राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर स्थित कासना जेल में एक नाबालिग लड़के को दो महीने से अधिक समय तक वयस्क कैदी की तरह अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले का स्वतः संज्ञान लिया है, लड़के को बाद में किशोर गृह में स्थानांतरित किया गया था

खबरों के अनुसार, जिले में मजदूरों द्वारा वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर किए गए विरोध…

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर शिब्बूनगर में होगा भव्य योग आयोजन

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर शिब्बूनगर में होगा भव्य योग आयोजन कोटद्वार, 17 जून। महर्षि कण्व योग समिति के तत्वावधान में…

मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान में तेजी, 17 जून तक शत-प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरण का लक्ष्य

कार्यालय जिला सूचना अधिकारी, पौड़ी गढ़वाल कम प्रगति वाले बूथों की विशेष निगरानी एवं डिजिटाइजेशन कार्य में तेजी लाने के…

कोटद्वार के पदमपुर मोटाढांक में 17 जून को आयोजित होगा बहुउद्देशीय समाज कल्याण शिविर

कार्यालय जिला सूचना अधिकारी, पौड़ी गढ़वाल कोटद्वार के पदमपुर मोटाढांक में 17 जून को आयोजित होगा बहुउद्देशीय समाज कल्याण शिविर…

चारधाम यात्रा मार्ग पर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच तेज, मोबाइल लैब से 176 नमूनों की हुई जांच

कार्यालय जिला सूचना अधिकारी, पौड़ी गढ़वाल चारधाम यात्रा मार्ग पर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच तेज, मोबाइल लैब से 176…

जनपद में राशन कार्ड सत्यापन अभियान जारी, 7,799 अपात्र कार्ड निरस्त; 3,347 पात्र परिवारों को मिला खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ

कार्यालय जिला सूचना अधिकारी, पौड़ी गढ़वाल जनपद में राशन कार्ड सत्यापन अभियान जारी, 7,799 अपात्र कार्ड निरस्त; 3,347 पात्र परिवारों…

दिल्ली झुग्गी पुनर्वास नीति 2026 को मंजूरी, 4 लाख परिवारों को मिलेगा लाभ

दिल्ली झुग्गी पुनर्वास नीति 2026 को मंजूरी, 4 लाख परिवारों को मिलेगा लाभ नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दिल्ली में…

सहमति बनाम शोषण: सुप्रीम कोर्ट ने सेक्स वर्क और मानव तस्करी के बीच खींची स्पष्ट कानूनी रेखा”.

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अकेले रहकर वेश्यावृत्ति करने वाली महिला का घर स्वतः “कोठा” नहीं नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट…

मुख्यमंत्री ने दिया पारंपरिक कृषि और जैविक खेती को बढ़ावा देने का संदेश

मुख्यमंत्री ने दिया पारंपरिक कृषि और जैविक खेती को बढ़ावा देने का संदेश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खेत में…

जीवन की सुगमता: भारत की समावेशी प्रगति की यात्रा

जीवन की सुगमता: भारत की समावेशी प्रगति की यात्रा PIB Delhi 2014 से 2026 के बीच सुशासन की एक निर्णायक यात्रा ने भारतीय नागरिकों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बदल दिया। उन्हें सुरक्षित घर, साफ़ ईंधन, पीने का सुरक्षित पानी और बेहतर साफ़-सफ़ाई जैसी सुविधाओं के ज़रिए नए अवसर मिले। भरोसेमंद बिजली, सस्ती रौशनी और बेहतर परिवहन नेटवर्क ने लाखों लोगों को आराम और कनेक्टिविटी दी। सड़कें, बेहतर रेलवे, मेट्रो सिस्टम और क्षेत्रीय हवाई मार्गों ने यात्रा की थकान कम की और अलग-अलग इलाकों के बीच आवाजाही को आसान बनाया। ‘जन धन’ और ‘मुद्रा’ जैसी योजनाओं के ज़रिए वित्तीय समावेशन ने उन नागरिकों के लिए बैंकिंग और ऋण के रास्ते खोले जो अब तक इससे दूर थे। ‘अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन’ (अमृत) के ज़रिए शहरी अवसंरचना में सुधार हुआ। डिजिटल सुधारों और ‘माईगव’ जैसे भागीदारी वाले प्लेटफ़ॉर्म ने जवाबदेही और नागरिकों की भागीदारी को मज़बूत किया। इन सभी पहलकदमियों ने मिलकर देश भर के परिवारों के लिए मज़बूती, सम्मान और नए अवसर पैदा किए। भारत की यह 12 साल की यात्रा समावेशी प्रगति को दिखाता है, जिसमें सुशासन ने रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बदला और लाखों लोगों के लिए विकास की नींव को मज़बूत किया। परिवर्तन के बारह वर्ष: भारत में ‘जीवन की सुगमता‘ की कहानी 2014 के बाद से भारत की यात्रा सम्मान, अवसर और समावेशी प्रगति की दिशा में एक अहम बदलाव को दिखाती है। पिछले 12 वर्षों में महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों और सुधारों के ज़रिए शासन में एक उद्देश्य के साथ बदलाव आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सुरक्षित घर, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के ज़रिए साफ़ ईंधन और जल जीवन मिशन के तहत पीने का साफ़ पानी मिलने से लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी बदल गई है। स्वच्छ भारत मिशन से पूरे देश में साफ़-सफ़ाई बेहतर हुई, जबकि सौभाग्य योजना से लाखों घरों तक भरोसेमंद बिजली पहुंची। नए राजमार्गों, सुरंगों, पुलों, मेट्रो नेटवर्क और क्षेत्रीय हवाई मार्गों के साथ परिवहन और कनेक्टिविटी का ऐतिहासिक तेज़ी से विस्तार हुआ। प्रधानमंत्री जन धन योजना और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के ज़रिए वित्तीय समावेशन ने नागरिकों को बैंकिंग, ऋण और सुरक्षा के मामले में सशक्त बनाया। अटल मिशन फ़ॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफ़ॉर्मेशन (अमृत) के तहत शहरी बदलाव ने हज़ारों कस्बों में अवसंरचना और सेवाओं को मज़बूत किया। डिजिटल सुधारों और माईगव जैसे नागरिक प्लेटफ़ॉर्म ने सुशासन में लोगों की भागीदारी, जवाबदेही और भरोसे को बढ़ाया। इन सभी पहलों ने मिलकर आराम, सुरक्षा और अवसर का एक नया माहौल बनाया है। आवास और मूलभूत सुविधाएं एक सुरक्षित और पक्के (स्थायी) घर तक पहुंच सम्मानजनक जीवन की नींव है। 2014 से पहले, शहरी और ग्रामीण भारत, दोनों ही जगहों पर सरकारी आवास उपलब्ध कराने का दायरा और गति ज़रूरत के हिसाब से बहुत कम थी। शहरी इलाकों के लिए 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) शुरू की गई थी। 2016 में पीएमएवाई-ग्रामीण के तहत इसे ग्रामीण इलाकों तक बढ़ाया गया, जिससे किफायती आवास के लक्ष्य और उसे उपलब्ध कराने के तरीके में बुनियादी बदलाव आया। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी (पीएमएवाई–यू) 2015 में शुरू पीएमएवाई-यू योजना, शहर में रहने वाले हर पात्र परिवार को पक्का घर देती है। यह योजना भारत के सभी शहरी इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडबल्यूएस), कम आय वाले वर्ग (एलआईजी) और मध्यम आय वाले वर्ग (एमआईजी) के लोगों के लिए है।…

सहकारिता क्षेत्र में इस नई पहल को शुरू करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड

उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जहां त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के सहयोग से परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की…

ऑनलाइन हुई उत्तराखंड की सहकारी सेवाएं, सहकारिता विभाग के नये पोर्टल का शुभारंभ

नव विकसित इस पोर्टल के माध्यम से सहकारी समितियों से जुड़ी सभी सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध होंगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी…