उच्च हिमालय क्षेत्र की झीलों के अध्ययन के लिए राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नई टिहरी और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइड फंड) फॉर नेचर इंडिया के बीच एमओयू साइन हुआ है। यह एमओयू शोध कार्यों की दृष्टि से मील का पत्थर साबित हो सकता है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ पीजी कालेज को वित्तीय सहायता देगा।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ फार नेचर इंडिया के डा. सुरेश बाबू, डा. अमित दुबे की देखरेख में पीजी कालेज के प्राचार्य डा. अशोक कुमार, जंतु विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. विजय प्रकाश सेमवाल, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से डा. शैजल बोहरा, योगिता सिंह ने कालेज परिसर में एमओयू पर हस्ताक्षर किए। असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सेमवाल को शोध निर्देशक के रूप में नियुक्त किया गया। प्राचार्य डा. अशोक कुमार ने कहा कि शोध कार्यों के लिए यह समझौता मील का पत्थर साबित होगा। डा. सेमवाल, डा. बोहरा ने बताया कि समझौते का उद्देश्य उच्च हिमालय क्षेत्रों, ग्लेशियरों में पाई जाने वाली झीलों और तालों का पारिस्थितिकीय, जलवायु परिवर्तन से पड़ने वाले प्रभावों, जैव विविधता संरक्षण, जल शुद्धीकरण का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। शोध के लिए एक रिसर्च टीम का गठन किया है। इस मौके पर डा. श्रीकृष्ण नौटियाल, बृजेश चौहान, डा. डीपीएस भंडारी, डा. संजीव नेगी, डा. डीएस तोपवाल, डा. शालिनी रावत, डा. पदमा वशिष्ठ, डा. आरती खंडूरी, चंद्रेश तिवारी, जगवीर नेगी, जितेंद्र डोभाल मौजूद रहे।
