कुमाऊं विश्वविद्यालय को मिला नया कुलपति, प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट की नियुक्ति
उत्तराखंड के राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, सेवानिवृत्त ने प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट को कुमाऊं विश्वविद्यालय का कुलपति…
EarthNity with social development and rural enterpreneurship
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“भारत के विकेंद्रित अनाज भंडारण का सुदृढ़ीकरण” PIB Delhi भारत के बढ़ते कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा प्रयासों ने देश…
भारत के नौ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) लगभग 60 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं, जिससे…
मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और उत्कृष्टता केंद्र का हुआ उद्घाटन उन्नत अवसंरचना एनआईएच कोलकाता की नैदानिक देखभाल, अनुसंधान और शैक्षणिक क्षमताओं…
त्रिपुरा से सुगंधित काली खासा, सुगंधित हरिनारायण, बिरोन और मैमी हांगा चावल को यूरोपीय बाजारों में निर्यात के लिए संग्रहित…
इन पुरस्कारों का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में सतत हरित प्रथाओं को अपनाने में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है प्रविष्टि…
— संपादकीय भारत के पहाड़ों और जंगलों का इतिहास केवल प्राकृतिक सुंदरता का इतिहास नहीं है। यह उन समुदायों के…
PIB Delhi 1. भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने आज गोवा में बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ)…
प्रकृति संरक्षण की नींव सामंजस्यपूर्ण संरक्षण और मानव-प्रकृति सहअस्तित्व पर आधारित होनी चाहिए: श्री भूपेंद्र यादव आईबीसीए और एडीबी ने…
892 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया गया; 2023-24 से 2025-26 के दौरान 1.19 लाख लाभार्थियों को शामिल किया गया…
PIB Delhi सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले सफाई कर्मचारियों के लिए सीमित शिक्षा, अनियमित आय और…
PIB Delhi आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले स्कॉलर्स के लिए, विश्वसनीय वित्तीय सहायता के बिना उच्च शिक्षा और…
PIB Delhi नशीले पदार्थों के सेवन और मानसिक तनाव से प्रभावित युवाओं के लिए, समय पर उपचार, काउंसलिंग (परामर्श) और पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन)…
हर जिले का भारत के निर्यात केंद्र के तौर पर रूपांतरण प्रविष्टि PIB Delhi भारत के निर्यात में खास तेजी दर्ज की गई है, लेकिन इस गति को बरकरार रखने के लिए विकास के प्रति अधिक समावेशी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। जिला निर्यात केंद्र (डीईएच) पहल समावेशी निर्यात में तेजी को साकार करने का एक फ्रेमवर्क है, जो वैश्विक क्षमता वाले उत्पादों और सेवाओं की पहचान करके और स्थानीय उत्पादकों को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर प्रत्येक जिले को निर्यात नियोजन केंद्र में परिवर्तित करता है। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के विचार पर आधारित, डीईएच एक सम्मिलन–आधारित दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें केंद्र और राज्य की योजनाओं, संस्थानों व उद्योगों को एक साथ लाया जाता है। जिला स्तर की शक्तियों का इस्तेमाल कर और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर, डीईएच रोजगार निर्माण को प्रोत्साहन दे रहा है, लघु एवं मध्यम उद्यमों को मजबूत कर रहा है और भारत की निर्यात में बढ़ोतरी को अधिक समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रहा है। भारत को जिला–आधारित निर्यात मॉडल की आवश्यकता क्यों हुई? निर्यात भारत की विकास की रफ्तार का एक प्रमुख आधार बन गया है। विदेशी बाजारों से आने वाले प्रत्येक रुपया देश में रोजगार, आय और उद्योग को प्रोत्साहन देता है। भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 2024-25 में 825.25 बिलियन अमेरिकी डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो 2025-26 में बढ़कर अनुमानित 863.11 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो जाएगा। दशकों तक, निर्यात गतिविधियां कुछ स्थापित औद्योगिक समूहों और बंदरगाह शहरों तक ही सीमित रहीं। छोटे शहर, ग्रामीण जिले और दूरदराज के क्षेत्र, यहां तक कि अनूठे और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के बाद भी, निर्यात सूची में शायद ही कभी शामिल होते थे। बस्तर के लोहे के शिल्प, जलगांव के केले और मेघालय के संतरे जैसे उत्पाद इस अनछुई क्षमता को प्रतिबिंबित करते हैं। इस अवसर को समझते हुए, सरकार ने जिलों को निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल के तौर पर एक जिला–नेतृत्व वाली निर्यात रणनीति शुरू की, जिससे प्रत्येक जिले को अपनी अनूठी शक्तियों का लाभ उठाकर भारत के निर्यात विकास में योगदान करने योग्य बनाया जा सके। ओडीओपी से डीईएच तक: फ्रेमवर्क का विकास जिला निर्यात केंद्र (डीईएच) पहल प्रत्येक जिले की विशेषताओं और संसाधनों का इस्तेमाल कर उसकी निर्यात क्षमता को उजागर करने के लिए शुरू की गई है। प्रत्येक जिले को केवल उत्पादन इकाई के तौर पर नहीं, बल्कि निर्यात नियोजन की इकाई की तरह देखा जाता है। यह स्थानीय उद्यमों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचने, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और जिला-आधारित आर्थिक विकास को गति देने में मदद कर रहा है। यह भारत के आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप भी है।…
उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में लागू नई व्यवस्था के तहत प्रशासन ने बिना आवश्यक मान्यता और दस्तावेजों के संचालित…