बच्चों में ऑनलाइन गेम की लत की समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम
सरकार ऑनलाइन गेमिंग से होने वाले खतरों और लत जैसे संभावित नुकसानों से अवगत है। भारत सरकार की नीतियों का उद्देश्य अपने उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और…
EarthNity with social development and rural enterpreneurship
सरकार ऑनलाइन गेमिंग से होने वाले खतरों और लत जैसे संभावित नुकसानों से अवगत है। भारत सरकार की नीतियों का उद्देश्य अपने उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और…
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय यू-विन पोर्टल पर 7.43 करोड़ लाभार्थियों का पंजीकरण किया गया, 1.26 करोड़ टीकाकरण सत्र आयोजित…
अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करें: एनीमेशन और फिल्म पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां 15 दिसंबर 2024 तक आमंत्रित; विजेताओं को संबंधित…
विधि एवं न्याय मंत्रालय विधि विभाग भारत के गणतंत्र के रूप में 75वें वर्ष और भारत के संविधान को अंगीकार…
ग्रामीण विकास मंत्रालय जीवन में एक सकारात्मक बदलाव का हमेशा ही स्वागत किया जाता है, विशेष रूप से जब वह…
अनिश्चितता से सुरक्षा तक कैसे बदला पीएमएवाई-जी ने नोंडो का जीवन! मिजोरम के छोटे से गाँव ‘रोटलांग डब्लू’ में, नोंडो के…
सौभाग्य योजना के तहत घरों का विद्युतीकरण केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल ने लोकसभा में आज एक प्रश्न के…
जून 2022 में नीति आयोग की ओर से प्रकाशित “इंडियाज़ बूमिंग गिग एंड प्लेटफ़ॉर्म इकोनॉमी” शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में अनुमान के अनुसार, 2020-21 में देश में गिग श्रमिकों और प्लेटफॉर्म श्रमिकों की संख्या महिलाओं समेत 7.7 मिलियन थी। यह 2029-30 तक बढ़कर 23.5 मिलियन होने का अनुमान है। पहली बार, ‘गिग कर्मी’ और ‘प्लेटफॉर्म कर्मी’ की परिभाषा और उनसे संबंधित प्रावधान सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में प्रदान किए गए हैं, जिसे संसद द्वारा अधिनियमित किया गया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 जीवन और विकलांगता कवर, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा आदि से संबंधित मामलों पर गिग श्रमिकों और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा उपाय तैयार करने का प्रावधान करती है। यह जानकारी केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने आज राज्यसभा में दी।
“प्रकृति को नष्ट करना जीवन को नष्ट करना है- ‘ड्राई सीजन’ पर्यावरण और एक-दूसरे के साथ फिर से जुड़ने का…
रोड्रिगो क्विंटेरो अराउज़ की फिल्म ‘दे कॉल मी पैंजर’ , पनामा के फुटबॉल दिग्गज रोमेल फर्नांडीज गुतिरेज के जीवन से…
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय देश में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के उन्नयन के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान…
संसद प्रश्न: – वैश्विक प्रकृति संरक्षण सूचकांक हाल ही में, गोल्डमैन सोनेनफेल्ड स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी एंड क्लाइमेट चेंज, इज़राइल की बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी…
संसद प्रश्न:- वन संरक्षण पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफएंडसीसी) देश में वन और वृक्ष आवरण के विस्तार के साथ-साथ मैंग्रोव तथा आर्द्रभूमि के संरक्षण के लिए कई पहल कर रहा है। योजनाओं का विवरण निम्नानुसार है: हरित भारत के लिए राष्ट्रीय मिशन (जीआईएम) का उद्देश्य इस योजना में भाग लेने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (जेएफएमसी) के माध्यम से भारत के वन क्षेत्र की रक्षा, पुनर्स्थापन तथा वृद्धि करना है। इस योजना के अंतर्गत, वृक्षारोपण/पर्यावरण पुनरुद्धार के लिए 17 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश को 944.48…
संसद प्रश्न:- प्रकृति बहाली कानून का परिचय 2022 में, भारत सरकार ने जैविक विविधता सम्मेलन में दिए गए कुनमिंग मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव…
सरकार जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) को लागू कर रही है जो जलवायु कार्रवाई के लिए व्यापक रूपरेखा है। एनएपीसीसी के मार्गदर्शक सिद्धांतों में से एक समावेशी और सतत विकास रणनीति के माध्यम से समाज के गरीब और कमजोर वर्गों की रक्षा करना है जो जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील है। एनएपीसीसी में सौर ऊर्जा, बढ़ी हुई ऊर्जा दक्षता, जल, कृषि, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, संधारणीय आवास, हरित भारत, मानव स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन पर रणनीतिक ज्ञान के विशिष्ट क्षेत्रों में राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं। इसके नौ मिशनों में से छह कमजोर समुदायों के जलवायु लचीलेपन को बढ़ाने के लिए अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इन सभी मिशनों को जल, स्वास्थ्य, कृषि, वन और जैव विविधता, ऊर्जा, आवास आदि सहित कई क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से उनके संबंधित नोडल मंत्रालयों/विभागों द्वारा संस्थागत और कार्यान्वित किया जाता है। 34 राज्यों ने भी एनएपीसीसी के अनुरूप जलवायु परिवर्तन पर अपनी कार्य योजनाएँ तैयार की हैं। पेरिस समझौते के तहत, भारत ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) को अपना अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) प्रस्तुत किया है, जिसमें 2030 तक अतिरिक्त वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 2.5 से 3 बिलियन टन सीओ2 समतुल्य अतिरिक्त कार्बन सिंक के निर्माण का मात्रात्मक लक्ष्य शामिल है। अतिरिक्त वन और वृक्ष आवरण के निर्माण के उद्देश्य से विभिन्न वनरोपण और वन बहाली गतिविधियों का कार्यान्वयन स्थानीय समुदायों को शामिल करके और ग्राम स्तर पर स्थापित संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की भागीदारी के माध्यम से किया जाता है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (एनडीसी) प्रतिबद्धताओं की पूर्ति विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा राज्य सरकारों सहित विभिन्न हितधारकों को शामिल करके सहयोगात्मक रूप से की जाती है। हरित भारत के लिए राष्ट्रीय मिशन (जीआईएम) एनएपीसीसी के तहत उल्लिखित मिशनों में से एक है। इसका उद्देश्य भारत के वन क्षेत्र की रक्षा, पुनर्बहाली और वृद्धि करना तथा चयनित परिदृश्यों में वन और गैर-वन क्षेत्रों में वृक्षारोपण गतिविधियों को अंजाम देकर जलवायु परिवर्तन का जवाब देना है। मैंग्रोव को अद्वितीय प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में पुनर्स्थापित करने और बढ़ावा देने तथा तटीय आवासों की स्थिरता को संरक्षित करने और बढ़ाने के लिए तटीय आवासों और भौतिक आय (एमआईएसएचटी) के लिए मैंग्रोव पहल शुरू की गई है। इस कार्यक्रम में नौ तटीय राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र इसका लाभ पहुंचाने की परिकल्पना की गई है जिससे कार्बन पृथक्करण और जलवायु लचीलापन को बढ़ावा मिलेगा। भारत के माननीय प्रधानमंत्री ने 5 जून 2024 को विश्व पर्यावरण दिवस पर नागरिकों द्वारा गृह-हितैषी गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ #Plant4Mother अभियान की शुरुआत की। अब तक 100 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। 2023 में यूएनएफसीसीसी को प्रस्तुत भारत के तीसरे राष्ट्रीय संचार के अनुसार, 2005 से 2019 के दौरान 1.97 बिलियन टन CO2 समतुल्य अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाया गया है। यह जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।