dairy cooperatives: कंपनियों के बराबर टैक्स चाहती हैं डेयरी कोऑपरेटिव्स – dairy cooperatives seeks corporate tax letter nirmala sitharaman
डेयरी कोऑपरेटिव्स ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से उन पर कंपनियों के बराबर ही टैक्स लगाने का निवेदन किया है। पिछले महीने कॉर्पोरेट टैक्स में हुई कटौती के बाद से इन कोऑपरेटिव पर लगने वाले टैक्स की दर अधिक हो गई है। अमूल बटर बनाने वाली गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) के डायरेक्टर आर एस सोढ़ी ने वित्त मंत्री को लिखे एक पत्र में कहा है, ‘हम किसानों से जुड़े हैं। इस वजह से अमूल और अन्य सहकारी संगठनों का मानना है कि इस सेक्टर पर लगने वाला टैक्स कॉर्पोरेट के बराबर होना चाहिए।’ ईटी ने इस पत्र की कॉपी देखी है।कॉर्पोरेट टैक्स घटकर 22 पर्सेंट हुआ
सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स को 30 पर्सेंट से घटाकर 22 पर्सेंट कर दिया है। किसानों की हिस्सेदारी वाली डेयरी कोऑपरेटिव अभी भी 30 पर्सेंट की पुरानी दर से टैक्स का भुगतान कर रही हैं। इस वजह से अमूल बटर, चॉकलेट और आइसक्रीम बनाने वाली GCMMF और अन्य डेयरी कोऑपरेटिव नेस्ले, ब्रिटानिया और एचयूएल जैसी अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की तुलना में नुकसान की स्थिति में आ गई हैं।
कृषि से जुड़े इस सेक्टर पर अब ज्यादा टैक्स
सोढ़ी ने ईटी से कहा, ‘अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कृषि से जुड़ा यह सेक्टर अब कॉर्पोरेट से अधिक टैक्स का भुगतान कर रहा है। हमने सरकार से आग्रह किया है कि ग्रोथ और निवेश को बढ़ाने और प्रतिस्पर्धा के समान अवसर मुहैया कराने के लिए कोऑपरेटिव सेक्टर पर भी कॉर्पोरेट के बराबर ही टैक्स लगाया जाना चाहिए।’
कॉर्पोरेट टैक्स में हुई थी कटौती
सरकार ने 20 सितंबर को कॉर्पोरेट टैक्स में बड़ी कटौती का ऐलान किया था। इसके बाद से घरेलू कंपनियों पर इनकम टैक्स की दर 22 पर्सेंट हो गई है। सरचार्ज और सेस के साथ यह दर 25.17 पर्सेंट होगी। 31 मार्च 2019 को खत्म हुए वित्त वर्ष में GCMMF का स्टैंडअलोन टर्नओवर 13 पर्सेंट बढ़कर 33,150 करोड़ रुपये रहा था। गुजरात के अलावा महाराष्ट्र, पंजाब और केरल में भी बड़े साइज की डेयरी कोऑपरेटिव मौजूद हैं।
डेयरी इंडस्ट्री में अच्छी ग्रोथ
देश की डेयरी इंडस्ट्री में अच्छी ग्रोथ देखी जा रही है और पिछले साल भारत दुनिया के अग्रणी दुग्ध उत्पादक देशों में शामिल था। ग्लोबल रिसर्च फर्म रिसर्च एंड मार्केट्स की मार्च 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 तक देश की मिल्क प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में 14.8 पर्सेंट के सीएजीआर से ग्रोथ का अनुमान है और तब तक इसकी बिक्री 2.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।
देश में बढ़ रही दूध की मांग
रिपोर्ट में देश में दूध की बढ़ती मांग के पीछे जनसंख्या में बढ़ोतरी का कारण बताया गया है। इस सेक्टर की ग्रोथ में कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की कमी और कमजोर वितरण बड़ी रुकावटें हैं।
