Month: November 2024

बच्चों में ऑनलाइन गेम की लत की समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम

सरकार ऑनलाइन गेमिंग से होने वाले खतरों और लत जैसे संभावित नुकसानों से अवगत है। भारत सरकार की नीतियों का उद्देश्य अपने उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और…

क्रिएट इन इंडिया चैलेंज के हिस्से के रूप में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सहयोग से एएसआईएफए इंडिया द्वारा ‘वेव्स अवार्ड्स ऑफ एक्सीलेंस’ का आयोजन किया जा रहा है

अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करें: एनीमेशन और फिल्म पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां 15 दिसंबर 2024 तक आमंत्रित; विजेताओं को संबंधित…

देश में गिग श्रमिक

जून 2022 में नीति आयोग की ओर से प्रकाशित “इंडियाज़ बूमिंग गिग एंड प्लेटफ़ॉर्म इकोनॉमी” शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में अनुमान के अनुसार, 2020-21 में देश में गिग श्रमिकों और प्लेटफॉर्म श्रमिकों की संख्या महिलाओं समेत 7.7 मिलियन थी। यह 2029-30 तक बढ़कर 23.5 मिलियन होने का अनुमान है। पहली बार, ‘गिग कर्मी’ और ‘प्लेटफॉर्म कर्मी’ की परिभाषा और उनसे संबंधित प्रावधान सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में प्रदान किए गए हैं, जिसे संसद द्वारा अधिनियमित किया गया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 जीवन और विकलांगता कवर, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा आदि से संबंधित मामलों पर गिग श्रमिकों और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा उपाय तैयार करने का प्रावधान करती है। यह जानकारी केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने आज राज्यसभा में दी।

55वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की समापन फिल्म ‘ड्राई सीजन’ मानवता, स्थिरता और पीढ़ीगत बंधनों की कहानी है

“प्रकृति को नष्ट करना जीवन को नष्ट करना है- ‘ड्राई सीजन’ पर्यावरण और एक-दूसरे के साथ फिर से जुड़ने का…

“कला फिल्में कठिन और जटिल हैं”: क्यूहवान जियोन, ‘लॉस्ट हॉर्स’ के निर्देशक

रोड्रिगो क्विंटेरो अराउज़ की फिल्म ‘दे कॉल मी पैंजर’ , पनामा के फुटबॉल दिग्गज रोमेल फर्नांडीज गुतिरेज के जीवन से…

सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को वित्तीय सहायता

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय देश में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के उन्नयन के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान…

संसद प्रश्न: – वैश्विक प्रकृति संरक्षण सूचकांक

संसद प्रश्न: – वैश्विक प्रकृति संरक्षण सूचकांक हाल ही में, गोल्डमैन सोनेनफेल्ड स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी एंड क्लाइमेट चेंज, इज़राइल की बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी…

संसद प्रश्न:- वन संरक्षण

संसद प्रश्न:- वन संरक्षण पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफएंडसीसी) देश में वन और वृक्ष आवरण के विस्तार के साथ-साथ मैंग्रोव तथा आर्द्रभूमि के संरक्षण के लिए कई पहल कर रहा है। योजनाओं का विवरण निम्नानुसार है: हरित भारत के लिए राष्ट्रीय मिशन (जीआईएम) का उद्देश्य इस योजना में भाग लेने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (जेएफएमसी) के माध्यम से भारत के वन क्षेत्र की रक्षा, पुनर्स्थापन तथा वृद्धि करना है। इस योजना के अंतर्गत, वृक्षारोपण/पर्यावरण पुनरुद्धार के लिए 17 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश को 944.48…

संसद प्रश्न: – सार्थक जलवायु कार्रवाई के लिए रणनीति

सरकार जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) को लागू कर रही है जो जलवायु कार्रवाई के लिए व्यापक रूपरेखा है। एनएपीसीसी के मार्गदर्शक सिद्धांतों में से एक समावेशी और सतत विकास रणनीति के माध्यम से समाज के गरीब और कमजोर वर्गों की रक्षा करना है जो जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील है। एनएपीसीसी में सौर ऊर्जा, बढ़ी हुई ऊर्जा दक्षता, जल, कृषि, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, संधारणीय आवास, हरित भारत, मानव स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन पर रणनीतिक ज्ञान के विशिष्ट क्षेत्रों में राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं। इसके नौ मिशनों में से छह कमजोर समुदायों के जलवायु लचीलेपन को बढ़ाने के लिए अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इन सभी मिशनों को जल, स्वास्थ्य, कृषि, वन और जैव विविधता, ऊर्जा, आवास आदि सहित कई क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से उनके संबंधित नोडल मंत्रालयों/विभागों द्वारा संस्थागत और कार्यान्वित किया जाता है। 34 राज्यों ने भी एनएपीसीसी के अनुरूप जलवायु परिवर्तन पर अपनी कार्य योजनाएँ तैयार की हैं। पेरिस समझौते के तहत, भारत ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) को अपना अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) प्रस्तुत किया है, जिसमें 2030 तक अतिरिक्त वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 2.5 से 3 बिलियन टन सीओ2 समतुल्य अतिरिक्त कार्बन सिंक के निर्माण का मात्रात्मक लक्ष्य शामिल है। अतिरिक्त वन और वृक्ष आवरण के निर्माण के उद्देश्य से विभिन्न वनरोपण और वन बहाली गतिविधियों का कार्यान्वयन स्थानीय समुदायों को शामिल करके और ग्राम स्तर पर स्थापित संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की भागीदारी के माध्यम से किया जाता है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (एनडीसी) प्रतिबद्धताओं की पूर्ति विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा राज्य सरकारों सहित विभिन्न हितधारकों को शामिल करके सहयोगात्मक रूप से की जाती है। हरित भारत के लिए राष्ट्रीय मिशन (जीआईएम) एनएपीसीसी के तहत उल्लिखित मिशनों में से एक है। इसका उद्देश्य भारत के वन क्षेत्र की रक्षा, पुनर्बहाली और वृद्धि करना तथा चयनित परिदृश्यों में वन और गैर-वन क्षेत्रों में वृक्षारोपण गतिविधियों को अंजाम देकर जलवायु परिवर्तन का जवाब देना है। मैंग्रोव को अद्वितीय प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में पुनर्स्थापित करने और बढ़ावा देने तथा तटीय आवासों की स्थिरता को संरक्षित करने और बढ़ाने के लिए तटीय आवासों और भौतिक आय (एमआईएसएचटी) के लिए मैंग्रोव पहल शुरू की गई है। इस कार्यक्रम में नौ तटीय राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र इसका लाभ पहुंचाने की परिकल्पना की गई है जिससे कार्बन पृथक्करण और जलवायु लचीलापन को बढ़ावा मिलेगा। भारत के माननीय प्रधानमंत्री ने 5 जून 2024 को विश्व पर्यावरण दिवस पर नागरिकों द्वारा  गृह-हितैषी गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ #Plant4Mother अभियान की शुरुआत की। अब तक 100 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। 2023 में यूएनएफसीसीसी को प्रस्तुत भारत के तीसरे राष्ट्रीय संचार के अनुसार, 2005 से 2019 के दौरान 1.97 बिलियन टन CO2 समतुल्य अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाया गया है। यह जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।