अंडमान-निकोबार में दिव्यांग बच्चों की शीघ्र पहचान पर प्रशिक्षण, 100 आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने लिया हिस्सा
पोर्ट ब्लेयर, 20 जुलाई। National Institute for the Empowerment of Persons with Intellectual Disabilities (NIEPID) ने Composite Regional Centre (CRC) तथा Social Welfare Department, Government of Andaman and Nicobar Islands के सहयोग से 17 जुलाई 2026 को क्रॉस डिसएबिलिटी अर्ली इंटरवेंशन (Cross Disability Early Intervention) विषय पर एक दिवसीय ऑफलाइन संवेदनशीलता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा आईसीडीएस पर्यवेक्षकों को विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं की प्रारंभिक पहचान, समय पर हस्तक्षेप और उचित रेफरल प्रक्रिया के बारे में प्रशिक्षित करना था। कार्यक्रम में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के विभिन्न द्वीपों से आए 100 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया।
कार्यक्रम का उद्घाटन सामाजिक कल्याण विभाग के निदेशक Ravinder Kumar ने किया। इस अवसर पर Sumithamol, Dr. Ambady K. G. तथा अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण सत्र का संचालन Hrushikesh Deshpande ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को शिशुओं एवं छोटे बच्चों में बौद्धिक, श्रवण, दृष्टि, ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी तथा अन्य विकासात्मक दिव्यांगताओं के शुरुआती संकेतों की पहचान, परिवार को परामर्श देने तथा समय पर विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने की जानकारी दी।
कार्यक्रम का समन्वय Dr. Koona Lalitha ने किया।
संपादकीय दृष्टि
भारत में दिव्यांग बच्चों की समय पर पहचान और हस्तक्षेप अभी भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यही कार्यकर्ता समुदाय स्तर पर सबसे पहले बच्चों और परिवारों के संपर्क में आते हैं। यदि इस प्रकार के प्रशिक्षण देश के सभी राज्यों, विशेषकर उत्तराखंड जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में नियमित रूप से आयोजित किए जाएँ, तो दिव्यांग बच्चों के विकास, शिक्षा और पुनर्वास के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार संभव है। यह पहल समावेशी भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
