उपचार संबंधी प्रत्येक कार्य में दक्षता जरूरी : डॉ. पॉल

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान स्वयं में एक विश्वविद्यालय की भांति स्वतंत्र इकाई के तौर पर कार्य करता है। इसका मुख्य उद्देश्य मेडिकल एजूूकेशन में दक्षता प्रदान करना है। ऐसे में हमें प्रत्येक कार्य में विशेषतौर पर दक्षता की जरूरत है। स्वायत्तशासी संस्था होने के नाते संस्थान अपने नियम कायदे स्वयं बनाने के लिए सक्षम है। उन्होंने ऋषिकेश एम्स में मेडिकल एजूकेशन व रिसर्च के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने फैकल्टी मेंबर्स से मेडिकल साइंस को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान के क्षेत्र में विशेष कार्य करने को कहा।
चिकित्सा को धर्म समझते हुए करें उपचार : डॉ. शर्मा
डॉ. एससी शर्मा ने कहा कि संस्थान के सभी स्टाफ को अनुशासन के साथ कार्य करना चाहिए। चिकित्सक को निर्धारित में मरीजों का परीक्षण कर संपूर्ण उपचार पर फोकस करना चाहिए। खासतौर से रात के समय आने वाले मरीजों को पूरी चिकित्सा सेवा दी जानी चाहिए। चिकित्सक को इसे अपना धर्म समझते हुए उपचार में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए।
कैंसर मरीजों की देखभाल के लिए दी जा रही पैलेटिव केयर ट्रेनिंग
एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि संस्थान द्वारा मनोरोग चिकित्सा क्षेत्र में राज्य सरकार के चिकित्सकों व पैरामेडिकल क्षेत्र के चिकित्सकों को कार्यशाला व टेलीमेडिसिन के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है। संस्थान के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग के माध्यम से संपूर्ण राज्य को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराएगा। संस्थान द्वारा कैंसर की अंतिम अवस्था के मरीजों की संपूर्ण देखभाल के लिए चिकित्सकों को पैलेटिव केयर की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इस अवसर पर उप निदेशक अंशुमन गुप्ता, प्रो. मनोज गुप्ता, डॉ. ब्रह्मप्रकाश, प्रो. यूबी मिश्रा, डॉ. सौरभ वार्ष्णेय, डॉ. मनीषा नैथानी, डॉ. राजेश काथरोटिया, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल आदि मौजूद रहे।
