दिव्यांगजन सशक्तिकरण

दिल्ली

खेल के मैदान में देश का गौरव बढ़ाने वाली पैरालिम्पियन सुवर्णा राज को अब दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा और उनके सशक्तिकरण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। एशियन पैरा गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता सुवर्णा राज की दिल्ली के दिव्यांगजन आयुक्त पद पर नियुक्ति दिव्यांग अधिकारों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
यह नियुक्ति इस दृष्टि से भी उल्लेखनीय है कि दिव्यांगजनों की चुनौतियों और जरूरतों को स्वयं अनुभव करने वाली एक खिलाड़ी अब नीतियों के क्रियान्वयन और अधिकारों की निगरानी से जुड़ी जिम्मेदारी निभाएंगी।
एशियन पैरा गेम्स में भी रचा इतिहास
सुवर्णा राज ने जापान के नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिलाओं की F54 डिस्कस थ्रो स्पर्धा में 15.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। इस उपलब्धि के बाद उन्हें दिल्ली में दिव्यांगजन राज्य आयुक्त की जिम्मेदारी मिली।
वे तीन एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, वे दिव्यांगजनों की सुगम्यता और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय रही हैं। वे भारतीय निर्वाचन आयोग की सुलभ चुनाव पहल की ब्रांड एंबेसडर भी रह चुकी हैं। NDTV Special Projects+2
कैसे हुआ चयन?
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली चयन समिति द्वारा अनुशंसित तीन उम्मीदवारों के पैनल में से सुवर्णा राज के नाम को अंतिम मंजूरी दी।
चयन प्रक्रिया के दौरान:
- जुलाई 2026 में आवेदन आमंत्रित किए गए।
- कुल 18 आवेदन प्राप्त हुए।
- 15 उम्मीदवार पात्र पाए गए।
- 20 अगस्त को 13 उम्मीदवारों का साक्षात्कार हुआ।
- समिति ने तीन नामों का पैनल उपराज्यपाल को भेजा। Jagran+1
दिव्यांगजन आयुक्त के अधिकार और जिम्मेदारियां
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 79 के अंतर्गत राज्य दिव्यांगजन आयुक्त का प्रावधान है। इस पद की प्रमुख जिम्मेदारियां हैं:
- दिव्यांगजनों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के संरक्षण की निगरानी।
- अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों की जांच।
- सरकारी विभागों में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा।
- सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुझाव देना।
- शिक्षा, रोजगार, सार्वजनिक परिवहन और सरकारी संस्थानों में सुगम्यता से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई करना।
दिल्ली में इस पद का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने से तीन वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो, निर्धारित है। NDTV Special Projects+1
उत्तराखंड के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश
सुवर्णा राज की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं है। यह दिव्यांगजन अधिकारों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि दिव्यांगजनों से जुड़े निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उनके अनुभव और नेतृत्व को भी पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए।
उत्तराखंड में भी दिव्यांगजन आयुक्त की संस्था को अधिक सक्रिय, जवाबदेह और अधिकार आधारित बनाने की आवश्यकता है। दिव्यांगजनों की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, सरकारी भवनों में सुगम्यता, रोजगार, शिक्षा, परिवहन और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की पहुंच जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड भी दिव्यांगजनों को केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी मानने के बजाय उन्हें नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में नेतृत्व की भूमिका देने की दिशा में आगे बढ़ेगा?
दिव्यांगजन सशक्तिकरण का अर्थ केवल सहायता देना नहीं, बल्कि अधिकार, सम्मान, समान अवसर और नेतृत्व का अवसर देना भी है।
समाचार स्रोत: The Federal | दैनिक जागरण | NDTV
