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PIB Delhi

3837. श्री वीकेश्रीकंदनः

क्या कृषि और किसान कल्याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) क्या कृषि प्रौद्योगिकी में हुई प्रगति ने कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अपनी पहुंच बनाई है;

(ख) क्या यह सच है कि इससे उत्पादन को कई गुना बढ़ाने और आधुनिक खेती की चुनौतियों के लिए अभिनव समाधान खोजने में मदद मिली है;

(ग) क्या यह भी सच है कि बागवानी फसलों की कटाई का यंत्रीकरण अभी भी एक चुनौती बना हुआ है;

(घ) क्या कृषि अब एक बहु-विषयक क्षेत्र बन चुकी है जिसमें मैकेनिकल, ऑटोमेशन और कंप्यूटिंग इंजीनियर सभी यंत्रीकरण की प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं; और

(ङ) यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है?

उत्तर

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री (श्री रामनाथ ठाकुर)

(क) एवं (ख):    कृषि प्रौद्योगिकी में हुई प्रगति ने उत्पादकता बढ़ाकर, संसाधनों के कुशल उपयोग को बेहतर बनाकर, खेती की लागत को कम करके, कठि परश्रम को न्यूनतम करके और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देकर कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव कर दिया है। उन्नत कृषि मशीनरी, सटीक खेती, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), रोबोटिक्स, सेंसर, रिमोट सेंसिंग, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), उपग्रह आधारित अनुप्रयोग, स्वचालन और डिजिटल प्रौद्योगिकियों जैसी आधुनिक तकनीकों को कृषि कार्यों में तेजी से एकीकृत किया जा रहा है।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, केंद्र प्रायोजित योजना “राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई)” के अंतर्गत संचालित कृषि मशीनीकरण उप-मिशन (एसएमएएम) के माध्यम से कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा दे रहा है। किसानों को कृषि मशीनरी और उपकरण खरीदने, कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी), हाई-टेक हब, कृषि मशीनरी बैंक (एफएमबी) स्थापित करने और कृषि मशीनीकरण से संबंधित प्रदर्शन, प्रशिक्षण, परीक्षण और क्षमता निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इन पहलों से छोटे एवं सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी किफायती दरों पर उपलब्ध हो पाती है।

विभाग कृषि ड्रोन की खरीद और प्रदर्शन के लिए एसएमएएम के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करके कृषि ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है। ड्रोन तकनीक का उपयोग कीटनाशकों और पोषक तत्वों के छिड़काव और डिजिटल कृषि डेटा तैयार करने के लिए किया जा रहा है, जिससे दक्षता में सुधार हो रहा है और इनपुट लागत कम हो रही है।

सटीक कृषि और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए, विभाग डिजिटल कृषि मिशन कार्यान्वित कर रहा है, जिसके तहत कृषि आयोजना और सेवाओं के वितरण में सुधार के लिए डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रौद्योगिकी-आधारित किसान-केंद्रित सेवाएं और डेटा-संचालित निर्णय सहायता प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है। एग्रीस्टैक के तहत बनाई गई किसान रजिस्ट्री को कृषि सेवाओं और लाभों के कुशल, पारदर्शी और लक्षित वितरण के लिए एक मूलभूत डेटाबेस के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका उद्देश्य पीएम-किसान, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण के लिए जन समर्थ प्लेटफॉर्म और एमएसपी-आधारित फसल खरीद प्रणालियों सहित विभिन्न किसान-केंद्रित योजनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के साथ एकीकरण को सुगम बनाना है। दिनांक 06.08.2026 तक, कुल 10.33 करोड़ से अधिक किसान आईडी तैयार की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, डिजिटल फसल सर्वेक्षण, अर्थात देश के प्रत्येक खेत में उगाई जा रही फसलों को फोटो और जियो-टैग के साथ डिजिटल रूप से कैप्चर करने वाला सर्वेक्षण, फसलों की भूखंड की दृश्यता और विभिन्न मौसमों में बोए गए क्षेत्रों के बेहतर अनुमान को सक्षम बनाता है, परिणामस्वरूप उत्पादन अनुमान, खरीद, इनपुट आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन के लिए साक्ष्य-आधारित योजना में सहायता मिलती है। खरीफ 2025 में, 604 जिलों में 28.5 करोड़ से अधिक भूखंडों को कवर करते हुए डिजिटल फसल सर्वेक्षण (डीसीएस) किया गया है। भारत विस्तार (कृषि संसाधनों तक पहुंच के लिए आभासी एकीकृत प्रणाली) कृषि के लिए एक बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) संचालित डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) है। यह प्लेटफॉर्म किसानों को एआई-सक्षम, वास्तविक समय और स्थान-विशिष्ट कृषि सलाह और सरकारी योजनाओं और कृषि सहायता सेवाओं तक पहुंच प्रदान करता है। अब तक, इस प्लेटफॉर्म ने 5.9 लाख से अधिक किसानों को सहायता की है और 93 लाख से अधिक किसानों के प्रश्नों का समाधान किया है।

कृषि मशीनों का अनुसंधान, डिजाइन, विकास, परीक्षण और सुधार कार्य भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू) और अन्य अनुसंधान संगठनों के माध्यम से किया जाता है। इन संस्थानों ने विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों और खेतों के आकार में भिन्नता के लिए उपयुक्त स्थान-विशिष्ट और फसल-विशिष्ट मशीनें विकसित की हैं।

(ग):      बागवानी फसलों में कटाई के मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए, विभिन्न प्रकार की बागवानी फसलों के लिए उपयुक्त फसल-विशिष्ट कटाई तकनीकों का विकास और प्रसार किया जा रहा है। इन तकनीकों में फसलों की विशिष्टता, पौधों की संरचना, फलों की परिपक्वता, खेतों के आकार और उपज की गुणवत्ता बनाए रखते हुए यांत्रिक क्षति को कम करने की आवश्यकता को ध्यान में रखा गया है। एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) के तहत, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को बागवानी कार्यों के लिए आवश्यक उपकरणों सहित उन्नत बागवानी उपकरणों, औजारों और मशीनरी को अपनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और इसके संस्थान बागवानी फसलों के लिए उपयुक्त मशीनीकरण तकनीकों को विकसित करने, सुधार करने और उनका मूल्यांकन करने के लिए अनुसंधान और विकास कार्य करते हैं, जिन्हें प्रदर्शनों, प्रशिक्षण और विस्तार कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाता है।

(घ) एवं (ङ):     कृषि क्षेत्र तेजी से विकसित होकर एक बहुविषयक क्षेत्र बन गया है जिसमें कृषि, यांत्रिकी, विद्युत, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वचालन, उपकरण, कंप्यूटर और डेटा विज्ञान के इंजीनियर शामिल हैं। इंजीनियरिंग, कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग, एआई, आईओटी, ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस), जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और डेटा एनालिटिक्स के एकीकरण ने इंटेलिजेंट कृषि मशीनरी, स्वायत्त उपकरण, सटीक कृषि प्रणालियाँ, संरक्षित खेती प्रौद्योगिकियाँ और स्मार्ट कृषि प्रबंधन समाधानों के विकास को गति प्रदान की है।

सरकार उत्पादकता बढ़ाने, संसाधन उपयोग दक्षता में सुधार करने, सततता को मजबूत करने और भारतीय कृषि को अधिक अनुकूल और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अपनी विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, कौशल विकास, उद्यमिता और आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने को निरंतर बढ़ावा दे रही है।


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By udaen

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