उत्तराखंड में अब लगेगा ‘नामांतरण दिवस’, राजस्व न्यायालयों को समयबद्ध निस्तारण के निर्देश
देहरादून। प्रदेश में भूमि के नामांतरण (दाखिल-खारिज/म्यूटेशन) से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण और राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सुधार को लेकर राजस्व परिषद ने समीक्षा बैठक की। आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद श्रीमती रंजना राजगुरु ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नामांतरण मामलों का निस्तारण नियमानुसार गुण-दोष के आधार पर निर्धारित समय-सीमा में किया जाए।

बैठक में प्रदेश के सभी जनपदों में असिस्टेंट कलेक्टर प्रथम श्रेणी/तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा किए जा रहे राजस्व न्यायिक कार्यों की समीक्षा की गई।
अनावश्यक देरी पर रोक के निर्देश
रंजना राजगुरु ने कहा कि नामांतरण मामलों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। लोगों को समय पर न्याय उपलब्ध कराना राजस्व न्यायालयों की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सभी पीठासीन अधिकारियों को न्यायालयों का संचालन नियमानुसार और समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने राजस्व न्यायालयों से संबंधित अभिलेखों और आवश्यक पंजीकाओं को नियमित रूप से अद्यतन रखने को कहा, ताकि प्रत्येक मामले की स्थिति स्पष्ट रहे और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में देरी न हो।
रिकॉर्ड रूम में समय से जमा हों पत्रावली
निस्तारित मामलों की पत्रावलियों को नियमानुसार समय से रिकॉर्ड रूम में जमा कराने के भी निर्देश दिए गए। इससे अपील की स्थिति में मूल पत्रावली संबंधित अपीलीय न्यायालय को समय पर उपलब्ध कराई जा सकेगी।
बैठक में न्यायालयों द्वारा जारी किए जाने वाले समनों की समयबद्ध तामील पर भी जोर दिया गया। विशेष रूप से हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में नामांतरण मामलों से संबंधित समनों की तामील समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
अगले माह से ‘नामांतरण दिवस’
राजस्व परिषद प्रदेश में भूमि नामांतरण से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए अगले माह से ‘नामांतरण दिवस’ आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए सभी तहसीलों के पीठासीन अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां अभी से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में राजस्व परिषद के संयुक्त संचालक (चकबंदी) नरेश चन्द्र दुर्गापाल, उप राजस्व आयुक्त श्रीमती मीनाक्षी पटवाल, जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) नितिन वशिष्ठ सहित प्रदेश के सभी अपर जिलाधिकारियों ने प्रतिभाग किया।
