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PIB Delhi

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए, वित्तीय सहायता के एक निश्चित स्रोत बिना उच्च शिक्षा को जारी रखना और शोध करना कठिन हो सकता है। समय पर मिलने वाली फेलोशिप से उन्हें वह स्थिरता मिल सकती है, जिसकी जरूरत अकादमिक कार्यों को जारी रखने और पेशेवर करियर की दिशा में आगे बढ़ने के लिए होती है।

अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप (एनएफएससीयोजना के तहत मिली सहायता के प्रभाव को प्रदर्शित करते हुएएससी-III समुदाय के 34 वर्षीय स्कॉलर श्री मल्लेला पृथ्वी राजू ने गंभीर वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद अपनी पीएचडी पूरी की और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में अपना करियर बनाने की दिशा में आगे बढ़े।

बेहद कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से होने के कारण, श्री राजू के पास अपनी पढ़ाई के लिए कोई निश्चित आय नहीं थी। अपनी पढ़ाई के दौरान जब वे अपनी फेलोशिप की मासिक और छमाही प्रक्रिया के लिए जरूरी हस्ताक्षर लेने जाते थे, तो उन्हें विश्वविद्यालय के अधिकारियों की ओर से हिचकिचाहट और सूक्ष्म भेदभाव का भी सामना करना पड़ता था।

इन कठिनाइयों के बावजूद, श्री राजू अपने अकादमिक एवं पेशेवर लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहे। वे एक रिसर्च साइंटिस्ट के तौर पर सफल करियर बनाना चाहते थे और वैज्ञानिक पदों के लिए खुद को तैयार करते रहे।

श्री राजू को दिसंबर 2019 से दिसंबर 2024 तक एनएफएससी योजना के तहत फेलोशिप सहायता मिली। इस सहायता में जूनियर रिसर्च फेलोशिप चरण के दौरान 37,000 रुपये प्रति माह और सीनियर रिसर्च फेलोशिप चरण के दौरान 42,000 रुपये प्रति माह की राशि शामिल थी।

यह फेलोशिप ही उनके लिए एकमात्र वित्तीय सहारा बन गई। इसने उनकी पढ़ाई, शोध और रहने-सहने के बुनियादी खर्चों को पूरा करके उनकी परिस्थिति को पूरी तरह से वित्तीय असुरक्षा  निकालकर एक स्थिर वित्तीय आजादी में बदल दिया।

इस सहायता के जरिए श्री राजू आर्थिक कठिनाइयों से उबर पाए, अपने शोध पर ध्यान केन्द्रित  रख पाए और सफलतापूर्वक अपनी पीएचडी पूरी कर पाए।

श्री राजू अभी एचसीयू में प्रोजेक्ट साइंटिस्ट के तौर पर कार्यरत हैं। वे वैज्ञानिक पदों के लिए तैयारी जारी रखे हुए हैं और एक पूर्णकालिक रिसर्च साइंटिस्ट के तौर पर खुद को स्थापित करने के अपने बहुप्रतीक्षित लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

एनएफएससी स्कीम ने गंभीर आर्थिक तंगी के दौर को शैक्षणिक उपलब्धि एवं पेशेवर प्रगति  के दौर में बदलने में मदद की। इस फेलोशिप ने उन्हें अपनी शोध संबंधी महत्वाकांक्षाओं को छोड़े बिना उच्च शिक्षा पूरी करने में समर्थ बनाया।

उनकी शैक्षणिक लगन के परिणामस्वरूप तीन शोध-पत्र भी प्रकाशित हुए, जो वैज्ञानिक शोध के प्रति उनकी निरंतर सक्रियता को दर्शाते हैं।

उनके प्रकाशित शोध-पत्र इन लिंक पर उपलब्ध हैं:

1. https://doi.org/10.1007/s11356-023-27100-3.


2. https://www.frontiersin.org/journals/marine-science/articles/10.3389/fmars.2025.1604055.


3. https://doi.org/10.1007/s10661-025-14670-7.

श्री राजू की यह यात्रा इस बात को दर्शाती कि निरंतर मिलने वाली फेलोशिप सहायता, आर्थिक रूप से वंचित समुदायों के शोधार्थियों को वित्तीय बाधाओं को पार करने, डॉक्टोरल रिसर्च पूरी करने और विज्ञान के क्षेत्र में करियर की दिशा में आगे बढ़ने में कैसे सक्षम बना सकती है।

इस फेलोशिप के प्रभाव के बारे में बोलते हुए, श्री राजू ने कहा,

“मैं बेहद कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से आता हूं और यह फेलोशिप ही मेरे लिए एकमात्र सहारा थी। इसने मुझे गंभीर आर्थिक कठिनाइयों से उबरने, अपनी पीएचडी सफलतापूर्वक पूरी करने और प्रोजेक्ट साइंटिस्ट के तौर पर अपनी मौजूदा भूमिका तक पहुंचने में मदद की।”

अपने दृढ़ संकल्प और एनएफएससी स्कीम के तहत मिले सहयोग के भरोसे, श्री मल्लेला पृथ्वी राजू ने वित्तीय असुरक्षा की स्थिति से निकलकर डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में अपना स्थान बनाया। उनकी यह यात्रा इस बात को दर्शाती है कि शोध की आकांक्षाओं को मजबूत करने और पेशेवर मौकों को बढ़ाने में शैक्षिक सहायता की भूमिका कितनी अहम है।


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By udaen

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