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PIB Delhi

पंचायती राज मंत्रालय ने 30 जून, 2026 को राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों में ग्राम सभा में अल्प भागीदारी पर एक राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट जारी की है, जिसे राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एन.आई.आर.डी.पी.आर.) द्वारा तैयार किया गया है।

इस आकलन में कई कारणों की पहचान की गई है, जो ग्राम पंचायतों में लोगों की भागीदारी को अल्प और अनियमित बनाते हैं। इनमें आजीविका और व्यावसायिक बाध्यताएं , अल्प जागरूकता और अपर्याप्त सूचना तंत्र, शिकायतों पर हल्की प्रतिक्रिया, संबंधित विभागों के अधिकारियों की अनुपस्थिति, शासन प्रक्रियाओं में सीमित पारदर्शिता, बैठकों में उठाए गए मुद्दों पर अपर्याप्त अनुवर्ती कार्रवाई, आदि भी शामिल हैं। महिलाओं की भागीदारी के संदर्भ में, ये नतीजे यह भी दर्शाते हैं कि पारिवारिक जिम्मेदारियां, सामाजिक संकोच, चर्चा के दौरान पुरुषों का प्रभुत्व और प्रभावी भागीदारी के लिए सीमित अवसर जैसी रुकावटें, अभी भी बनी हुई हैं।

भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची के संदर्भ में “पंचायत’, ‘स्थानीय सरकार” होने के कारण राज्य का विषय है। पंचायतों को राज्यों के पंचायती राज अधिनियमों के अंतर्गत स्थापित और संचालित किया जाता है। भारत के संविधान के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, राज्यों ने अपने अलग-अलग पंचायती राज अधिनियम बनाए हैं। भारत के संविधान के अनुच्छेद 243(b) के अनुसार, ग्राम सभा में वे लोग शामिल होते हैं (जिनमें महिलाएं, युवा, अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियां और समाज के अन्य वंचित वर्ग भी शामिल हैं) जिनके नाम गांव की मतदाता सूची में पंजीकृत होते हैं। भारत के संविधान का अनुच्छेद 243A ग्राम सभा को शक्तियां और कार्य प्रदान करने के लिए राज्य विधानमंडलों को अधिकार देता है, जिससे ग्रामीण लोकतंत्र, स्थानीय विकास योजनाएं, सामाजिक निगरानी और पंचायतों की जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

पंचायती राज मंत्रालय द्वारा ग्राम सभा को अधिक सहभागी एवं जवाबदेह संस्था बनाने के उद्देश्य से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को विस्तृत परामर्शिकाएं जारी की गई हैं, जिनके माध्यम से ग्राम सभाओं की संस्था को सुदृढ़ एवं पुनर्जीवित करने के लिए विभिन्न उपाय अपनाने की सलाह दी गई है, जैसे कि ग्राम सभा बैठकों में सरकार की प्रमुख योजनाओं की मूलभूत जानकारी साझा करना, ग्राम सभाओं की आवृत्ति बढ़ाना, राज्य पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार न्यूनतम गणपूर्ति (कोरम) सुनिश्चित करना, ग्राम सभा के लिए नियमित स्थायी कार्यसूची तैयार करना, ग्राम सभा से पूर्व पृथक वार्ड सभा एवं महिला सभा आयोजित करना, ग्राम सभा में अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित करना, ग्राम सभा की स्थायी उप-समितियों का गठन एवं प्रभावी संचालन करना, आदि।

पंचायती राज मंत्रालय, वित्तीय वर्ष 2022-23 से संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) नामक, एक केंद्र प्रायोजित योजना का कार्यान्वयन कर रही है। इस योजना का उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों तथा अन्य हितधारकों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने हेतु प्रशिक्षण प्रदान करके पंचायती राज संस्थाओं को सुदृढ़ बनाना है, ताकि सभी राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों में ग्राम पंचायतें प्रभावी रूप से कार्य कर सकें। इस योजना के अंतर्गत निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों एवं अन्य हितधारकों, जिनमें महिलाएँ, युवा, अनुसूचित जातियाँ, अनुसूचित जनजातियाँ, तथा समाज के अन्य वंचित वर्ग भी शामिल हैं, के क्षमता निर्माण के लिए विभिन्न श्रेणियों में सहायता प्रदान की जाती है, जैसे कि बुनियादी मार्गदर्शन और पुनरावलोकन कार्यक्रम, विषयगत हस्तक्षेप, विशेष प्रशिक्षण, पंचायत विकास योजना से संबंधित कार्यक्रम, आदि।

इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने पंचायती राज संस्थओं की महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण के लिए “सशक्त पंचायत नेत्री अभियान” के अंतर्गत एक विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल शुरू किया है। इस प्रशिक्षण मॉड्यूल का उद्देश्य ग्रामीण शासन के विभिन्न पहलुओं में महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों का क्षमता निर्माण करना और निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के प्रभावी निर्वहन के लिए उनके ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को बढ़ाना है, जिससे महिला नेतृत्व वाले शासन को बढ़ावा मिल सके।

इस मंत्रालय ने आदर्श युवा ग्राम सभा, पहल भी प्रारंभ की है, जो विद्यालयों में जमीनी स्तर के लोकतंत्र का एक अनुभवात्मक अनुकरण है, जिसके अंतर्गत विद्यालयों में ग्राम सभा की वास्तविक कार्यप्रणाली के अनुरूप मॉक ग्राम सभा सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनमें विद्यार्थी कार्यसूची (एजेंडा) निर्धारण, विचार-विमर्श, बजट निर्माण तथा प्रस्ताव पारित करना,वास्तविक ग्राम सभा कार्यवाहियों को प्रतिबिंबित करना जैसी प्रक्रियाए भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष सामान्यतः 2 अक्टूबर से 31 जनवरी तक जन योजना अभियान संचालित किया जाता है, जिसके माध्यम से ग्राम पंचायतों को नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, विशेष रूप से ग्राम सभाओं के माध्यम से, व्यापक, समावेशी एवं आवश्यकता-आधारित विकास योजनाएँ तैयार करने में सहायता प्रदान की जाती है। यह अभियान सहभागी नियोजन, स्थिति विश्लेषण तथा ग्राम पंचायत विकास योजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए एक सुव्यवस्थित समय-सीमा उपलब्ध कराता है।

इसके अलावा, पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायती राज संस्थाओं में पारदर्शिता एवं नागरिक-केंद्रित सुशासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ई-पंचायत मिशन मोड (e-MMP) परियोजना के अंतर्गत विभिन्न डिजिटल एप्लिकेशन विकसित किए हैं। ई-ग्रामस्वराज पोर्टल सहभागी योजना प्रक्रिया के माध्यम से, ग्राम सभा को शामिल करते हुए, ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने और उनकी निगरानी करने में सहायता करता है। इसी प्रकार, ‘पंचायत निर्णय ’नामक डिजिटल एप्लिकेशन ग्राम सभा बैठकों के आरंभ से अंत तक डिजिटल प्रबंधन को सुगम बनाता है, जिसमें बैठकों का निर्धारण, कार्यसूची का पूर्व प्रसार, कार्यवाही एवं निर्णयों का अभिलेखन आदि भी शामिल है।

यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने 11 अगस्त 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।


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By udaen

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