नई दिल्ली। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में हाईकोर्ट के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए प्रस्तावित वन भूमि हस्तांतरण और डायवर्जन का मुद्दा उठाया।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से वन भूमि संबंधी प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री ने इस मामले में सकारात्मक रुख दिखाते हुए आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया।
नैनीताल में हाईकोर्ट के सामने ये हैं चुनौतियां
मुख्यमंत्री ने बैठक में बताया कि नैनीताल स्थित वर्तमान हाईकोर्ट परिसर चाइना पीक की तलहटी में होने के कारण भूस्खलन की आशंकाओं से प्रभावित रहता है। पर्यटन नगरी होने के कारण यहां सालभर पर्यटकों और वादकारियों की आवाजाही बनी रहती है। इससे यातायात, पार्किंग और न्यायालय तक पहुंचने में कठिनाइयां आती हैं।
सरकार का तर्क है कि हल्द्वानी का लामाचौड़ क्षेत्र सड़क और राष्ट्रीय राजमार्गों से बेहतर जुड़ा हुआ है। यहां आधुनिक न्यायिक परिसर बनने से न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और वादकारियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। भारत +1
वन भूमि की मंजूरी पर क्यों फंसा है मामला?
हाईकोर्ट को हल्द्वानी स्थानांतरित करने की योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती वन भूमि की मंजूरी है। प्रस्तावित परिसर के लिए लगभग 30 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि के उपयोग की अनुमति मांगी गई है।
27 अक्टूबर को सामने आई एक महत्वपूर्ण जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति (REC) ने 16 अक्टूबर की बैठक में इस प्रस्ताव को फिर से खारिज कर दिया था। समिति का कहना था कि राज्य सरकार ने गैर-वन भूमि के विकल्पों की पर्याप्त पड़ताल नहीं की है।
समिति ने यह भी सवाल उठाया कि जब उसी क्षेत्र में प्रतिपूरक वनीकरण के लिए गैर-वन भूमि उपलब्ध कराई जा सकती है तो हाईकोर्ट परिसर के लिए भी गैर-वन भूमि क्यों नहीं तलाश की गई। The Times of India
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में भी उठा है मामला
15 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के नए भवन के लिए चिह्नित भूमि राज्य सरकार को निर्धारित शर्तों के अनुसार सौंपने का निर्देश दिया था।
वहीं, 3 सितंबर 2026 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रस्तावित स्थानांतरण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट की सीट नैनीताल से बदलने के लिए आवश्यक अधिसूचना उचित चरण पर जारी की जा सकती है। हालांकि, वन भूमि के गैर-वन उपयोग के लिए केंद्र सरकार की आवश्यक अनुमति का पालन करना होगा। Indian Kanoon
अब आगे क्या?
मुख्यमंत्री धामी की केंद्रीय वन मंत्री से मुलाकात के बाद वन भूमि हस्तांतरण और डायवर्जन के प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। हालांकि, केंद्रीय मंत्री का सकारात्मक आश्वासन वन भूमि की औपचारिक मंजूरी नहीं है।
अब देखना होगा कि केंद्र सरकार की पर्यावरण संबंधी आपत्तियों का समाधान किस तरह किया जाता है और क्या राज्य सरकार लामाचौड़ में गैर-वन भूमि का कोई वैकल्पिक विकल्प तलाशती है।
फिलहाल इतना तय है कि हल्द्वानी में हाईकोर्ट का स्थायी परिसर बनाने की सरकारी पहल जारी है, लेकिन नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरण की अंतिम प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
भारत +2
संपादकीय दृष्टि से महत्वपूर्ण सवाल: क्या न्यायिक आधारभूत ढांचे के विस्तार के लिए वन भूमि का उपयोग ही एकमात्र विकल्प है? जब पर्यावरण मंत्रालय की समिति गैर-वन भूमि तलाशने की बात कह रही है, तब इस विकल्प पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए।
आधिकारिक स्रोत: उत्तराखंड सूचना एवं लोक संपर्क विभाग की विज्ञप्ति।
