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सौंग नदी के उद्गम से गंगा संगम तक 80 किलोमीटर क्षेत्र में शुरू हुआ बायो इंडिकेटर प्रोजेक्ट; प्रस्तावित सौंग बांध, खनन और शहरीकरण के प्रभावों का होगा वैज्ञानिक आकलन

देहरादून। पूर्वी दून घाटी की प्रमुख जीवनरेखा मानी जाने वाली सौंग नदी और उसकी पारिस्थितिकी को समझने तथा संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA), उत्तराखंड के तहत सौंग नदी क्षेत्र में ‘बायो इंडिकेटर प्रोजेक्ट’ शुरू किया गया है। इसके माध्यम से नदी के पानी की गुणवत्ता, नदी किनारे के प्राकृतिक आवास और मानवीय गतिविधियों से पड़ने वाले प्रभावों का जैविक संकेतकों के जरिए वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा।

भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के पूर्व वरिष्ठ प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक ‘जी’ डॉ. वी.पी. उनियाल के मार्गदर्शन में यह अध्ययन पूरा किया जाएगा। परियोजना में पांच प्रमुख जीव समूहों को जैविक संकेतक के रूप में शामिल किया गया है। इनमें जलीय मैक्रोइनवर्टेब्रेट्स, मधुमक्खियां, ड्रैगनफ्लाई, डेम्सलफ्लाई (ओडोनाटा) और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां शामिल हैं।

36 स्थानों पर दो चरणों में होगा अध्ययन

परियोजना के तहत सौंग नदी के उद्गम कद्दूखाल (टिहरी) से लेकर गंगा नदी के संगम स्थल तेहरी फार्म (देहरादून) तक लगभग 80 किलोमीटर क्षेत्र का अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए नदी को ऊपरी, मध्य और निचले तीन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक क्षेत्र में 12 स्थायी सर्वेक्षण केंद्र बनाए गए हैं। इस तरह कुल 36 स्थानों पर अध्ययन होगा।

नवंबर से अप्रैल के बीच दो अलग-अलग मौसमी चरणों में फील्ड सर्वेक्षण किया जाएगा। इसमें मानसून के बाद और मानसून से पहले की परिस्थितियों का अध्ययन शामिल है। इससे अलग-अलग मौसमों में नदी की पारिस्थितिक स्थिति में होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलेगी।

सौंग बांध और शहरीकरण के प्रभावों का मिलेगा वैज्ञानिक आधार

छह महीने की इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण परिणाम सौंग नदी का व्यापक आधारभूत जैविक डेटाबेस (Baseline Database) तैयार होना होगा। इसके माध्यम से प्रस्तावित सौंग बांध, खनन गतिविधियों और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के नदी एवं उसके आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करने में मदद मिलेगी।

जैविक संकेतकों की खासियत यह है कि इनके माध्यम से पर्यावरण में होने वाले बदलावों का पता लगाया जा सकता है। अलग-अलग जीवों की मौजूदगी, विविधता और संख्या नदी तथा आसपास के प्राकृतिक आवास की स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती है।

अध्ययन से प्राप्त आंकड़े भविष्य में सौंग नदी के संरक्षण, जल गुणवत्ता में सुधार, जैव विविधता के संरक्षण और नदी प्रबंधन से जुड़ी नीतियां तैयार करने के लिए वैज्ञानिक आधार उपलब्ध करा सकते हैं।


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By udaen

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