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वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी का यह कथन कि “जनता की सरकार तभी मजबूत रहेगी, जब चुनाव निष्पक्ष हों, सरकार जवाबदेह और अफसरशाही पारदर्शी हो” भारतीय लोकतंत्र की बुनियादी अपेक्षाओं को सामने रखता है।

लोकतंत्र केवल चुनाव कराने या बहुमत हासिल करने का नाम नहीं है। उसकी वास्तविक मजबूती इस बात से तय होती है कि नागरिकों को अपने प्रतिनिधि चुनने का समान अवसर मिले, चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहे और सत्ता में बैठे लोग अपने निर्णयों के लिए जवाबदेह हों।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठें तो जवाब भी जरूरी है। विपक्ष को चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका हो तो उसे संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीकों से सवाल उठाने, प्रमाण प्रस्तुत करने तथा जवाब मांगने का अधिकार है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह शिकायतों की निष्पक्ष जांच करे और तथ्यों के आधार पर स्पष्टीकरण दे। केवल आरोप लगा देना अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन शिकायतों को बिना जांच खारिज कर देना भी जनविश्वास बढ़ाने का रास्ता नहीं है।

इसी तरह, सरकार की मजबूती का अर्थ केवल संसद या विधानसभा में संख्याबल नहीं है। मजबूत सरकार वह है जो जनता के प्रति जवाबदेह हो, संस्थाओं की स्वतंत्रता का सम्मान करे और आलोचना को लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा माने।

अफसरशाही में पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र नागरिकों तक पहुंचे, शिकायतों का समय पर निस्तारण हो, सरकारी निर्णयों के आधार स्पष्ट हों और प्रशासनिक कार्रवाई राजनीतिक पक्षधरता से मुक्त रहे—ये सुशासन की आवश्यक शर्तें हैं।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में इसका महत्व और बढ़ जाता है। दूरस्थ गांवों में रहने वाले नागरिकों को सरकारी योजनाओं, पेंशन, भूमि संबंधी मामलों और स्थानीय विकास कार्यों के लिए कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। यदि नागरिकों को सूचना का अधिकार इस्तेमाल करने, शिकायत दर्ज कराने या अपने मताधिकार से जुड़े सवाल पूछने पर ही संघर्ष करना पड़े, तो लोकतंत्र की संस्थागत मजबूती पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन पारदर्शिता से करे, सरकार जवाबदेही सुनिश्चित करे, विपक्ष प्रमाण आधारित सवाल उठाए और प्रशासन नागरिकों के प्रति संवेदनशील बने।

लोकतंत्र में संस्थाओं पर भरोसा केवल दावों से नहीं, बल्कि उनके कामकाज से बनता है। निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेह सरकार और पारदर्शी प्रशासन—ये किसी एक दल की मांग नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार और शासन की संवैधानिक जिम्मेदारी हैं।


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By udaen

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