भारत के व्यापार समझौते अपने कार्य की ओर अग्रसर PIB Delhi भारत मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के नेटवर्क का विस्तार करने से लेकर बाजार तक पहुंच का पूरा इस्तेमाल करने की ओर बढ़ रहा है। मौजूदा निर्यात प्रदर्शन एफटीए साझेदारों के बढ़ते वाणिज्यिक महत्व को दर्शाता है। निर्यात में शुरुआती तेजी, तरजीही सीओओ जारी करने में वृद्धि और इन बाजारों में निर्यात की विस्तृत रेंज में बदलाव स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। इससे संकेत मिलता है कि अधिक से अधिक कारोबार इन समझौतों से पैदा होने वाले अवसरों का लाभ उठाना शुरू कर रहे हैं। निर्यातकों को तरजीही लाभ प्राप्त करने और नए बाजारों में प्रवेश करने में मदद करने वाली सरकारी पहलों से भी इस बदलाव को सहयोग मिल रहा है। भारत के एफटीए निर्यात का परिदृश्य बीते एक दशक में, भारत ने अधिक आत्मविश्वासपूर्ण और दूरदर्शी व्यापार रणनीति अपनाई है, जिसके अंतर्गत उसने अपने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के नेटवर्क का विस्तार किया है। प्रत्येक समझौता भारतीय बाजार के विशाल आकार, देश की आर्थिक क्षमता और 1.4 बिलियन लोगों की क्षमताओं में बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय भरोसे को दर्शाता है। हाल ही में हुए व्यापार समझौते प्रमुख वैश्विक बाजारों तक फैले हुए हैं, जिससे व्यापार साझेदारी का विस्तार हुआ है और निर्यातकों के लिए कई अवसर पैदा हुए हैं। नए समझौतों के साथ ही, भारत उनके प्रभावी इस्तेमाल पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसका उद्देश्य इस बिंदु पर है कि बाजार तक पहुंच को व्यापक निर्यात भागीदारी, निवेश और रोजगार में परिवर्तित किया जाए, साथ ही घरेलू प्राथमिकताओं की रक्षा भी की जाए। इस संतुलित दृष्टिकोण का उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में भारत की यात्रा में मुक्त व्यापार समझौतों के योगदान को सुदृढ़ करना है। एफटीए बाजार में निर्यात प्रदर्शन भारत का बढ़ता…