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एसबीएम(जी)- चरण II के तहत घरेलू शौचालयों का निर्माण

PIB Delhi

स्वच्छता राज्य का विषय है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) [एसबीएम(जी)]-चरण-II एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) द्वारा अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में लागू किया जाता है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा एसबीएम(जी) एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईएमआईएस) पर दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले 5 वर्षों के दौरान एसबीएम(जी) चरण-II के तहत राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार निर्मित व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों (आईएचएचएल) की संख्या अनुबंध-I में दी गई है।

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, भारत सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र स्वच्छता में सुधार के उनके प्रयासों को पूरा करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी स्वीकृत वार्षिक कार्य योजना, पिछले प्रदर्शन और बजट की उपलब्धता के आधार पर धनराशि आवंटित की जाती है। एसबीएम(जी) चरण-II के तहत, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को घटक-वार या परियोजना-वार धनराशि जारी नहीं की जाती है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी एआईपी के अनुसार, अपने गांवों के लिए मांग, स्थानीय प्राथमिकताओं आदि के आधार पर इस कार्यक्रम के तहत आईएचएचएल (व्यक्तिगत घरेलू शौचालय), सीएससी (सामुदायिक स्वच्छता केंद्र) और सॉलिड और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट सुविधाओं का प्रावधान करने की योजना बना सकते हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान एसबीएम(जी)-चरण-II के तहत आवंटित, जारी और उपयोग की गई केंद्रीय हिस्सेदारी की धनराशि का राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार विवरण अनुबंध-III (ए) से III (ई) में दिया गया है।

एसबीएम(जी)-चरण II दिशानिर्देशों के अनुसार, पात्र ग्रामीण परिवारों को स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए हाथ धोने और सफाई हेतु जल भंडारण सुविधा सहित व्यक्तिगत घरेलू शौचालय (आईएचएचएल) की एक इकाई के निर्माण के लिए 12,000/- रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाता है। कार्यक्रम के दिशानिर्देशों के अनुसार, एसबीएम(जी) के तहत प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए पात्र परिवारों का चयन करते समय, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा निम्नलिखित प्राथमिकता क्रम सुनिश्चित किया जाना है:

I. गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) वाले परिवार;

II. गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) वाले परिवार:

(i) अनुसूचित जाति (एससी) / अनुसूचित जनजाति (एसटी)

(ii) दिव्यांगजन (दिव्यांगों के अनुकूल शौचालय का निर्माण सुनिश्चित किया जाए)

(iii) आवास स्थल वाले भूमिहीन मजदूर

(iv) छोटे किसान

(v) सीमांत किसान

(vi) महिला-प्रमुख परिवार

उपरोक्त प्राथमिकता क्रम को सुनिश्चित करते हुए, निम्नलिखित स्थितियों वाले परिवारों को (ऊपर उल्लिखित प्रत्येक श्रेणी के अंतर्गत) प्राथमिकता दी जा सकती है:

  • वृद्ध वृद्धावस्था पेंशनभोगी / विधवा पेंशनभोगी / दिव्यांगता पेंशनभोगी (राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम {एनएसएपी} के लाभार्थी) / ट्रांसजेंडर;
  • राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत जननी सुरक्षा योजना सहित केंद्र और राज्य सरकारों के मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों द्वारा कवर की गई गर्भवती और धात्री महिलाएं; तथा,
  • बालिका को लाभ पहुंचाने वाली किसी भी योजना के तहत कवर की गई बालिकाएं।

ऐसे परिवारों की पहचान ग्राम सभा की बैठक में ग्राम पंचायत द्वारा शुरू की जानी चाहिए तथा ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा अनुमोदित की जानी चाहिए।

एसबीएम(जी)-चरण II दिशानिर्देशों के अनुसार, आदर्श रूप से आईएचएचएल निर्माण कार्य व्यक्तिगत लाभार्थियों द्वारा स्वयं गांव की एजेंसियों के समर्थन से या उनके माध्यम से किया जाना चाहिए। प्रोत्साहन राशि का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा। आईएचएचएल के निर्माण की प्रगति की निगरानी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा एसबीएम(जी) आईएमआईएस पर रिपोर्ट किए गए डेटा के माध्यम से की जाती है।

अनुलग्नक देखने के लिए क्लिक करें।

यह जानकारी जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना द्वारा कल राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी गई।


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By udaen

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