हाथियों, पारिस्थितिकी तंत्र और सह-अस्तित्व का उत्सव
PIB Delhi
| विश्व हाथी दिवस हाथियों के पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है। भारत में दुनिया की लगभग 60% जंगली एशियाई हाथियों की आबादी है और इसने प्रोजेक्ट एलीफेंट, हाथी रिजर्व और संरक्षित गलियारों के माध्यम से संरक्षण को मजबूत किया है। वैज्ञानिक निगरानी, प्रौद्योगिकी-संचालित संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी लोगों और हाथियों के बीच सह-अस्तित्व को और बढ़ावा देती है। ये सतत प्रयास हाथियों, पारिस्थितिक तंत्र और भारत की प्राकृतिक विरासत की रक्षा के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। |
भारत के जंगलों का सौम्य और विशालकाय जीव

भारत दुनिया के लगभग 60% जंगली एशियाई हाथियों का घर है, जो वैश्विक हाथी संरक्षण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। हाथियों का गहरा सांस्कृतिक महत्व है और स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र में अहम भूमिका निभाते हैं। एक मुख्य (कीस्टोन) प्रजाति के रूप में, वे जंगलों को बनाए रखते हैं, जैव विविधता का समर्थन करते हैं और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं। ‘सिंक्रोनस ऑल इंडिया पॉपुलेशन एस्टीमेशन ऑफ एलिफेंट्स (SAIEE) 2021-25′ के अनुसार भारत में जंगली हाथियों की अनुमानित संख्या 22,446 है। इन हाथियों को 33 हाथी रिजर्व और 150 चिह्नित गलियारों में संरक्षित किया गया है।
यह समृद्ध हाथी विरासत बढ़ते संरक्षण चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी भी लाती है। हर साल 12 अगस्त को मनाया जाने वाला ‘विश्व हाथी दिवस‘ निरंतर वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। भारत के संरक्षण प्रयास आवास के नुकसान, विखंडन, शिकार, अवैध वन्यजीव व्यापार और मानव-हाथी संघर्ष का समाधान करते हैं। देश अपने संरक्षण प्रयासों के हिस्से के रूप में कानूनी सुरक्षा, आवास संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी और सामुदायिक भागीदारी को जोड़ता है। प्रौद्योगिकी-संचालित उपाय इन प्रयासों को और मजबूत करते हैं और जंगल में हाथियों के दीर्घकालिक अस्तित्व का समर्थन करते हैं।
भारत में हाथियों का स्थायी महत्व
हाथी भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं। इनका महत्व पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य, सांस्कृतिक परंपराओं और सामुदायिक पहचान तक फैला हुआ है।
पारिस्थितिक महत्व
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हाथी ऐसी मौलिक प्रजातियां हैं जो जंगल की संरचना और पारिस्थितिकी तंत्र की कार्यप्रणाली को आकार देती हैं। वे स्वभाव से प्रवासी होते हैं, जिनका घूमना-फिरना 100 से 3,0002 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला होता है। जैसे-जैसे वे लंबी दूरी तय करते हैं, वे रास्ते और पानी के स्रोत बनाते हैं जिससे अन्य वन्यजीवों को लाभ होता है। उनकी खाने की आदतें पोषक तत्वों के चक्र का समर्थन करती हैं और बीजों का प्रसार करती हैं जो जंगल के पुनरुद्धार में मदद करता है। इससे खंडित जंगलों को जोड़ने और समृद्ध आनुवंशिक विविधता के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने में मदद मिलती है। इसलिए हाथियों की रक्षा करने से पारिस्थितिक जुड़ाव, जंगल का स्वास्थ्य और व्यापक जैव विविधता मजबूत होती है।
सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
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हाथियों ने सदियों से भारत की धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक प्रथाओं और सामुदायिक पहचान को आकार दिया है। भगवान गणेश उत्तर भारतीय परंपराओं में ज्ञान और बाधाओं को दूर करने का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐतिहासिक रूप से हाथियों ने शाही प्रतीकों के रूप में अधिकार और प्रतिष्ठा का प्रतीक प्रस्तुत किया है। दक्षिण भारत में मंदिर के हाथी धार्मिक अनुष्ठानों और त्योहारों का हिस्सा बने हुए हैं। पूर्वोत्तर के समुदाय भगवान गणेश की पूजा अपने देवी-देवताओं के रूप में करते हैं और हाथियों को गहरे सम्मान से देखते हैं। कुछ समुदाय पारंपरिक रूप से हाथियों को बुजुर्गों और ज्ञान के प्रतीक के रूप में देखते हैं। ये परंपराएं भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक जीवन में हाथियों के स्थायी स्थान को रेखांकित करती हैं।

विशालकाय जीवों की गिनती: भारत के हाथी आज कहां हैं
भारत के हाथी संरक्षण की कहानी आंकड़ों के जरिए सबसे अच्छे से बयां होती है। रिजर्व नेटवर्क से लेकर कॉरिडोर रिस्टोरेशन तक, हर आंकड़ा दशकों के निरंतर संस्थागत प्रयास को दर्शाता है।
प्रोजेक्ट एलीफेंट: व्यापक संरक्षण फ्रेमवर्क
| डीएनए-आधारित नमूनाकरणप्रोजेक्ट एलीफेंट के तहत वैज्ञानिक निगरानी ने हाथी आबादी के मूल्यांकन को मजबूत किया है। SAIEE 2021-25 में भारत की पहली डीएनए-आधारित समकालिक हाथी गणना का उपयोग किया गया। वैज्ञानिकों ने अद्वितीय आनुवंशिक फिंगरप्रिंट के माध्यम से अलग-अलग हाथियों की पहचान करने के लिए लीद (dung) के नमूनों का विश्लेषण किया। इससे पूरे परिदृश्य में दोहराए गए नमूनों का पता लगाने और जनसंख्या अनुमानों में सुधार करने में मदद मिली। SAIEE ने डीएनए प्रोफाइलिंग, ब्लॉक काउंट और लाइन-ट्रांसेक्ट सर्वे को जोड़ा, जिससे हाथी आबादी के मूल्यांकन की वैज्ञानिक सटीकता मजबूत हुई। |
प्रोजेक्ट एलीफेंट हाथी संरक्षण के लिए भारत सरकार की प्रमुख पहल है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा कार्यान्वित, यह कार्यक्रम हाथी आवासों की रक्षा, बंदी हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करता है। यह AI-सक्षम निगरानी, रेडियो-कॉलरिंग, जेनेटिक डेटाबेस और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से विज्ञान-संचालित संरक्षण को भी बढ़ावा देता है।
भारत के हाथी गलियारों को सुरक्षित करना
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हाथी गलियारे भारत में हाथी संरक्षण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये उन पूर्व प्राकृतिक आवासों को आपस में जोड़ते हैं जो मानव विकास या अन्य कारणों से खंडित हो गए हैं। ये गलियारे ऐसे आवास हैं जिन्हें अलग-थलग पड़े क्षेत्रों को जोड़ने के लिए विकसित किया गया है। यह खंडित आवासों के बीच सुरक्षित आवाजाही को सक्षम बनाकर हाथियों की स्वस्थ और आनुवंशिक रूप से विविध आबादी को बनाए रखने और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में मदद करने के लिए आवश्यक हैं। वे पारिस्थतिकीय निरंतरता बनाए रखकर दीर्घकालिक आबादी की व्यवहार्यता का भी समर्थन करते हैं। प्रोजेक्ट एलीफेंट के तहत, सरकार ने 14 हाथी-रेंज वाले राज्यों में हाथी गलियारों की पहचान और पुष्टि की है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान के तकनीकी सहयोग से तैयार ‘भारत के हाथी गलियारे, 2023′ (Elephant Corridors of India, 2023) के अनुसार, ये गलियारे चार क्षेत्रों में फैले हुए हैं। पूर्वी-मध्य क्षेत्र में सर्वाधिक 52 गलियारे हैं, इसके बाद उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में 48, दक्षिणी क्षेत्र में 32 और उत्तरी क्षेत्र में 18 गलियारे हैं। राज्यों में पश्चिम बंगाल 26 गलियारों के साथ शीर्ष पर है, जो कुल राष्ट्रीय औसत का 17% से अधिक है। इस नेटवर्क में 19 अंतर-राज्यीय गलियारे और भारत तथा नेपाल को जोड़ने वाले छह सीमा-पार (ट्रांसबाउंड्री) गलियारे शामिल हैं। निगरानी के आंकड़ों के अनुसार 59 गलियारों (40%) में हाथियों की आवाजाही बढ़ी है, 29 (19%) में स्थिति स्थिर है, 29 (19%) में आवाजाही घटी है, तथा 15 गलियारों की स्थिति प्रभावित हुई है। इन गलियारों की सुरक्षा से आवास कनेक्टिविटी मजबूत होती है, संघर्ष कम होता है और भारत में हाथियों की आबादी के दीर्घकालिक संरक्षण में मदद मिलती है।
| सतत गलियारा संरक्षणवैज्ञानिक निगरानी, सीमाओं के निर्धारण और राज्य की कार्य एवं प्रबंधन योजनाओं में एकीकरण के माध्यम से सरकार इन पारिस्थितिक जीवन-रेखाओं को मजबूत कर रही है। वर्तमान में, 150 गलियारे हाथियों की आवाजाही को सुगम बना रहे हैं। ये निरंतर प्रयास आवास कनेक्टिविटी को बढ़ा रहे हैं और भारत के वन परिदृश्यों में हाथियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर रहे हैं। |
रिजर्व नेटवर्क का विस्तार

वर्ष 2014 के बाद से एलीफेंट रिजर्व का लगातार विस्तार हुआ है, जो अब 14 प्रमुख हाथी-रेंज वाले राज्यों में 80,777 वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करते हैं। इस विस्तार ने 8,610 वर्ग किमी अतिरिक्त क्षेत्र को सुरक्षा के दायरे में लाया है, जिससे महत्वपूर्ण आवास सुरक्षित हुए हैं और पारिस्थितिक जुड़ाव मजबूत हुआ है। इसने वैज्ञानिक प्रबंधन में भी सुधार किया है और भारत के जंगली हाथियों के अस्तित्व के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है।
प्रोजेक्ट एलीफेंट, वैज्ञानिक जनसंख्या अनुमान, संरक्षित रिजर्व और जुड़े हुए गलियारों ने मिलकर हाथी संरक्षण को एक एकीकृत लैन्डस्केप-स्तरीय कार्यक्रम में बदल दिया है। ये पहल एशियाई हाथी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आधुनिक विज्ञान के साथ पारंपरिक संरक्षण मूल्यों को जोड़ने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
आंकड़ों से परे: हर हाथी की सुरक्षा
हाथियों की संख्या का अनुमान लगाना संरक्षण का केवल एक पहलू है। दीर्घकालिक सफलता सुरक्षित आवासों, मजबूत कानूनी सुरक्षा उपायों और स्थानीय समुदायों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर निर्भर करती है। भारत सरकार ने एक व्यापक संरक्षण दृष्टिकोण अपनाया है जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अवसंरचना और जन कल्याण को जोड़ता है। ये पहल हाथियों को जंगलों के भीतर और साझा परिदृश्यों में सुरक्षित रखती हैं।
भारत ने हाथी लैन्डस्केप के प्रबंधन में सुधार करने का प्रयास किया है। हाथी रिजर्व के लिए प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन फ्रेमवर्क 2023 में शुरू किया गया था और चार प्रतिनिधि रिजर्वों-शिवालिक, काजीरंगा-कारबी आंगलोंग, मयूरभंज और नीलगिरी में इसका परीक्षण किया गया था। पायलट अनुभव के आधार पर, कैम्पा फंडिंग के सहयोग से सरकार इस ढांचे को देशभर के हाथी रिजर्व में लागू कर रही है। यह पारदर्शी मूल्यांकन और मापने योग्य संरक्षण परिणामों के आधार पर लचीले प्रबंधन को संस्थागत बनाता है।
हाल ही में, मंत्रालय ने देश के सभी हाथी-क्षेत्रों के लिए क्षेत्रीय कार्य योजनाएं विकसित करके इस लैन्डस्केप -आधारित दृष्टिकोण को एक कदम आगे बढ़ाया है। ये योजनाएं यह मान्यता देती हैं कि हाथी राज्य की सीमाओं के पार आवाजाही करते हैं, और आवास जुड़ाव, मानव-हाथी संघर्ष एवं लैन्डस्केप प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों के लिए अंतर-क्षेत्रीय तालमेल की आवश्यकता है। यह क्षेत्रीय कार्य योजना राज्यों को प्राथमिकता वाले संरक्षण और संघर्ष-शमन के कार्यों को लागू करने के लिए एक साझा ढांचा प्रदान करती है।
हाथियों के लिए सुरक्षित रेल नेटवर्क
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सरकार ने रेलवे गलियारों में हाथियों की मौतों को कम करने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं। संयुक्त सर्वेक्षणों में 3,452.4 किमी में फैले 127 संवेदनशील रेलवे खंडों को शामिल किया गया। इसके अलावा, 14 राज्यों के 77 खंडों (1,965.2 किमी) में सुरक्षा उपायों की सिफारिश की गई है, जिसमें अंडरपास, ओवरपास, रैंप, लेवल क्रॉसिंग और पुल संशोधन जैसे 705 निर्माण शामिल हैं। इन भौतिक सुधारों के साथ-साथ ऑप्टिकल-फाइबर-आधारित घुसपैठ पहचान, भूकंपीय सेंसर और थर्मल कैमरों जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, AI-सक्षम डिस्ट्रिब्यूटेड अकोस्टिक सेंसिंग सिस्टम अब लोको पायलटों, स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम को रीयल-टाइम अलर्ट प्रदान करते हैं। हाथियों से जुड़ी हर ट्रेन दुर्घटना की संबंधित राज्य वन विभाग के साथ संयुक्त जांच की जाती है। इन निरंतर प्रयासों के कारण ट्रेन की चपेट में आने से होने वाली हाथियों की मौतें 2013 के 26 से घटकर 2024 में 12 हो गईं, जो 50 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्शाती हैं।
आनुवंशिकी के जरिए बंदी हाथियों की सुरक्षा
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सरकार ने वैज्ञानिक निगरानी के माध्यम से बंदी (पालतू) हाथियों के अवैध व्यापार और आवाजाही के खिलाफ सुरक्षा उपायों को मजबूत किया है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत बिक्री, परिवहन और खरीद से जुड़े मामलों को कार्रवाई के लिए राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन के पास भेजा जाता है। गज सूचना मोबाइल एप्लिकेशन ने एक राष्ट्रीय आनुवंशिक डेटाबेस तैयार किया है जिसमें प्रत्येक पंजीकृत बंदी हाथी के डीएनए प्रोफाइल, शारीरिक लक्षण और स्वामित्व का विवरण शामिल है। यह डेटाबेस आवाजाही से पहले पहचान की पुष्टि करता है और कानूनी कार्यवाही के दौरान विश्वसनीय फोरेंसिक साक्ष्य प्रदान करता है।
| बंधक हाथी (हस्तांतरण या परिवहन) नियम, 2024पालतू हाथियों की आवाजाही को विनियमित करने के लिए सरकार ने कैप्टिव एलीफेंट (ट्रांसफर या ट्रांसपोर्ट) रूल्स, 2024 अधिसूचित किए। 3 मार्च 2023 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत गठित एक उच्च-स्तरीय समिति हाथियों के अंतर-राज्यीय हस्तांतरण की जांच करती है। एप्लिकेशन, नियम और यह समिति मिलकर पारदर्शिता बढ़ाती है और अवैध हस्तांतरण पर रोक लगाती है। |
शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए समुदायों का सहयोग
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संरक्षण तब सफल होता है जब स्थानीय समुदाय वन्यजीवों की रक्षा में बराबर के भागीदार बनते हैं। सरकार केंद्र प्रायोजित योजनाओं- प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलीफेंट और वन्यजीव आवास विकास के तहत अनुग्रह राशि प्रदान करती है। सहायता में मृत्यु या स्थायी विकलांगता के लिए 10 लाख रुपये, गंभीर चोट के लिए 2 लाख रुपये, मामूली चोटों के लिए 25,000 रुपये तक का इलाज खर्च, तथा राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के नियमों के अनुसार फसल और संपत्ति के नुकसान का मुआवजा शामिल है।
सरकार ने ‘ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट एडवाइजरी‘ के माध्यम से संघर्ष प्रबंधन को और मजबूत किया है। यह हॉटस्पॉट मैपिंग, त्वरित प्रतिक्रिया टीमों, राज्य एवं जिला स्तरीय समीक्षा समितियों और त्वरित मुआवजे की सिफारिश करता है। 2023 में जारी एलीफेंट-स्पेसिफिक कॉन्फ्लिक्ट मिटिगेशन गाइडलाइंस हितधारकों के बीच समन्वय में और सुधार लाती हैं। ये उपाय हाथियों और लोगों दोनों की सुरक्षा करते हैं, जिससे सुरक्षित सह-अस्तित्व को बढ़ावा मिलता है।
आस्था से उत्तरदायित्व तक
हाथियों के साथ भारत का संबंध सभ्यतागत मूल्यों और आधुनिक संरक्षण के बीच एक अनूठे तालमेल को दर्शाता है। सदियों से पूजनीय, हाथी प्रकृति की रक्षा और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की भारत की प्रतिबद्धता को प्रेरित करते रहते हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, मजबूत संस्थानों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से इस विरासत को और मजबूत किया गया है।
भारत सरकार ने हाथी संरक्षण के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क विकसित किया है। इन प्रयासों में आवासों को सुरक्षित करना, हाथी रिजर्व का विस्तार करना, गलियारों की रक्षा करना, रेलवे सुरक्षा में सुधार करना और बंदी हाथियों की आवाजाही को नियंत्रित करना शामिल है। मानव-हाथी संघर्ष से प्रभावित समुदायों के लिए सहायता लोगों और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व को और मजबूत करती है।
जैसे-जैसे भारत विश्व हाथी दिवस 2026 मना रहा है, हाथी संरक्षण के प्रति इसकी प्रतिबद्धता दृढ़ बनी हुई है। हर सुरक्षित आवास, पुनर्स्थापित गलियारा और सामुदायिक साझेदारी एशियाई हाथी के भविष्य को मजबूत करती है। विकसित भारत के तहत, भारत का आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी प्राकृतिक विरासत और सभ्यतागत मूल्यों दोनों की रक्षा करना जारी है।
संदर्भ
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