‘खाद का सही उपयोग’ के लिए जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन
श्री डी. वी. सदानंद गौड़ा, केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री ने कहा कि ‘भारत में ग्रामीण लोगों की आजीविका का मुख्य स्रोत अभी भी कृषि-केंद्रित है’। श्री गौड़ा आज राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में आयोजित ‘खाद का सही उपयोग’ के लिए जागरूकता कार्यक्रम के दौरान संबोधित कर रहे थे।


मंत्री ने कहा कि देश की आधी से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर है और लगभग हर तीसरा किसान सीमांत या लघु श्रेणी का किसान है। उन्होंने देश की अनाज उत्पादकता पर भी जोर दिया जो कृषि-केंद्रित है। श्री गौड़ा ने मिट्टी के ज्ञान और उचित संरक्षण पर जोर दिया क्योंकि यह भोजन, पोषण, पर्यावरण और आजीविका सुरक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्त्वपूर्ण संसाधन है।
उन्होंने मिट्टी के संरक्षण और प्रबंधन के लिए भी आग्रह किया ताकि बिना क्षति पहुँचाए अच्छी गुणवत्ता वाली मिट्टी अगली पीढ़ी को हस्तांतरित किया जा सके। मंत्री ने विभिन्न यूरिया और पोषक तत्त्वों पर आधारित सब्सिडी के बारे में उल्लेख किया है जो भारत सरकार द्वारा फास्फेटिक और पोटासिक खादों पर दी जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जस्ता और बोरोन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से जस्ता और बोरोन से लेपित खादों पर अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है।
मंत्री ने मिट्टी के बिगड़ते स्वास्थ्य पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे कृषि उत्पादकता में कमी आएगी। श्री गौड़ा ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और बनाए रखने में योगदान देने के लिए भाकृअनुप-संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों के साथ-साथ विभिन्न सरकारी विभागों से आग्रह किया।
श्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री ने इस आयोजन को ऐतिहासिक घटनाओं में से एक माना, जहाँ मंत्रालय के तीन महत्त्वपूर्ण विभागों ने संयुक्त रूप से किसानों को खेती के तरीकों में खादों के सही उपयोग के बारे में जागरूक करने का प्रयास शुरू किया है। मंत्री ने माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण और देश के किसानों को सशक्त बनाने के लिए उत्सुकता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि कृषि का देश के सकल घरेलू उत्पाद में महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसलिए कृषकों को सकल घरेलू उत्पाद में वर्तमान के 14% से बढ़कर 50% तक का योगदान देने के लिए समझदारी और पूरे दिल से सहयोग करना चाहिए। श्री तोमर ने किसानों से आग्रह किया कि आय में वृद्धि के लिए अपने पशुओं का स्वास्थ्य बनाए रखें। देश के विभिन्न किसानों को लगभग 8 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्डों के वितरण के बारे में बताते हुए मंत्री ने उनसे अपने खेतों में खादों का सही से उपयोग करने का आग्रह किया। इससे मृदा की उत्पादकता बढ़ाने और फसलों की अच्छी गुणवत्ता प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
श्री पुरुषोत्तम रूपाला, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री ने किसानों को खादों के सही उपयोग के बारे में जागरूक करने के लिए एक मंच प्रदान करने की पहल की सराहना की। मंत्री ने विभिन्न कृषि-केंद्रित वृत्तचित्रों और फिल्मों को स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में भी डब करने का आग्रह किया। इस पहल से किसानों को अधिक प्रभावी ढंग से मदद मिलेगी।


डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने इस पहल के मुख्य उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। डॉ. महापात्र ने कहा कि खादों के अनुचित उपयोग से मृदा के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे पैदा हुए हैं। इसलिए, कृषि भूमि में खादों के उचित उपयोग से मिट्टी की अच्छी गुणवत्ता प्राप्त करने में मदद मिलेगी। जिसके फलस्वरूप फसलों के उत्पादन में लगभग 50% की वृद्धि संभव हो पाएगी। महानिदेशक ने किसानों से भाकृअनुप द्वारा विकसित विभिन्न प्रौद्योगिकियों से लाभान्वित होने का भी आग्रह किया ताकि उन्हें अपनी आय को उचित तरीके से बढ़ाने में मदद मिल पाए।
श्री छबीलेंद्र राउल, सचिव, उर्वरक विभाग, भारत सरकार ने कहा कि पूरे देश में किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को उनकी कृषि भूमि में विभिन्न खादों के उपयोग के बारे में जागरूक करना है। यह न केवल मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि अच्छे और स्वस्थ गुणों वाले फसलों को भी पैदा करेगा। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे इस प्रकार के कार्यक्रमों से लाभान्वित हों जो भारत सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे हैं।
श्री संजय अग्रवाल, सचिव, कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य के बारे में जानकारी दी जो भारत सरकार की सबसे महत्त्वपूर्ण पहलों में से एक है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनकी कृषि भूमि में खादों के बेहतर उपयोग के बारे में ज्ञान प्रदान करना है। उन्होंने गाँव के प्रत्येक प्रखंड में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने के सरकार के उद्देश्य के बारे में बताया। इससे मिट्टी और फसल के स्वास्थ्य में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि यह किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।
इस कार्यक्रम में 1,000 से अधिक किसानों ने अपनी भागीदारी दर्ज की।
देश भर में कृषक समुदाय के लाभ के लिए डीडी किसान चैनल, भाकृअनुप के वेबसाइट और फेसबुक पेज जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्मों के माध्यम से इस कार्यक्रम का लाइव स्ट्रीम (सीधा प्रसारण) किया गया था।
इसके अलावा 700 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्रों ने प्रत्येक केवीके में प्रगतिशील किसानों के लिए एक साथ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय, नई दिल्ली)
