मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार धीरेंद्र सिंह पंवार मुख्य अतिथि और राज्य मंत्री डॉ. संतोष खंडूरी विशिष्ट अतिथि के रूप में हुए शामिल, ‘मैं पहाड़ों को रैवासी’ गीत ने बांधा समां
देहरादून, 2 नवंबर। उत्तराखंड ट्रेड महोत्सव में आयोजित सांस्कृतिक संध्या पहाड़ की लोकसंस्कृति, पारंपरिक संगीत और लोकगीतों के नाम रही। लोक गायक सौरभ मैठाणी एवं उनके साथियों की शानदार प्रस्तुतियों ने महोत्सव में पहुंचे दर्शकों को देर तक झूमने पर मजबूर कर दिया। विशेष रूप से उनके लोकप्रिय गीत ‘मैं पहाड़ों को रैवासी’ ने दर्शकों में खासा उत्साह पैदा किया। गीत की धुन पर दर्शक भी खुद को थिरकने से नहीं रोक सके।
सांस्कृतिक संध्या में धीरेंद्र सिंह पंवार, मीडिया सलाहकार, माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि डॉ. संतोष खंडूरी, राज्य मंत्री उत्तराखंड सरकार ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि धीरेंद्र सिंह पंवार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने उत्तराखंड ट्रेड महोत्सव के आयोजक सुनील रावत के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन प्रदेश के छोटे उद्यमियों, स्थानीय उत्पादों और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं विपणन के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने ऐसे आयोजनों को प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम का आगाज लोक गायक सौरभ मैठाणी एवं उनके साथियों की प्रस्तुति से हुआ। कलाकारों ने उत्तराखंड की लोकधुनों और पारंपरिक संगीत के माध्यम से पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया। उनकी प्रस्तुतियों में पहाड़ की मिट्टी, रहन-सहन, परंपराओं और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का भाव देखने को मिला।
‘मैं पहाड़ों को रैवासी’ गीत ने विशेष रूप से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। गीत के बोलों और संगीत ने पहाड़ से जुड़े लोगों में अपनत्व और सांस्कृतिक पहचान की भावना को मजबूत किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान दर्शक लोकगीतों की धुनों पर झूमते और कलाकारों का उत्साहवर्धन करते नजर आए।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड ट्रेड महोत्सव केवल व्यापार और स्थानीय उत्पादों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों, छोटे कारोबारियों और स्वयं सहायता समूहों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही उत्तराखंड की लोककला, संस्कृति और प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।
