देहरादून। राजधानी देहरादून में हरियाली बढ़ाने के लिए किए जा रहे नए पौधारोपण को लेकर अब पौधों के चयन और उनकी उपयुक्तता पर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के बाद यह चर्चा तेज हुई है कि शहर में लगाए जा रहे पौधों की प्रजातियों का चयन क्या देहरादून की स्थानीय जलवायु, मिट्टी, पानी की उपलब्धता और शहरी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देहरादून में ही देश का प्रतिष्ठित वन अनुसंधान संस्थान (FRI) स्थित है, जहां वन विज्ञान, वृक्ष प्रजातियों, सिल्वीकल्चर, जैव विविधता, शहरी वानिकी और वृक्ष संवर्धन पर लंबे समय से शोध होता रहा है।
FRI की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार संस्थान में शहरी वानिकी को लेकर प्रशिक्षण और शोध गतिविधियां होती रही हैं। जनवरी 2023 में FRI के सिल्वीकल्चर एवं वन प्रबंधन प्रभाग ने “Urban Forestry – Concept to Increase the Green Cover and Biodiversity” विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया था।
FRI खुद किन पौधों को लगा रहा है?
FRI में हुए हालिया पौधारोपण कार्यक्रम भी इस बहस को संदर्भ देते हैं। 24 जुलाई 2026 को FRI परिसर में वन महोत्सव के दौरान मौलश्री (Mimusops elengi) और आंवला (Phyllanthus emblica) के पौधे लगाए गए।
इससे पहले 2025 के FRI वन महोत्सव में सीता अशोक (Saraca asoca) और अर्जुन (Terminalia arjuna) के पौधे लगाए गए थे। उस अवसर पर FRI निदेशक ने पौधे लगाने के साथ उनकी दीर्घकालीन देखभाल और जीवित रहने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।
2023 के FRI वन महोत्सव में रुद्राक्ष, सीता अशोक, अर्जुन, बहेरा, आंवला और पुत्रंजीवा जैसी प्रजातियों का पौधारोपण किया गया था। संस्थान ने उस कार्यक्रम में देशज वृक्षों के रोपण के महत्व पर भी जोर दिया था।
सिर्फ पौधा लगाना पर्याप्त नहीं
शहरी क्षेत्र में पौधारोपण का उद्देश्य केवल पेड़ों की संख्या बढ़ाना नहीं होना चाहिए। सड़क किनारे, डिवाइडर, पार्क या सरकारी भूमि पर लगाए जाने वाले पौधों के लिए अलग-अलग परिस्थितियां होती हैं।
किसी प्रजाति के चयन में कम से कम इन सवालों पर विचार जरूरी है—
- क्या पौधा देहरादून की स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल है?
- उसकी पानी की आवश्यकता कितनी है?
- पेड़ बड़ा होने के बाद उसकी जड़ें सड़क, नाली या भवन को प्रभावित तो नहीं करेंगी?
- बिजली की लाइनों और यातायात की सुरक्षा पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
- क्या वह स्थानीय जैव विविधता के लिए उपयोगी है?
- क्या वह पक्षियों, परागण करने वाले जीवों और अन्य स्थानीय जीव-जंतुओं को लाभ पहुंचाता है?
- पौधारोपण के बाद उसकी सिंचाई, सुरक्षा और निगरानी कौन करेगा?
FRI के आगामी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी “choice of species under forestry extension programme” और urban forestry-green space development को अलग विषय के रूप में शामिल किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वैज्ञानिक वानिकी में पौधों का चयन अपने-आप में एक महत्वपूर्ण विषय है।
देहरादून को चाहिए ‘सही पौधा’, सिर्फ ज्यादा पौधे नहीं
शहर में हरियाली बढ़ाना जरूरी है, लेकिन पौधारोपण की सफलता का पैमाना केवल यह नहीं होना चाहिए कि कितने पौधे लगाए गए। असली सवाल यह है कि एक, तीन और पांच साल बाद उनमें से कितने पेड़ जीवित और स्वस्थ हैं।
इसलिए नगर निगम, वन विभाग अथवा संबंधित एजेंसी को हालिया पौधारोपण की प्रजातिवार सूची, पौधों की संख्या, चयन का आधार, पौधों का स्रोत और देखभाल की जिम्मेदारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
साथ ही, यदि पौधों का चयन किसी वैज्ञानिक संस्था या विशेषज्ञ की सलाह से हुआ है तो उस तकनीकी सलाह को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
देहरादून में सवाल पौधारोपण के विरोध का नहीं है। सवाल है—क्या राजधानी की हरियाली वैज्ञानिक, स्थानीय और दीर्घकालीन सोच के साथ तैयार की जा रही है?
क्योंकि शहर को केवल ज्यादा पौधे नहीं, सही जगह पर सही प्रजाति के स्वस्थ पेड़ चाहिए।
