🚌 हेलमेट नहीं पहनने पर ₹1,000 का चालान, लेकिन रोडवेज की ओवरलोडिंग पर कार्रवाई क्यों नहीं?
उत्तराखंड में दोपहिया वाहन पर पीछे बैठने वाला व्यक्ति हेलमेट नहीं पहनता तो ₹1,000 का चालान काट दिया जाता है। सड़क सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी भी है।
लेकिन एक सवाल उत्तराखंड परिवहन विभाग और रोडवेज प्रबंधन से भी है।
जब रोडवेज की बसों में सभी सीटें भर जाती हैं, तब भी बसों में यात्रियों को खड़े-खड़े ठूंसकर सफर कराया जाता है। यात्रियों से किराया भी पूरा वसूला जाता है, लेकिन उन्हें बैठने के लिए सीट तक नहीं मिलती।
आखिर बसों में यात्रियों की अधिकतम संख्या निर्धारित करने वाले मानक क्या हैं?
क्या बस की सीटें भर जाने के बाद भी यात्रियों को खड़े होकर ले जाने की अनुमति है? यदि हां, तो कितनी संख्या तक? और यदि निर्धारित क्षमता से अधिक यात्री ले जाए जा रहे हैं, तो जिम्मेदारी किसकी है?
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 194A के तहत निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को ले जाने पर प्रति अतिरिक्त यात्री ₹200 जुर्माने का प्रावधान है।
सवाल यह है कि जब आम नागरिक के हेलमेट पर नियमों का सख्ती से पालन कराया जा सकता है, तो सार्वजनिक परिवहन में क्षमता से अधिक यात्रियों को ले जाने पर भी वैसी ही निगरानी और कार्रवाई क्यों नहीं होती?
आखिर यात्रियों की सुरक्षा भी तो उतनी ही महत्वपूर्ण है।
नियम सबके लिए समान होने चाहिए। सड़क सुरक्षा केवल दोपहिया वाहन चालकों की जिम्मेदारी नहीं, सार्वजनिक परिवहन संचालकों की भी जिम्मेदारी है।
क्या उत्तराखंड परिवहन विभाग इस सवाल का जवाब देगा?
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