नदियों-नहरों की जमीन पर भी लोग कब्जा करने लगे हैं। ऐसे में तीव्र प्रवाह वाली नदियां भी सिकुड़ती जा रही हैं। नदियों के किनारे कंक्रीट का जंगल उग गया है। जिला मुख्यालय की कल्याणी व बैगुल नदी की स्थिति भी कमोवेश यही है। कई जगहों पर नदियां सिकुड़ कर नाले का रूप ले चुकी हैं। आसपास विकास के नाम पर सड़क और भवन तैयार कर दिए गए हैं।
सिचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में दो साल में कुल 20 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि कम हो गई है। इन जमीनों पर आज इंडस्ट्रीज, सड़क, मकान आदि हैं। इसी तरह गूलों व नहरों को भी जिले में खत्म किया गया है। सिचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दीक्षांत ने बताया कि दो किसानों के खेतों के बीच में गूल होता है। खेत में मकान व उद्योग लगाने के दौरान गूल भी पाट दिया जाता है। विभाग की ओर से अतिक्रमण की कोई गिनती नहीं की गई है। लघु सिचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विनय सिंह ने बताया कि विकास भवन परिसर में भी एक नहर समय के साथ सिकुड़ गई है। पहले सिडकुल समेत आसपास के क्षेत्र में इसी नदी से सिचाई का कार्य किया जा रहा था। ——
कॉलोनाइजर्स के कब्जे में नदी, गूल व नहरें
रुद्रपुर : स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को बसाकर आबाद की गई तराई में वर्ष 2004 में सिडकुल की स्थापना की गई। उद्योग लगने के बाद बढ़ी आबादी के बीच कॉलोनाइजर्स की नजर यहां की जमीनों पर पड़ी। ऐसे में कॉलोनी काटने का काम भी तेजी से चला। कुछ लोगों ने अफसरों की मिलीभगत से कल्याणी व बैगुल नदी के किनारे अवैध रूप से मकान लिया है। ——-
जिला मुख्यालय में नदियां सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। 15 वर्षों में करीब 40 फीट चौड़ी बैगुल नदी ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में सिकुड़ कर 10 फीट तक आ गई है। वहीं कई अन्य तालाब, गूल आदि भी लोगों को बेच दिए गए हैं।
-रामपाल सिंह, महापौर, नगर निगम, रुद्रपुर
