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पर्यावरण, मानव-वन्यजीव संघर्ष, महिला सुरक्षा और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर बनी रणनीति

देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने सिविल सोसायटी के मुद्दों को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने का संकेत दिया है। पार्टी की उत्तराखंड प्रभारी शैलजा कुमारी ने मंगलवार को सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर प्रदेश के प्रमुख सामाजिक, पर्यावरणीय और मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर सुझाव लिए।

बैठक में पर्यावरण संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष, महिला सुरक्षा एवं उत्पीड़न, सामाजिक न्याय तथा अल्पसंख्यकों और दलितों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठे। प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस से इन विषयों पर केवल चुनावी घोषणा तक सीमित न रहने, बल्कि सरकार बनने की स्थिति में स्पष्ट नीति और ठोस कार्रवाई की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल में डॉ. रवि चोपड़ा, कमला पंत, त्रिलोचन भट्ट, अजय जोशी, सादाब और प्रभात पाल शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रचनात्मक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भुवन पाठक ने किया। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी मौजूद रहे।

डॉ. रवि चोपड़ा ने कहा कि उत्तराखंड में कांग्रेस से भी अतीत में गलतियां हुई हैं, लेकिन उनके अनुसार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कई समस्याएं और गंभीर हुई हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कांग्रेस 2027 में सत्ता में आती है तो उसे राज्य के मूल सवालों पर दीर्घकालिक नीति बनानी चाहिए, ताकि सरकार के कामकाज का मूल्यांकन केवल अगले चुनाव तक सीमित न रहे।

कमला पंत ने अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए महिला सुरक्षा और न्याय के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाओं से जुड़े गंभीर मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस से ऐसी राजनीतिक रणनीति विकसित करने का सुझाव दिया, जिसमें जनता के व्यापक मुद्दे केंद्र में हों और चुनाव केवल कांग्रेस बनाम भाजपा के राजनीतिक मुकाबले तक सीमित न रहे।

त्रिलोचन भट्ट ने पुरोला, कारगी ग्रांट, सल्ट और लंबगांव सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक तनाव और भेदभाव के मामलों का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में मुसलमानों और दलितों के खिलाफ सिलसिलेवार गतिविधियां हो रही हैं और राजनीतिक दलों को इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

अजय जोशी ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में वन्यजीवों के हमलों से प्रभावित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कर्नाटक की तर्ज पर मानव-वन्यजीव संघर्ष में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के लिए बेहतर मुआवजा व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया।

सादाब ने एसआईआर के दौरान कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उनके पास इससे जुड़े कुछ साक्ष्य हैं और इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी की जा रही है।

रचनात्मक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भुवन पाठक ने कहा कि सिविल सोसायटी के पास उत्तराखंड से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन्हें कांग्रेस के घोषणा पत्र में जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रेम बहुखंडी से भी अलग से मुलाकात कर इन मुद्दों को विस्तार से रखने का प्रयास किया जाएगा।

लगभग 45 मिनट चली बैठक में शैलजा कुमारी ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की बात सुनी। उन्होंने कहा कि उठाए गए मुद्दों पर कांग्रेस गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर कांग्रेस संगठन सिविल सोसायटी के आंदोलनों और संघर्षों में भी भागीदारी करेगा।

सवाल अब घोषणा पत्र से आगे का

सिविल सोसायटी के साथ कांग्रेस की यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब उत्तराखंड में 2027 का विधानसभा चुनाव धीरे-धीरे राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन रहा है। हालांकि घोषणा पत्र में मुद्दों को शामिल करना पहला कदम है, असली कसौटी यह होगी कि पर्यावरण, महिला सुरक्षा, मानव-वन्यजीव संघर्ष और सामाजिक न्याय जैसे सवालों पर कांग्रेस सत्ता में आने की स्थिति में क्या समयबद्ध नीति और जवाबदेही का ढांचा प्रस्तुत करती है।


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By udaen

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