॉर्म-6 और SIR घोषणा को अलग-अलग करने का निर्णय लिया। इसके बाद 4 नवंबर को सामने आया कि ECINet पोर्टल पर अब फॉर्म-6 से यह घोषणा हटा दी गई है और इसे अलग दस्तावेज के रूप में उपलब्ध कराया गया है।

पांच सप्ताह में बदलीं कई अन्य व्यवस्थाएं

रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से जुड़े कई अन्य मामलों में भी बदलाव किए हैं।

  1. बैठकों की पारदर्शिता: अब आयोग की बैठकों से पहले एजेंडा साझा करने और बाद में कार्यवाही का विवरण जारी करने की व्यवस्था की गई है।
  2. विदेश यात्राएं: आयोग के अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी आवश्यक की गई है।
  3. नई आईटी व्यवस्थाएं: नए आईटी मॉड्यूल और पोर्टल पहले अधिकारियों की समिति और उसके बाद आयोग की मंजूरी के लिए रखे जाएंगे।
  4. ECINet का ऑडिट: चुनावी कानूनों और नियमों के अनुरूप ECINet के कामकाज की जांच के लिए 14 अक्टूबर को एक समिति गठित की गई। इसमें आईआईटी बॉम्बे और IISc बेंगलुरु के स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
  5. मैदानी अधिकारियों के अधिकार: मतदाता सूची से जुड़े मामलों में बूथ स्तर और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को अधिक अधिकार देने के लिए सॉफ्टवेयर में बदलाव किए गए हैं।
  6. गोवा के 97 मतदाता: गोवा में मतदाता सूची से हटाए गए 97 लोगों के नाम बहाल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए। आयोग के हलफनामे के अनुसार, 88 लोगों के फॉर्म-6 आवेदन स्वीकार किए जा चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट में आयोग ने क्या कहा?

निर्वाचन आयोग ने 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा था कि फॉर्म-6 में SIR घोषणा जोड़ने का उद्देश्य एक ही OTP और ई-सिग्नेचर के माध्यम से दोनों प्रक्रियाएं पूरी कराना था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में औपचारिक संशोधन नहीं किया गया था।

हालांकि आयोग ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन पोर्टल पर घोषणा को जिस तरह प्रदर्शित किया गया, उससे ऐसा प्रतीत हो सकता था कि निर्धारित फॉर्म में संशोधन कर दिया गया है। इसी को देखते हुए दोनों प्रक्रियाओं को अलग करने का निर्णय लिया गया।

आयोग की जवाबदेही पर उठे सवाल

द इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने कई महीनों तक आंतरिक स्तर पर आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन उन पर समय रहते क्या कार्रवाई हुई, यह सवाल बना रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों की पांच आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं। आयोग ने सितंबर में अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि ये आपत्तियां सामान्य प्रशासनिक सुझाव और प्रक्रियागत इनपुट थीं तथा महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे।

आयोग का कहना है कि जिन प्रक्रियाओं में सुधार की आवश्यकता थी, उन्हें ठीक किया गया है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने मतदाता सूची की विश्वसनीयता, निर्वाचन अधिकारियों की स्वायत्तता और चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज में पारदर्शिता को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है।

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, रितिका चोपड़ा की खोजी रिपोर्ट, 4 नवंबर 2026।


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By udaen

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