नई दिल्ली, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि Coronavirus और इससे निपटने के लिए चल रहे Lockdown से देश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक प्रभावित हुई है। घरेलू उद्योग जगत अर्थव्यवस्था के चक्के को तेज चलाने और लक्ष्य बढ़ाने को तैयार है लेकिन उसका मानना है कि केंद्र सरकार से बड़ी मदद व सहयोग के बिना यह संभव नहीं हो पाएगा। मदद भी तत्काल चाहिए। फिक्की (FICCI), सीआइआइ (CII) जैसे उद्योग संगठनों का कहना है कि आर्थिक मदद में जितनी देर होगी, बंद पड़े कल-कारखानों को पुन: शुरू करने की रणनीति बनाने में उतना ही विलंब होगा। उद्योग जगत खास तौर पर मार्च से मई, 2020 के दौरान अपने कर्मियों को वेतन देने में मदद मांग रहा है। ऐसी मदद कई देशों ने अपने उद्योगों को दी है। भावी पैकेज पर असमंजस उद्योग जगत की चिंता का कारण है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को कहा, छोटे व मझोले उद्यमों के लिए राहत पैकेज का प्रस्ताव पीएमओ भेजा गया है। उधर, वित्त मंत्रालय और नीति आयोग ने भी पैकेज का खाका तैयार किया है। फिक्की के सेक्रेटरी जनरल दिलीप चिनॉय के मुताबिक, ‘सवाल सिर्फ यह नहीं है कि हम लॉकडाउन से रोजाना 40 हजार करोड़ का नुकसान उठा रहे हैं बल्कि चार करोड़ लोगों के रोजगार को लेकर भी खतरा है। ऐसे में स्थिति जितनी जल्दी साफ हो वह बेहतर होगा।’
कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘किसी भी घोषणा या पैकेज का एलान करने के बाद उसे लागू करने या संबंधित पक्ष तक उसका फायदा पहुंचने में वक्त लगता है। अब जबकि हम तीन मई के बाद काम शुरू करने की बात कर रहे हैं, तो पैकेज को लेकर स्थिति साफ होनी चाहिए।’
उद्योग जगत की सबसे बड़ी मांग यह है कि जो सेक्टर बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं, उनसे जुड़ी कंपनियों के कर्मचारियों के तीन माह के वेतन-भत्ते की अदायगी के लिए सरकार आर्थिक मदद दे। सीआइआइ के चंद्रजीत बनर्जी का सुझाव है कि कम से कम छोटे और मझोले उद्योगों के लिए केंद्र को आर्थिक मदद देनी चाहिए। दूसरे देशों ने ऐसा किया है। नियम के मुताबिक, इन उद्योगों को कोई कारोबार नहीं करने के बावजूद वेतन-भत्ते का भुगतान करना पड़ रहा है। कारोबार की अनिश्चितता के मद्देनजर यह बहुत बड़ा बोझ है।’
कुछ कंपनियों ने सरकार को सुझाव दिया है कि जिन उद्योगों के राजस्व पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है, उन्हें कर्मियों के वेतन भुगतान के लिए ईपीएफओ के फंड से ब्याज रहित कर्ज दिलाया जाए। चूंकि इस निधि में काफी राशि है इसलिए सरकारी खजाने पर भी बोझ नहीं पड़ेगा। लाभ उठाने वाली कंपनियों से तीन माह बाद एक निश्चित दर से ब्याज लिया जाए।

