उत्तराखंड उप खनिज (बालू, बजरी, बोल्डर) नीति 2016 में ये संशोधन किया गया है। नीति के अनुसार अभी तक नदी में बालू, बजरी व बोल्डर निकालने के लिए सतह से अधिक डेढ़ मीटर की गहराई या पानी के स्तर तक चुगान करने की छूट है। संशोधन के बाद अब खनन पट्टा धारक तीन मीटर गहराई तक खनन या चुगान कर सकेंगे।
गहराई करने की सीमा अंडर ग्राउंड वाटर टेबल तक ही होगी। दोगुना गहराई तक खनिज निकालने की छूट से खनन पट्टा धारक का फायदा दोगुना हो जाएगा। नीति में यह प्रावधान भी किया गया है कि खनन पट्टे के तहत किसी एरिया की लंबाई उसकी चौड़ाई के चार गुना से अधिक नहीं होनी चाहिए।
अवैध भंडारण के मामलों की सुनवाई का अधिकार एडीएम को
खनन सामग्री के अवैध भंडारण के मामलों की सुनवाई का अधिकार भी एडीएम को होगा। प्रदेश मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड उप खनिज नियमावली में इस संशोधन को मंजूरी दी है। अभी तक सुनवाई का अधिकार जिलाधिकारी के पास है। डीएम की अत्यधिक व्यस्तता के चलते सुनवाई के मामले लंबित हो रहे हैं। इसे देखते हुए एडीएम को सुनवाई का अधिकार देने का फैसला हुआ। अवैध भंडारण के मामलों में कार्रवाई करने का अधिकार एडीएम के पास पहले से है।
दूरी की शर्त में ढील देने की तैयारी
खनन पट्टा धारकों को सरकार दूरी की शर्त में ढील देकर राहत दे सकती है। इस पर विचार करने के लिए प्रदेश मंत्रिमंडल ने एक उपसमिति बनाने का फैसला किया है। प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड उप खनिज नीति में पिछले दिनों यह शर्त शामिल की थी कि स्क्रीनिंग प्लांट हाट मीक्सिंग प्लांट व स्टोन क्रेशर नदी से कम से कम तीन किमी की दूरी पर होना चाहिए। इस शर्त से उन खनन कारोबारियों की पेशानी पर बल पड़ गए, जिनके प्लांट नदी से कम दूरी पर हैं। अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास (खनन) ओम प्रकाश के मुताबिक, मुख्यमंत्री, मंत्रियों व विभाग को प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए थे। इनमें उन्होंने दूरी की शर्त को कम करने का अनुरोध किया है।
