रंगभेद के खिलाफ लड़ाई से अंतरराष्ट्रीय न्याय तक, मानवाधिकारों की रक्षा के लिए मिला प्रतिष्ठित सम्मान
नई दिल्ली/ओस्लो, 9 अक्टूबर। दक्षिण अफ्रीका की प्रख्यात मानवाधिकार अधिवक्ता और न्यायविद नवनेथम ‘नवी’ पिल्लै को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की गई है। नोबेल समिति ने उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने तथा युद्ध अपराधों, मानवता के विरुद्ध अपराधों और नरसंहार के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया है।
रंगभेद के दौर में शुरू हुआ संघर्ष
1941 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में जन्मीं नवी पिल्लै ने रंगभेद की व्यवस्था के बीच कानून की पढ़ाई की। उन्होंने उन कार्यकर्ताओं और लोगों के अधिकारों की पैरवी की, जिन्होंने नस्लीय भेदभाव और अन्याय का विरोध किया।
1995 में वह दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय की न्यायाधीश नियुक्त हुईं। बाद में उन्होंने रवांडा के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। वहां उनके योगदान ने इस कानूनी सिद्धांत को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई कि यौन हिंसा और बलात्कार कुछ परिस्थितियों में मानवता के विरुद्ध अपराध और नरसंहार के अपराध का हिस्सा हो सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भी निभाई अहम भूमिका
नवी पिल्लै ने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों और मानवाधिकार संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
वर्ष 2021 से 2025 तक उन्होंने फिलिस्तीनी क्षेत्रों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की अध्यक्षता की। इस आयोग ने गाजा में नरसंहार के संबंध में निष्कर्ष दिए, जिन्हें इजरायल ने खारिज किया। यह विवाद अंतरराष्ट्रीय कानून और जवाबदेही पर वैश्विक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
दुनिया के लिए क्या है इस सम्मान का संदेश?
नवी पिल्लै को दिया गया यह सम्मान इस विचार को रेखांकित करता है कि शांति केवल युद्धविराम या हथियारों की खामोशी का नाम नहीं है। स्थायी शांति के लिए न्याय, मानव गरिमा, कानून का शासन और पीड़ितों को न्याय मिलना भी आवश्यक है।
नोबेल समिति ने अपने निर्णय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानून की महत्ता पर जोर दिया है। उसका संदेश है कि शक्तिशाली देशों और नेताओं को भी कानून के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।
संपादकीय दृष्टि से संदेश: जब दुनिया के अनेक हिस्सों में युद्ध, विस्थापन और मानवाधिकार उल्लंघन की चुनौतियां बनी हुई हैं, तब नवी पिल्लै का सम्मान याद दिलाता है कि न्याय की मांग सीमाओं, नस्ल और सत्ता से ऊपर उठकर की जानी चाहिए। लोकतंत्र की असली ताकत केवल संस्थाओं के अस्तित्व में नहीं, बल्कि उनकी स्वतंत्रता और हर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करने की क्षमता में निहित है।
स्रोत: नोबेल शांति पुरस्कार समिति की आधिकारिक घोषणा और डॉयचे वेले (DW)।
