गम्हरिया थाने में सुरक्षा मांगने पहुंची थी महिला; तीन पुलिसकर्मी गिरफ्तार, 15 पुलिसकर्मी निलंबित किए जाने की खबर
नई दिल्ली/रांची। झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया पुलिस थाने में एक महिला के साथ कथित दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने घटना को गंभीरता से लेते हुए झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने सात दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई प्रतिवेदन (ATR) भी मांगा है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घटना 29 अक्टूबर 2026 की रात की है। महिला घरेलू विवाद के बाद अपने पति से मारपीट की आशंका के चलते पुलिस सहायता मांगने पहुंची थी। वह पहले पड़ोस के एक घर में गई, जहां से पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद गम्हरिया पुलिस की पीसीआर टीम उसे थाने लेकर पहुंची।
महिला की शिकायत के अनुसार, थाने में उसे आराम करने के लिए एक कमरे में भेजा गया था। इसी दौरान वहां तैनात एक वायरलेस ऑपरेटर पर उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। पीड़िता ने अगले दिन पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई।
तीन पुलिसकर्मी गिरफ्तार, 15 निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक ने विशेष जांच दल (SIT) गठित किया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्य आरोपी वायरलेस ऑपरेटर के साथ ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी और थाने के एक अन्य कर्मचारी को भी गिरफ्तार किया गया है। इस तरह मामले में गिरफ्तार पुलिसकर्मियों की संख्या तीन बताई गई है।
वहीं, थाने में कथित लापरवाही, कर्तव्य में चूक और अनुशासनहीनता के आरोप में थाना प्रभारी सहित कुल 15 पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की खबर है। पुलिस ने मामले से जुड़े साक्ष्य भी जब्त किए हैं और फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया शुरू की है। जांच जारी है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने डीजीपी को लिखा पत्र
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर ने झारखंड के डीजीपी को पत्र लिखकर निम्नलिखित निर्देश दिए हैं—
- मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए।
- दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई हो।
- घटना में संस्थागत स्तर पर हुई संभावित चूक और लापरवाही की जांच की जाए।
- पीड़िता को आवश्यक चिकित्सा सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श और कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए।
- पीड़िता की पहचान, निजता, गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- पुलिस थानों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल मजबूत किए जाएं।
- पुलिसकर्मियों को लैंगिक संवेदनशीलता का प्रशिक्षण दिया जाए।
आयोग ने इन सभी बिंदुओं पर सात दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है।
पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल
यह घटना पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही और महिलाओं की संस्थागत सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस पुलिस थाने में महिला घरेलू हिंसा की आशंका से बचने और सुरक्षा पाने पहुंची थी, वहीं पुलिसकर्मी पर यौन अपराध का आरोप सामने आया है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्पष्ट किया है कि पुलिस थाने महिलाओं के लिए सुरक्षा, संरक्षण और न्याय प्राप्त करने के सुरक्षित स्थान होने चाहिए। ऐसे मामलों में केवल आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि थाने में तैनात अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और संभावित लापरवाही की निष्पक्ष जांच हो।
स्रोत: राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से जारी जानकारी एवं NDTV की 1 नवंबर 2026 की रिपोर्ट।
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