देहरादून, 17 अगस्त 2026। उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) के तहत मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया को और कड़ा किया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सोमवार को सचिवालय में सभी जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से SIR अभियान की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने दावे एवं आपत्तियों के चरण में सुपर चेकिंग और फील्ड विजिट को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।
CEO ने आयुक्त कुमाऊं को नैनीताल और ऊधमसिंह नगर, जबकि आयुक्त गढ़वाल को देहरादून और हरिद्वार में कैंप करने के निर्देश दिए हैं। इन जिलों में मंडलायुक्त विशेष रूप से उन मतदान केंद्रों का फील्ड सत्यापन करेंगे, जहां मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए Form-6 और नाम हटाने के लिए Form-7 के अपेक्षाकृत अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं।
अधिक आवेदन वाले बूथों पर विशेष निगरानी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि SIR के दावे एवं आपत्तियों के चरण में केवल कागजी जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि जरूरत के अनुसार मौके पर जाकर भी सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को सुपर चेकिंग और फील्ड विजिट अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देशों के अनुसार जिन मतदान केंद्रों पर Form-6 के आवेदन 4 प्रतिशत से अधिक और Form-7 के आवेदन 2 प्रतिशत से अधिक हैं, वहां ERO स्तर पर संबंधित प्रपत्रों का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा।
यह व्यवस्था खास तौर पर उन बूथों की पहचान और जांच के लिए महत्वपूर्ण है जहां सामान्य औसत की तुलना में मतदाता जोड़ने या हटाने के आवेदन अधिक संख्या में सामने आए हैं। हालांकि, किसी बूथ पर अधिक आवेदन मिलना अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं माना जाएगा। वास्तविक स्थिति का निर्धारण दस्तावेजों और फील्ड सत्यापन के बाद ही किया जाएगा।
जिलाधिकारी करेंगे औचक निरीक्षण
CEO ने सभी जिलाधिकारियों को भी रैंडम फील्ड विजिट करने और मतदान केंद्रों का औचक निरीक्षण कर सुपर चेकिंग करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य SIR प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर किए जा रहे सत्यापन की गुणवत्ता की जांच करना और यह सुनिश्चित करना है कि दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण निर्धारित निर्वाचन मानकों के अनुरूप हो।
उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR 2026 के लिए मतदाता सूची, ड्राफ्ट रोल, ASD सूची, मतदान केंद्र सूची और अन्य निर्वाचन संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
चार जिलों पर विशेष फोकस
प्रशासन की ओर से जिन चार जिलों में मंडलायुक्तों के कैंप करने की व्यवस्था की गई है, उनमें देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर शामिल हैं। ये जिले राज्य के प्रमुख शहरी एवं मैदानी क्षेत्र हैं और यहां आबादी तथा मतदाताओं की संख्या भी अपेक्षाकृत अधिक है।
इससे पहले भी SIR की तैयारियों के दौरान देहरादून, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में मतदाता मैपिंग की प्रगति को लेकर विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए थे।
मतदाताओं के लिए भी महत्वपूर्ण चरण
SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने अथवा संशोधन से संबंधित दावे और आपत्तियां लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार Form-6 नए मतदाता के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत Form-7 का उपयोग होता है।
ऐसे में प्रशासन की ओर से की जा रही सुपर चेकिंग का उद्देश्य केवल अधिक आवेदन वाले बूथों की निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित बनाने का भी है।
अधिकारियों की मौजूदगी
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चन्द्र दुम्का, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास सहित सभी जनपदों के जिलाधिकारी उपस्थित रहे।
निर्वाचन विभाग की वेबसाइट पर SIR 2026 से संबंधित अपडेट, ड्राफ्ट मतदाता सूची और मतदाता सेवाओं के लिंक उपलब्ध हैं।
संपादकीय दृष्टि से देखें तो SIR के इस चरण की सबसे बड़ी चुनौती पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना है। नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में प्रत्येक पात्र मतदाता को उचित अवसर मिलना और प्रत्येक आपत्ति का तथ्यात्मक सत्यापन होना जरूरी है। विशेषकर अधिक आवेदन वाले बूथों पर होने वाली सुपर चेकिंग के परिणामों को भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना लोकतांत्रिक विश्वास को मजबूत कर सकता है।
