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PIB Delhi

“त्रिभुवन” सहकारी यूनिवर्सिटी अधिनियम, 2025 विश्वविद्यालय को अपने स्वयं के स्कूलों की स्थापना करके और संबद्ध संस्थानों के माध्यम से सहकारी क्षेत्र में योग्य एवं प्रशिक्षित श्रमबल की वर्तमान और भावी आवश्यकताओं को पूरा करने तथा सहकारी क्षेत्र में कार्यबल की पेशेवरता हेतु सहकारी शिक्षा एवं प्रशिक्षण में पाठ्यक्रम डिज़ाइन व सामग्री, शिक्षण शास्त्र तथा पाठ्यक्रम वितरण का मानकीकरण करने के लिए अधिदेशित करता है । प्रशिक्षण प्रणालियों के आधुनिकीकरण के संदर्भ में, विश्वविद्यालय डिजिटल सामग्री, सिमुलेशन , खेलों और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग करता है।

जहां तक सहकारी समितियों, विशेष रूप से राजस्थान में, में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व का संबंध है, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी), सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक सांविधिक निकाय है, को किसान संस्थानों को सशक्त करके, उत्पादकता बढ़ाकर और फसल-पूर्व एवं फसल-पश्चात् अवसंरचना को सहायता देकर सहकारी समितियों के माध्यम से आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अधिदेशित किया गया है।

 एनसीडीसी आवधिक रूप से यथा-संशोधित, अधिसूचित वस्तुओं और सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करते हुए अपनी निगम-प्रायोजित योजनाओं के साथ-साथ भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत सहकारिता क्षेत्र को वित्तीय सहायता प्रदान करता रहा है। हालिया  वर्षों में, एनसीडीसी ने सहकारी अवसंरचना  को सशक्त करते हुए, नई सहकारी समितियों, महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल आदि पर विशेष बल देने के साथ-साथ सहकारिता क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप क्षेत्र-विशिष्ट योजनाएँ और केंद्रित उत्पाद शुरू किए हैं। सहायता प्राप्त कार्यकलापों और कार्यान्वित की गई योजनाओं का ब्योरा संलग्नक-I में प्रदान किया गया है ।

एनसीडीसी , सहकारी समितियों में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए, अखिल भारतीय स्तर पर विशेष रूप से महिला-संचालित स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों के लिए निम्नलिखित योजनाएं कार्यान्वित कर रहा है:

  1. स्वयं शक्ति सहकार योजना
  2. नंदिनी सहकार
  3. युवा सहकार योजना

ये योजनाएं पूरी तरह से एनसीडीसी (NCDC) द्वारा वित्तपोषित और समर्थित हैं।

स्वयं शक्ति सहकार योजना का ब्योरा संलग्नक-II में दिया गया है।

नंदिनी सहकार का ब्योरा संलग्नक –III में दिया गया है।

युवा सहकार योजना का ब्योरा संलग्नक -IV में दिया गया है

राजस्थान राज्य में महिला सहकारी समितियों के लिए पिछले 3 वर्षों के संवितरण का ब्योरा इस प्रकार है:

क्रम सं.वित्तीय वर्षसंवितरित राशि (₹ करोड़ में)
12023-240.44
22024-25__
32025-26190.16

सहकारिता मंत्रालय ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए हैं कि डिजिटल युग में सहकारिता क्षेत्र प्रतिस्पर्धी बना रहे। प्रमुख उपाय निम्नानुसार हैं:

  1. प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियाँ (पैक्स) कंप्यूटरीकरण परियोजना: मंत्रालय ₹2,516 करोड़ के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ कार्यशील पैक्स के कंप्यूटरीकरण हेतु केंद्रीय प्रायोजित परियोजना का कार्यान्वयन कर रहा है, जिसे अब बढ़ाकर ₹2925.39 करोड़ तक कर दिया गया है। इसके अंतर्गत सभी कार्यशील पैक्स को एक ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) आधारित साझा राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाया जाना तथा राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) के माध्यम से उन्हें नाबार्ड से लिंक करना शामिल है। यह ईआरपी आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर के माध्यम से उनकी परिचालन दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार लाने के उद्देश्य से किया गया है। यह परियोजना मानकीकृत लेखांकन , संपरीक्षा, एमआईएस , ऑनलाइन सेवा प्रदाय और विभिन्न राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्मों के साथ एकीकरण की सुविधा प्रदान करती है, जिससे कुशल शासन  और सदस्यों को बेहतर सेवा प्रदाय संभव हो पाता है । प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियाँ (पैक्स) कंप्यूटरीकरण परियोजना के अंतर्गत, दिनांक 15.07.2026 तक ईआरपी आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर 63,686 पैक्स को ऑनबोर्ड किया जा चुका है, 54,707 पैक्स को ई-पैक्स घोषित किया गया है तथा इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से 51.58 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए गए हैं, जिससे ज़मीनी स्तर पर पारदर्शिता में वृद्धि, सेवा वितरण में सुधार और बेहतर वित्तीय प्रबंधन संभव हुआ है.
  2. सहकारी समितियों के पंजीयक (आरसीएसकार्यालय का कंप्यूटरीकरण: राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में सहकारी समितियों के पंजीयक कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण हेतु केंद्रीय प्रायोजित परियोजना का शुभारंभ मंत्रालय द्वारा वर्ष 2023-24 से तीन वर्षों की अवधि के लिए ₹94.59 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ 30.01.2024 को किया गया है । यह मंत्रालय की “आईटी पहलों के माध्यम से सहकारी समितियों को सशक्त करना” नामक अंब्रेला परियोजना का एक भाग है । इस परियोजना का उद्देश्य सहकारी समितियों के लिए व्यवसाय में  सुगमता को बढ़ावा देना तथा सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में सहकारी समितियों के आरसीएस कार्यालयों के साथ पारदर्शी और कागज़ रहित संवाद के लिए एक डिजिटल इकोसिस्टम का निर्माण करना है। इस परियोजना के अंतर्गत राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों को हार्डवेयर के प्रापण, सॉफ्टवेयर के विकास, सॉफ्टवेयर के रखरखाव एवं उन्नयन आदि के लिए अनुदान प्रदान किया जा रहा है । इस योजना के तहत विकसित किया जाने वाला सॉफ्टवेयर संबंधित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के सहकारी समिति अधिनियमों के अनुसार होगा। वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25, 2025-26 और 2026-27 (15 जुलाई, 2026 तक) के दौरान, 35 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने अपने प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं, तथा राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को भारत सरकार के हिस्से के रूप में ₹43.21 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। 7 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के एकीकृत डिजिटल आरसीएस  पोर्टल लाइव हो चुके हैं और उन्हें राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस  के साथ एकीकृत भी कर दिया गया है।
  3. कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबीका कंप्यूटरीकरण: दीर्घकालिक सहकारी ऋण संरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, सरकार द्वारा 13 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में फैले कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) की 1,867 इकाइयों के कंप्यूटरीकरण की परियोजना को अनुमोदित किया गया है। नाबार्ड इस परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी है। अब तक 10 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से प्राप्त प्रस्तावों को 1,422 इकाइयों के साथ स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है । इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष 2023-24, वित्तीय वर्ष 2024-25, वित्तीय वर्ष 2025-26 और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 10 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को हार्डवेयर के प्रापण, डिजिटलीकरण और सपोर्ट सिस्टम की स्थापना हेतु ₹16.74 करोड़ का भारत सरकार का हिस्सा जारी किया जा चुका है । अब तक, 9 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने इस परियोजना के अंतर्गत हार्डवेयर का प्रापण पूरा कर लिया है।
  4. राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी): देश भर में सहकारी समितियों से संबंधित नीतियों के निर्माण और कार्यक्रमों/योजनाओं के क्रियान्वयन में हितधारकों  को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकारों के सहयोग से देश में सहकारी समितियों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार किया गया है। माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा दिनांक 08.03.2024 को एनसीडी) पोर्टल का शुभारंभ किया गया था। अब तक इस डेटाबेस में 30 विभिन्न क्षेत्रों की लगभग 8.6 लाख सहकारी समितियों का डेटा शामिल किया जा चुका है, जिनमें लगभग 32 करोड़ सदस्य शामिल हैं।
  5. राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडीपोर्टल 3.0 का शुभारंभअपग्रेड/संवर्धित संस्करण एनसीडी पोर्टल 3.0 का आधिकारिक शुभारंभ माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा दिनांक 06.07.2026 को इसका किया गया।  एनसीडी पोर्टल 3.0 कई नई सुविधाएँ प्रदान करता है, जिनमें ओटीपी आधारित सुरक्षित लॉगिन, सहकारी समिति-स्तरीय उपयोगकर्ता पहुँच और डैशबोर्ड, एआई चैटबॉट, गांव-स्तरीय जीआईएस मैपिंग, भाषिणी एकीकरण के माध्यम से बहुभाषी सहायता, डेटा को रियल-टाइम में अद्यतन करने के लिए राज्य आरसीएस पोर्टलों के साथ एपीआई एकीकरण, फीडबैक तंत्र, कॉल प्रबंधन एवं तकनीकी हेल्पडेस्क सहायता तथा उन्नत सुरक्षा एवं तीव्र पहुँच हेतु बेहतर फ्रंटएंड फ्रेमवर्क और डेटाबेस शामिल हैं ।
  6. एनसीडी जियोटैग मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ: सभी कार्यशील सहकारी समितियों के जीपीएस स्थान (अक्षांश और देशांतर) को कैप्चर करने के लिए एनसीडी जियोटैग मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया गया है । माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा दिनांक 06.07.2026 को शुभारंभ किया गया था। यह मोबाइल एप्लिकेशन एनसीडी पोर्टल पर सहकारी समितियों के सटीक जियो-टैगिंग और जीआईएस आधारित मैपिंग को भी सक्षम बनाएगा।
  7. सहकारी समितियों के केंद्रीय पंजीयक (सीआरसीएसके कार्यालय का कंप्यूटरीकरण:

बहु-राज्य सहकारी सोसायटी (संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 120क के नव-संस्थापित उपबंध के अनुपालन में, ऑनलाइन पंजीकरण, उपविधियों में संशोधन और समयबद्ध सेवा वितरण को सक्षम करके बहु-राज्य सहकारी समितियों के लिए एक डिजिटल पारितंत्र सृजित करने हेतु केंद्रीय सहकारी समितियों के केंद्रीय पंजीयक के कार्यालय का कंप्यूटरीकरण कर दिया गया है । सीआरसीएस कार्यालय के कंप्यूटरीकरण के साथ, एमएससीएस अधिनियम की सांविधिक अपेक्षाओं के अनुपालन में, पंजीकरण, उपविधियों में संशोधन, वार्षिक विवरणी दाखिल करना, शाखा खोलना, बिक्री अधिकारी की नियुक्ति, सहकारी शिक्षा निधि (सीईएफ) तथा सहकारी पुनर्वास, पुनर्रचना एवं विकास निधि (सीआरआरडीएफ) में ऑनलाइन भुगतान आदि सहित सीआरसीएस कार्यालय की सभी कार्य प्रक्रियाएं नए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से निष्पादित की जा रही हैं ।

  1. सहकारी रैंकिंग फ्रेमवर्कराज्य-वार और क्षेत्रक-वार सहकारी समितियों का मूल्यांकन और रैंकिंग करने के लिए सरकार द्वारा 24 जनवरी 2025 को सहकारी रैंकिंग फ्रेमवर्क लॉन्च किया गया था । यह रैंकिंग फ्रेमवर्क राज्य आरसीएस को ऑडिट अनुपालन, प्रचालन कार्यकलापों, वित्तीय प्रदर्शन, अवसरंचना और प्राथमिक पहचान संबंधी जानकारी सहित प्रमुख मानदंडों के आधार पर सहकारी समितियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में सक्षम बनाता है । राज्य/संघ राज्य क्षेत्र एनसीडी पोर्टल के माध्यम से राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 12 प्रमुख क्षेत्रों—अर्थात पैक्स , डेयरी, मात्स्यिकी, शहरी सहकारी बैंक, आवासन, क्रेडिट और  थ्रिफ्ट, खादी एवं ग्रामोद्योग, कृषि प्रसंस्करण/औद्योगिक, हस्तशिल्प, हथकरघा, कपड़ा एवं बुनकर, बहुउद्देश्यीय और चीनी सहकारी समितियों की रैंकिंग तैयार कर सकते हैं । इस रैंकिंग प्रणाली का उद्देश्य सहकारी समितियों के बीच पारदर्शिता, विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना है, जिससे अंततः उनके विकास को गति मिलेगी।
  2. एपीआई के माध्यम से राज्य आरसीएस पोर्टल को एनसीडी पोर्टल के साथ एकीकृत करने हेतु राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के लिए सुविधा : सहकारिता मंत्रालय ने एनसीडी पोर्टल से राज्य की सहकारी समितियों के संपूर्ण डेटा को उनके संबंधित आरसीएस पोर्टलों तक लाने के लिए राज्यों के लिए एक मानक एपीआई विकसित किया है, और दिनांक 27.05.2025 को राज्यों के साथ मानक एपीआई विनिर्देश दस्तावेज और डेटाबेस स्कीमा साझा किया है । इसके बाद, मंत्रालय ने दिनांक 22.09.2025 को आरसीएस पोर्टल से एनसीडी पोर्टल पर लाइव, इवेंट-संचालित डेटा के लिए पुश एपीआई (एंड प्वाइंट एपीआई) पर एक दस्तावेज़ साझा किया, जिससे रियल-टाइम में अपडेट और नए पंजीकरण डेटा को सक्षम किया जा सके। प्रक्रिया को और अधिक स्पष्ट करने के लिए,  दिनांक 14.11.2025 को सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को एक व्यापक चेकलिस्ट के साथ एक एडवाइजरी जारी की गई थी । एकीकरण योजना के अनुसार, एनसीडी पोर्टल के साथ सफल एकीकरण के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को अपने स्तर पर रिवर्स/पुल एपीआई का विकास सुनिश्चित करने और चेकलिस्ट के अनुसार आरसीएस कंप्यूटरीकरण को पूरा करने की आवश्यकता है । दिनांक 15.07.2026 की स्थिति के अनुसार, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, मिजोरम और सिक्किम राज्यों तथा दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह संघ राज्य क्षेत्रों ने एनसीडी पोर्टल के साथ एकीकरण पूरा कर लिया है । यह दोतरफा एकीकरण विभिन्न प्लेटफॉर्मों के बीच सहकारी डेटा के सिंक्रोनाइजेशन को सुनिश्चित करेगा।
  3. डिजिटल सेवाएं एवं प्रौद्योगिकी एकीकरण: पैक्स  के लिए विकसित ईआरपी आधारित सॉफ्टवेयर कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस), राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी), कॉमन सेवा केंद्रों (सीएससी) और अन्य डिजिटल सर्विस प्लेटफॉर्मों के साथ एकीकरण को सक्षम बनाता है, जिससे पैक्स जीवंत बहुउद्देश्यीय आर्थिक संस्थाओं के रूप में कार्य करने और अपने सदस्यों को विविधीकृत सेवाएं प्रदान करने में सक्षम हो रहे हैं।
  4. शासन व्यवस्था फ्रेमवर्क को सशक्त बनाना: मंत्रालय ने कई नीतिगत और संस्थागत सुधार किए हैं, जिनमें राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस की स्थापना, राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 का शुभारंभ, एमएससीएस अधिनियम, 2002 में संशोधन आदि शामिल हैं।
  5. शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबीको अपने व्यवसाय का विस्तार करने के लिए नई शाखाएं खोलने की अनुमति दी गई हैशहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) अब भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व अनुमोदन के बिना पिछले वित्तीय वर्ष में शाखाओं की मौजूदा संख्या के 15% तक (अधिकतम 10 शाखाएं) नई शाखाएं खोल सकते हैं।
  6. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शहरी सहकारी बैंकों को अपने ग्राहकों को डोरस्टेप सेवाएं प्रदान करने की अनुमति दी गई हैशहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) द्वारा अब डोरस्टेप बैंकिंग सुविधा प्रदान की जा सकती है। इन बैंकों के खाताधारक अब घर बैठे ही विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं, जैसे नकदी निकासी, नकदी जमा, केवाईसी , डिमांड ड्राफ्ट और पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाण पत्र आदि।
  7. शहरी सहकारी बैंकों के लिए अम्ब्रेला संगठनशहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) क्षेत्र के लिए एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुमोदन से नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फ़ाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनयूसीएफ़डीसी) की स्थापना की गई है, जो लगभग 1,500 यूसीबी (यूसीबी) को आवश्यक आईटी अवसंरचना और परिचालन संबंधी सहायता प्रदान कर रहा है। इसने डिजी लोन और डिजी पे जैसी विभिन्न सेवाएं भी शुरू की हैं।
  8. वाणिज्यिक बैंकों की तर्ज पर सहकारी बैंकों को भी बकाया ऋणों का वन-टाइम सेटलमेंट करने की अनुमति दी गई है :  सहकारी बैंक अब बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियों के माध्यम से तकनीकी राइट-ऑफ के साथ-साथ उधारकर्ताओं के साथ ऋण समाधान प्रक्रिया भी प्रदान कर सकते हैं।
  9. सहकारी बैंकों हेतु एईपीएस के लाइसेंस शुल्क में कटौती की गई है सहकारी बैंकों को आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) से जोड़ने के लिए लाइसेंस शुल्क को लेनदेन की संख्या से जोड़कर कम कर दिया गया है । सहकारी वित्तीय संस्थानों को अब प्री-प्रोडक्शन (पूर्व-उत्पादन) चरण के पहले तीन महीनों के लिए यह सुविधा नि:शुल्क मिलेगी। इसके साथ ही, ऑनबोर्ड किए गए बैंकों के सदस्य अब बायोमेट्रिक्स के माध्यम से अपने घर पर ही बैंकिंग की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे।.
  10. यूआईडीएआई ने दिनांक 01.08.2025 को आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएसपर सहकारी बैंकों को ऑनबोर्ड करने के लिए एक नया फ्रेमवर्क लागू किया है। अब, केवल एसटीसीबी को प्रमाणीकरण उपयोगकर्ता एजेंसियों (एयूए)/ईकेवाईसी उपयोगकर्ता एजेंसियों (केयूए) के रूप में शामिल होने की आवश्यकता है; डीसीसीबी को राज्य सहकारी बैंक के माध्यम से उप एयूए/केयूए के रूप में इसका नि:शुल्क उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी।
  11. सहकार सारथी (साझा सेवा निकाय)ग्रामीण सहकारी बैंकों (आरसीबी) को प्रौद्योगिकी सेवाएं प्रदान करने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक  के अनुमोदन के पश्चात सहकार सारथी (साझा सेवा निकाय) प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई है । इसके द्वारा ग्रामीण सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए 13 सेवाएँ शुरू की गई हैं।
  12. भारतीय रिज़र्व बैंक  ने दिनांक 07.10.2025 की अपनी अधिसूचना के माध्यम से ग्रामीण सहकारी बैंकों को अपनी एकीकृत  ऑमबुड्समैन योजना में शामिल कर लिया है। इससे ग्रामीण सहकारी बैंकों के कामकाज में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी।
  13. भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 04.12.2025 के मास्टर निदेश के माध्यम से राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबीऔर जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) को स्वचालित मार्ग के तहत नई शाखाएं (अधिकतम 10खोलने की अनुमति प्रदान की है । राज्य सहकारी बैंक (एसटीसीबी) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (डीसीसीबी) पात्रता के अधीनअब बिना किसी देरी के नई शाखाएं खोल सकेंगे और अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकेंगे।
  14. भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 28.11.2025 के मास्टर निदेश के माध्यम से ग्रामीण और शहरी सहकारी बैंकों को आधुनिक बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने हेतु वित्तीय मानदंडों में छूट प्रदान की है।  सकल एनपीए 7% से कम और शुद्ध एनपीए 3% से अधिक न होने की पूर्व आवश्यकताओं तथा शुद्ध लाभ के मानदंडों को हटा दिया गया है। अब सहकारी बैंक अपने ग्राहकों को आसानी से आधुनिक बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।
  15. भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 04.12.2025 के मास्टर निदेश के माध्यम से व्यवसाय प्राधिकार हेतु पात्रता मानदंड (ईसीबीए) के नियम जारी किए हैंजो पूर्ववर्ती एफएसडब्ल्यूएम प्रावधानों का स्थान लेंगे।  इन मानदंडों से पिछले दो वर्षों में कोई शास्ति न होने से संबंधित खंड को हटा दिया गया है। अब सहकारी बैंक आसानी से नई शाखाएं खोल सकेंगे और अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकेंगे।

 शैक्षणिक कार्यक्रमों के पाठ्यक्रम “त्रिभुवन” सहकारी यूनिवर्सिटी द्वारा एक सहयोगात्मक और परामर्शदात्री प्रक्रिया के माध्यम से बनाए जाते है । संकाय सदस्यों के एक समूह द्वारा शुरुआत में तैयार किए गए प्रत्येक पाठ्यक्रम पर संबंधित स्कूल के सहकारिता अध्ययन बोर्ड में तदुपरांत विचार-विमर्श किया गया जाता है, जिसमें सहकारिता क्षेत्र के विशेषज्ञ भी शामिल होते हैं, तथा इसके पश्चात अकादमिक एवं अनुसंधान परिषद द्वारा अंतिम अनुमोदन प्रदान किया जाता है।

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संलग्नक – I

एनसीडीसी द्वारा सहायता प्राप्त योजनाएं/कार्यकलाप

1)        निगम प्रायोजित योजनाएं:

)  सहायता प्राप्त कार्यकलाप:

एनसीडीसी सहकारी समितियों को उनके विकास के लिए ऋण (सावधि ऋण और निवेश ऋण दोनों) और सब्सिडी के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करता है । ऋण घटक एनसीडीसी की अपनी स्वयं की निधियों से प्रदान किया जाता है, जबकि पात्र सब्सिडी केंद्रीय क्षेत्र की अन्य योजनाओं के साथ डवटेलिंग के बाद प्रदान की जाती है। एनसीडीसी द्वारा सहायता प्राप्त कार्यकलापों की सूची इस प्रकार है:-

  1. विपणन:
  2. प्रसंस्करण:
  3. भंडारण:
  4. शीत श्रृंखला:
  5. औद्योगिक:
  6. सहकारी समितियों के माध्यम से आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं का वितरण:
  7. ऋण और सेवा सहकारी समितियां/अधिसूचित सेवाएं:
  8. सहकारी बैंकिंग इकाई:
  9. कृषि सेवाएं:
  10. जिला योजनागत योजनाएं:
  11. दुर्बल वर्ग सहकारी समितियां:
  12. सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण के लिए सहायता:
  13. संवर्धनात्मक एवं विकासात्मक कार्यक्रम

)   एनसीडीसी के केंद्रित उत्पाद:

  1. युवा सहकार – सहकारी उद्यम सहायता और नवाचार योजनाइस योजना का उद्देश्य नए और/या नवोन्मेषी विचारों वाली नवस्थापित सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करना है।
  2. नंदिनी सहकारइस योजना का उद्देश्य महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना है और महिला सहकारी समितियों के माध्यम से महिलाओं की उद्यमशीलता की गतिशीलता को सहायता प्रदान करना । यह योजना महिलाओं के उद्यम, व्यवसाय योजना प्रतिपादन, क्षमता विकास, ऋण और सब्सिडी, और/या अन्य योजनाओं के ब्याज अनुदान के महत्वपूर्ण इनपुट को अभिसरित करती है।
  3. स्वयं शक्ति सहकार योजना: महिला स्वसहायता समूहों (एसएचजी) को ऋण/अग्रिम प्रदान करने के लिए कृषि ऋण सहकारी समितियों को एनसीडीसी की वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना।
  4. दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार योजना: एनसीडीसी के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कार्यकलापों/वस्तुओं/सेवाओं के लिए दीर्घकालिक ऋण/अग्रिम के आगे संवितरण हेतु कृषि ऋण सहकारी समितियों को एनसीडीसी की दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना।
  5. एनसीडीसी नकद क्रेडिट ऋणसहकारी समितियों के लिए कार्यशील पूंजी योजनाजिसके तहत वाणिज्यिक बैंकों की कैश क्रेडिट सीमा की तर्ज पर ₹20 करोड़ तक का ऋण प्रदान किया जाता है — जिसमें आसान निकासीशून्य प्रक्रिया शुल्क और वार्षिक नवीनीकरण का विकल्प शामिल है।
  6. सहकार नवाचार योजना: यह योजना वित्तीय वर्ष 2025-26 में पात्र सहकारी समितियों को ₹25 लाख तक की अनुदान सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई थीताकि नवाचारनई प्रौद्योगिकियों को अपनानेनवीन उत्पादोंसेवाओं एवं व्यावसायिक मॉडलों के विकासबाजार लिंकेज और संधारणीयता-उन्मुख पहलों को बढ़ावा दिया जा सकेजिससे सहकारी क्षेत्र को सशक्त किया जा सके और नवोन्‍मेषी तथा मापनीय विचारों वाली उभरती सहकारी समितियों को सहायता प्रदान की जा सके।

2)        अन्य केंद्रीय योजनाएं:

  • राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) योजना को सहायता अनुदान- सहकारिता मंत्रालय
  • कृषि विपणन अवसंरचना (एएमआईभंडारण और भंडारण अवसरंचना के अलावा अन्य केंद्रीय क्षेत्रक एकीकृत कृषि विपणन योजना (सीएसआईएसएएम) की उप-योजना – कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय।
  • बागवानी के एकीकृत विकास के लिए मिशन (एमआईडीएच) – एकीकृत कटाई बाद प्रबंधन – कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय।
  • कृषि अवसंरचना  निधि योजना के अंतर्गत वित्तपोषण सुविधा के माध्यम से ब्याज अनुदान एवं ऋण गारंटी – कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय I
  • कृषि विस्तार एवं प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमएईटी) के बीज एवं रोपण सामग्री उप-मिशन (एसएमएसपी) के अंतर्गत बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सहायता घटक।
  • पीएम मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) – मत्स्य पालन विभाग; मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय I
  1. मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) की स्थापना और संवर्धन ।

(ii) प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) – मत्स्य पालनपशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग द्वारा संचालित पीएमएमएसवाई (PMMSYके तहत एक उप-योजना ।

  • प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई)– खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालयI
  • 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की स्थापना और संवर्धन की योजना– कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय I
  • (i) प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) – खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन       योजना  खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय I

    (ii)  प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) – एकीकृत शीत श्रृंखला और मूल्य         संवर्धन अवसंरचना योजना – खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय I

  1. प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) – कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर (एपीसी) के लिए अवसंरचना का सृजन– खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय I
  • नेशनल शेडयूल्ड ट्राइब्स फाइनांस एंड डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनएसटीएफडीसी) – जनजातीय कार्य मंत्रालय
  • राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम)– पशुपालन और डेयरी विभाग; मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय।
  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) पशुपालन और डेयरी विभाग; मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय।
  • पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ),  मत्स्यपालनपशुपालन और डेयरी मंत्रालय
  • सूक्ष्म और लघु उद्यम क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई)– सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई)
  • राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (एनबीएचएम)– कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (एमओए एंड एफडब्ल्यू)
  • कृषि यांत्रिकीकरण उप मिशन (एसएमएएम– कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (एमओए एंड एफडब्ल्यू)

संलग्नक– II

स्वयंशक्ति सहकार योजना पर अनुपूरक टिप्पणी

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) वर्ष 1963 में संसद के एक अधिनियम के तहत भारत सरकार द्वारा स्थापित एक शीर्ष स्तरीय सांविधिक संस्थान है । एनसीडीसी की स्थापना सहकारी सिद्धांतों के आधार पर कृषि उपज, खाद्य पदार्थों, औद्योगिक वस्तुओं, पशुधन तथा कुछ अन्य वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण, आयात और निर्यात के लिए कार्यक्रमों की योजना बनाने एवं उन्हें बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है। एनसीडीसी (NCDC) प्राथमिक, जिला और शीर्ष / बहु-राज्य—इन तीनों स्तरों पर सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। एनसीडीसी सहकारिता मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन है।

I)         योजना का उद्देश्य:

  • निर्धन वर्ग हेतु सुलभ, किफ़ायती एवं भरोसेमंद वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता I
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को सामान्य/सामूहिक सामाजिक-आर्थिक कार्यकलापों को शुरू करने हेतु पर्याप्त बैंक ऋण तक पहुँच सुगम बनाना।
  • सतत आजीविका का संवर्धन

II)         सहायता के लिए पात्र सहकारी समितियां:

इस योजना के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकार की कृषि क्रेडिट सहकारी समितियां एनसीडीसी के ऋण हेतु पात्र होंगी:

  • प्राथमिक कृषि क्रेडिट सहकारी समितियां (पैक्स)
  • जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (डीसीसीबी)
  • राज्य सहकारी बैंक (एसटीसीबी)
  • एसएचजी संघीय सहकारी समितियां/सहकारी परिसंघ

III)       पात्रता मानदंड

      प्रत्यक्ष वित्तपोषण के निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करने वाली ऋण सहकारी समितियों को एनसीडीसी ऋण प्रदान किया जाएगा :

  1. सहकारी समिति कम से कम 3 वर्षों से प्रचालन में होनी चाहिए।
  2. सहकारी समितियों की नेट वर्थ सकारात्मक होनी चाहिएजो कि चुकता शेयर पूंजी के 100% से कम न होअर्थात् चुकता शेयर पूंजी में कोई क्षरण नहीं होना चाहिए।
  3. सहकारी समितियों को पिछले तीन वर्षों के दौरान कोई नकद हानि न हुई हो तथा पिछले तीन वर्षों में से कम से कम दो वर्षों में निवल लाभ अर्जित किया गया हो।

IV)       वह उद्देश्य जिनके लिए एनसीडीसी सहायता का प्रदान की जाएगी:

            महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को कार्यशील पूंजी ऋण या सावधि ऋण के आगे संवितरण हेतु पात्र ऋण सहकारी समितियों को एनसीडीसी सहायता प्रदान की जाएगी।

V)        वित्तपोषण का पैटर्न:

            ऋण सहकारी समितियों की आवश्यकता के अनुसार तथा महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को अल्पकालिक/मध्यमकालिक ऋण के आगे संवितरण हेतु एनसीडीसी द्वारा मूल्यांकित (ऋण सहकारी समितियों के ऋण व्यवसाय कारोबार के अनुसार) ऋण प्रदान किया जाएगा।

VI)       प्रतिभूति:

ऋण एनसीडीसी की संतुष्टि निम्नलिखित में से किसी एकया दो या अधिक के संयोजन द्वारा प्रतिभूत किया जाएगा:

  1. ऋण राशि के कम से कम 1.50 गुना मूल्य की ऋण सहकारी समितियों की अचल परिसंपत्तियों का बंधक ।
  2. ऋण राशि के कम से कम 1.10 गुना अंकित मूल्य की सावधि जमा रसीदों का गिरवी रखना।
  3. राज्य सरकार की गारंटी / बैंक गारंटी।
  4. महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजीसे प्राप्य ऋण सहकारी समितियों के ऋणों/अग्रिमों का हाइपोथेकेशनजो ऋण राशि के कम से कम 1.25 गुना तक हो ।

उपर्युक्त के अतिरिक्तऋण समझौता तथा मांग वचन पत्र की शर्त भी रखी जाएगी। आवश्यकता पड़ने परपोस्ट डेटेड चेक भी सुरक्षा दस्तावेजों का हिस्सा होंगे ।

VII)     ऋण जारी करने का तरीका:

          आवेदन प्राप्त होने परप्रस्ताव की मेरिट के आधार पर ऋण स्वीकृत किया जाएगा। ऋण संवितरण औपचारिकताएं पूरी करने तथा स्वीकृति आदेश में निर्धारित निबंधनों एवं शर्तों को पूरा करने के पश्चात किया जाएगाऔर यह ऋण आहरण की निर्धारित अवधि के भीतर एक या अधिक किस्तों में होगा।

VIII)    ऋण की अवधि/अधिस्थगन/ब्याज दर:

          अल्पकालिक कार्यशील पूंजी ऋण 3 वर्ष तक की अवधि के लिए होगाजिसमें मूलधन के भुगतान पर अधिकतम 6 महीने का ऋण स्थगन प्रदान किया जाएगा। हालांकिब्याज के भुगतान में किसी भी प्रकार का ऋण स्थगन लागू नहीं होगा । ऋण सहकारी समितियां वार्षिक सत्यापन के आधार पर वर्षों के लिए रिवॉल्विंग आधार पर भी कार्यशील पूंजी ऋण प्राप्त कर सकती हैं। ऋण का पुनर्भुगतान अर्धवार्षिक किस्तों में किया जाएगा।

IX)       ब्याज दर:

            समय-समय पर यथा-संशोधित ब्याज दर संबंधी एनसीडीसी के परिपत्र के अनुसार।

X)     प्रसंस्करण शुल्क एवं कानूनी शुल्क:

           प्रत्यक्ष वित्तपोषण के मामले मेंसहकारी समिति स्वीकृत राशि के 0.5% की दर से प्रसंस्करण शुल्क का भुगतान करेगीजो अधिकतम 3.00 लाख रुपये अधीन होगा तथा भुगतान के समय लागू कर इसमें जोड़ा जाएगा । तथापि1 वर्ष तक के कार्यशील पूंजी ऋण के लिए कोई प्रसंस्करण शुल्क नहीं लिया जाएगा । उधारकर्ता सहकारी समिति प्रतिभूति/सुरक्षा दस्तावेजों के निष्पादन पर होने वाले कानूनी व्यय का वहन करेगी।

संलग्नक-III

नंदिनी सहकार पर अनुपूरक टिप्पणी 

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा संचालित नंदिनी सहकार वित्तीय सहायता, परियोजना निर्माण, हैंड-होल्डिंग और क्षमता विकास का एक महिला-केंद्रित फ्रेमवर्क है, जिसका उद्देश्य शहरी आवासन को छोड़कर किसी भी क्षेत्र में महिला सहकारी समितियों को व्यवसाय मॉडल आधारित कार्यकलापों को  अपनाने में सहायता प्रदान करना है ।  महिला सहकारी समितियों की परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता पर कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा नहीं है । महिला सहकारी समितियां वे हैं जो किसी राज्य / केंद्रीय अधिनियम के तहत महिला सहकारी समिति के रूप में पंजीकृत हैं अथवा वे सहकारी समितियां हैं जिनमें कम से कम 50% प्राथमिक सदस्य महिलाएं हैं। तीन महीने से संचालित कोई भी सहकारी समिति सहायता प्राप्त करने की पात्र है, यह सहायता अवसंरचना सावधि ऋण और कार्यशील पूंजी के लिए क्रेडिट लिंकेज के रूप में होगी, जिसे सरकार / एजेंसियों की अन्य योजनाओं से सब्सिडी या ब्याज अनुदान के साथ डवटेल्ड किया जाएगा। नंदिनी सहकार का उद्देश्य महिला संचालित व्यवसायों को सहायता प्रदान करना और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्यों को पूरा करना है।

उद्देश्य:

माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा रेखांकित आत्मनिर्भर भारत के सिद्धांतों के अनुरूप, एनसीडीसी ने महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए नंदिनी सहकार सहायता  फ्रेमवर्क शुरू किया है। यह महिला सहकारी समितियों के माध्यम से महिलाओं की उद्यमिता की गतिशीलता को संबल प्रदान करता है। यह महिला उद्यम, व्यवसाय योजना निर्माण, क्षमता विकास, ऋण और सब्सिडी तथा/या अन्य योजनाओं के ब्याज अनुदान जैसे महत्वपूर्ण घटकों का अभिसरण करता है । एनसीडीसी स्वयं या कई मंत्रालयों के प्रमुख कार्यक्रमों की एजेंसी के रूप में क्षेत्रक योजनाओं का कार्यान्वयन करता रहा है। नंदिनी सहकार एक केंद्रित फ्रेमवर्क है और इसका उद्देश्य एनसीडीसी के कार्यक्षेत्र में आने वाली कार्यकलापों में शामिल विशेष रूप से महिला सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

पात्रता:

देश में किसी भी राज्य / बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम के अधीन पंजीकृत कोई भी महिला सहकारी समिति पात्र है। प्राथमिक स्तर पर कम से कम 50% महिला सदस्यों वाली कोई भी सहकारी समिति भी पात्र है। नवीन और/या अभिनव कार्यकलापों से संबंधित परियोजनाओं के मामले में, कम से कम तीन महीने से संचालित महिला सहकारी समितियां भी लागू एनसीडीसी दिशा-निर्देशों के अनुसार योजना के तहत सहायता के लिए पात्र हैं। 

संकेतात्मक व्यावसायिक कार्यकलाप

नंदिनी सहकार शहरी आवास को छोड़कर, एनसीडीसी के अधिदेशित क्षेत्र में आने वाली किसी भी व्यवसाय योजना आधारित कार्यकलाप/सेवा में सहायता प्रदान करता है; जैसे कि कृषि-प्रसंस्करण, आपूर्ति श्रृंखला, मूल्य संवर्धन, लॉजिस्टिक्स, कृषि यांत्रिकीकरण, खुदरा , खाद्यान्न विपणन, इनपुट आपूर्ति, बागान , उद्यानिकी , ग्रामीण आवासन, कमजोर वर्ग कार्यक्रम, जनजातीय सहकारिता, डेयरी, पॉल्ट्री, पशुधन, मत्स्य पालन, हथकरघा, कॉयर, जूट, रेशम उत्पादन , कंप्यूटरीकरण, कपड़ा , पैक्स /ऋण/विपणन सहकारी समितियों की अवसंरचना, कृषि बीमा, जल संरक्षण कार्य/सेवाएं, पर्यटन, आतिथ्य, परिवहन, अस्पताल/स्वास्थ्य देखभाल/योग कल्याण सुविधा, शिक्षा, बिजली उत्पादन एवं वितरण, गैर-पारंपरिक और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत इत्यादि।

सहायता की पद्धति

पात्र सहकारी समितियों को एनसीडीसी सहायता या तो सीधे या राज्य सरकार/ संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के माध्यम से प्रदान की जाती है। भारत सरकार की योजनाओं (जैसे एआईएफ, डीआईडीएफ, एफआईडीएफ, 10,000 एफपीओ, एफएफपीओ, पीएमएमएसवाई, पीएम एफएमई, एमएसएमई आदि) या राज्य सरकार/ संघ राज्यक्षेत्र/विकास एजेंसियों की किसी भी योजना या द्विपक्षीय/बहुपक्षीय सहायता/सीएसआर फाउंडेशन आदि के साथ एनसीडीसी क्रेडिट लिंकेज के अभिसरण को प्रोत्साहित किया जाता है।

परियोजना लागत:

कम से कम तीन वर्षों से सफलतापूर्वक संचालित हो रही महिला सहकारी समितियों के व्यवहार्य प्रस्तावों के मामले में परियोजना लागत की कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा नहीं है । परियोजना लागत में अवसंरचना , मार्जिन मनी और कार्यशील पूंजी  शामिल हैं। परियोजना लागत की सीमाएं इस प्रकार हैं::

क्रम संआवेदक सहकारी समिति के संचालन की अवधिपरियोजना की अधिकतम लागत करोड़ रुपये
1.> 3 महीने और < 1 वर्ष1.00
2.> 1 वर्ष और <3 वर्ष3.00
3.> 3 वर्षवास्तविक आवश्यकता के अनुसार (कोई सीमा नहीं)

ऋण अवधि:

परियोजना के प्रकार और राजस्व प्रवाह के आधार पर, ऋण की अवधि 5-8 वर्ष होगी, जिसमें मूलधन के भुगतान पर 1-2 वर्ष का मोरेटोरियम शामिल होगा।

वित्तपोषण का प्रारूप:

परियोजनाओं को निम्नलिखित वित्तपोषण प्रारूप के अंतर्गत सहायता प्रदान की जाएगी:

अवसंरचना निर्माण (परियोजना सुविधाएं):

राज्य सरकार के माध्यम से वित्त पोषण.प्रत्यक्ष वित्तपोषण
एनसीडीसी से राज्य सरकार कोराज्य सरकार से समिति कोएनसीडीसी  से समिति को
ऋण* – 90% ऋण* – 50%शेयर पूंजी** – 40%ऋण*- 70%
समिति का हिस्सा – 10%समिति का हिस्सा – 10%समिति का हिस्सा – 30%

*भारत सरकार या राज्य सरकार या किसी अन्य वित्तपोषण एजेंसी की किसी योजना के अधीन सब्सिडी/अनुदान को शामिल  किए जाने की स्थिति में, ऋण की राशि में आनुपातिक रूप से कमी की जा सकती है।

** यदि राज्य सरकार द्वारा शेयर पूंजी का अंशदान नहीं किया जाता है, तो उतनी ही राशि (40%) भी समिति को ऋण के रूप में दी जाएगी।

मार्जिन मनी:

राज्य सरकार के माध्यम से वित्तपोषणप्रत्यक्ष वित्तपोषण
एनसीडीसी से राज्य सरकार कोराज्य सरकार से समिति कोएनसीडीसी  से समिति को
बैंक ऋण प्राप्त करने के लिए ऋण*100% ***ऋण* या शेयर पूंजी या ऋण- सह-शेयर पूंजी 100% ***ऋण * 100% ***

* यदि भारत सरकार या राज्य सरकार अथवा किसी अन्य वित्तपोषण एजेंसी की किसी भी योजना के तहत सब्सिडी/अनुदान को डवटेल्ड किया जाता है, तो ऋण की राशि को आनुपातिक रूप से कम किया जा सकता है।

*** मार्जिन मनी सहायता की पात्रता मूल्यांकन के अध्यधीन है।

कार्यशील पूंजीआवश्यकता के अनुसार

नवीन एवं नवोन्मेषी परियोजना कार्यकलापों के मामले में, प्रत्यक्ष वित्तपोषण (डायरेक्ट फंडिंग) के तहत महिला सहकारी समितियों को 80:20 के ऋण: इक्विटी वित्तपोषण के साथ सहायता प्रदान की जाएगी।

ब्याज दर:

क्रेडिट लिंकेज हेतु, बाजार की स्थितियों के आधार पर समय-समय पर प्रकाशित ब्याज दर संबंधी एनसीडीसी का परिपत्र लागू होगा।

ब्याज अनुदान

कार्यकलापों की प्रकृति के आधार पर ब्याज अनुदान  के रूप में दी जाने वाली सहायता निम्नानुसार हो सकती है:

    • नवीन एवं नवोन्मेषी कार्यकलापों के लिए ब्याज अनुदान : एनसीडीसी नवीन एवं नवोन्मेषी कार्यकलापों के लिए अपनी सावधि ऋण राशि पर लागू ब्याज दर में 2% का ब्याज अनुदान  प्रदान करेगा।
    • अन्य कार्यकलापों के लिए ब्याज अनुदान: एनसीडीसी अन्य सभी कार्यकलापों के लिए सावधि ऋण भाग पर ब्याज दर पर 1 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदान करेगा।

एनसीडीसी का ब्याज अनुदान प्रोत्साहन समय पर पुनर्भुगतान करने पर ही लागू होगा। भारत सरकार की अन्य योजनाओं या राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र/विकास एजेंसियों की किसी भी योजना अथवा द्विपक्षीय/बहुपक्षीय सहायता से प्राप्त होने वाले ब्याज अनुदान , सब्सिडी या वित्तीय सहयोग को प्रोत्साहित किया जाता है तथा इसकी अनुमति दी जाती है।

प्रतिभूति:

एनसीडीसी द्वारा वित्तीय सहायता या तो प्रत्यक्ष वित्तपोषण के तहत या राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र के माध्यम से प्रदान की जाती है। प्रत्यक्ष वित्तपोषण के मामले में, सहकारी समिति एनसीडीसी की संतुष्टि के अनुसार निम्नलिखित में से किसी एक अथवा इनके संयोजन के रूप में ऋण हेतु प्रतिभूति प्रस्तुत कर सकती है:

  • एनसीडीसी ऋण की राशि के 1.5 गुना सीमा तक परिसंपत्तियों का बंधक , जिसमें परियोजना के अंतर्गत सृजित की जाने वाली परिसंपत्तियां भी शामिल हैं;
  • राज्य/संघ राज्यक्षेत्र /केंद्रीय सरकार द्वारा गारंटी ;
  • अनुसूचित बैंकों/राष्ट्रीयकृत बैंकों की एफडीआर का बंधक/, जो एनसीडीसी ऋण की राशि के 1.2 गुना तक हो;
  • केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों /सांविधिक निकायों/केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के सीएसआर फाउंडेशनों द्वारा गारंटी;
  • अनुसूचित बैंकों/राष्ट्रीयकृत बैंकों से गारंटी;
  • एनसीडीसी ऋण के 1.2 गुना की सीमा तक सरकारी बॉन्ड/प्रतिभूतियों का हाइपोथिकेशन और समनुदेशन;
  • विश्वसनीय सहकारी संस्थाओं की गारंटी, अर्थात् मजबूत वित्तीय स्थिति और प्रमाणिक ट्रैक रिकॉर्ड वाली संस्था;
  • लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी)/पूर्वोत्तर विकास वित्त निगम (एनईडीएफआई)/भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (एसआईडीबीI)/क्रेडिट गारंटी फंड द्वारा गारंटी;
  • सावधि जमा रसीदों (एफडीआर) के रूप में निदेशक मंडल/सदस्यों की व्यक्तिगत गारंटी।

सब्सिडी:

नंदिनी सहकार को भारत सरकार की मौजूदा योजनाओं (जैसे एआईएफ, 10,000 एफपीओ, पीएमएमएसवाई, एफआईडीएफ, पीएम एफएमई, एमएसएमई, एमओआरडी, एमडब्ल्यूसीडी आदि) / राज्य सरकार/ संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन या किसी भी भविष्य की योजना के साथ या द्विपक्षीय / बहुपक्षीय सहायता या विकास एजेंसियों/सीएसआर तंत्र के साथ क्रेडिट लिंकेज के रूप में डवटेल्ड किया जा सकता है। तथापि, यदि परियोजना लागत में कार्यशील पूंजी ऋण का घटक शामिल है, तो सब्सिडी केवल परियोजना लागत के पूंजीगत निवेश (कार्यशील पूंजी को छोड़कर) के लिए ही पात्र होगी। परियोजनाओं का त्वरित एवं सुगम कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए, सब्सिडी  के स्थान पर पात्र ऋण प्रदान किया जा सकता है । एनसीडीसी को आगे के संवितरण के लिए जब भी सब्सिडी प्राप्त होती है, उसे ऋण खाते में समायोजित किया जाएगा।

संलग्नक– IV

युवा सहकार – सहकारी उद्यम सहायता एवं नवाचार योजना 2019 पर पूरक टिप्पणी

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम भारत सरकार द्वारा 1963 में संसद के एक अधिनियम के अधीन  स्थापित शीर्ष स्तर का एक सांविधिक संस्थान है । एनसीडीसी की स्थापना सहकारी सिद्धान्तों पर कृषि उपज, खाद्य पदार्थों, औद्योगिक वस्तुओं, पशुधन, कुछ अन्य वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण, निर्यात और आयात के कार्यक्रमों के नियोजन एवं संवर्धन के उद्देश्य से की गई है। एनसीडीसी सभी तीन स्तरों, प्राथमिक, जिला और शीर्ष/बहु-राज्य पर सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। एनसीडीसी सहकारिता मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन है I

उद्देश्य:

युवा उद्यमियों के नए और नवोन्मेषी  विचारों को लक्षित करने वाले स्टार्ट-अप इंडिया और स्टैंड-अप इंडिया जैसे कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करने की नीति के अनुरूपएनसीडीसी ने वर्ष 2018 में युवा सहकार – सहकारी उद्यम सहायता एवं नवाचार योजना अधिसूचित की थी। इस योजना के कार्यान्वयन के आधार पर, अब इसका दायरा और अधिक व्यापक बना दिया गया है तथा इसका नाम बदलकर  युवा सहकार – सहकारी उद्यम सहायता एवं नवाचार योजना 2019′ कर  दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य सभी प्रकार के कार्यकलापों को कवर करते हुए सहकारी क्षेत्र में स्टार्ट-अप्स को सक्षम बनाना है।

इस योजना का उद्देश्य नए और/या नवोन्मेषी विचारों के साथ नवस्थापित सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करना है । यह एनसीडीसी द्वारा सृजित एक सहकारी स्टार्ट-अप एवं नवाचार निधि से जुड़ी हुई है। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र की सहकारी समितियोंनीति आयोग द्वारा चिह्नित अकांक्षी जिलों  में पंजीकृत एवं कार्यरत सहकारी समितियोंतथा 100% महिला / अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति  / दिव्यांगजन सदस्यों वाली सहकारी समितियों के लिए अधिक रियायती है।

पात्रता:

  •  नएनवोन्मेषी और मूल्य श्रृंखला संवर्धन के उद्देश्य वाली परियोजनाओं से युक्त किसी भी प्रकार की सहकारी समिति।
  • सहकारी समिति कम से कम तीन महीने से प्रचालनरत  होनी चाहिए।
  •  सहकारी समिति की नेट-वर्थ धनात्मक होनी चाहिए।
  •    सहकारी समिति को प्रचालन के पिछले वर्ष/वर्षों के दौरानजैसा भी लागू होनकद हानि नहीं हुई होतथा (यदि समिति 3 से अधिक वर्षों से कार्यशील है) पिछले तीन वर्षों में कोई नकद हानि न हुई हो ।

परियोजना लागत:

  •    एक वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत सहकारी समिति के मामले में परियोजना लागत ₹3.00 करोड़ से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  •    तीन महीने से अधिक किंतु एक वर्ष से कम समय से कार्यशील  सहकारी समिति के मामले में परियोजना लागत ₹1.00 करोड़ से अधिक नहीं होनी चाहिए । हालांकि, जैसे ही सहकारी समिति अपने संचालन का एक वर्ष पूरा कर लेती है, वह पहले से ली गई सहायता यदि कोई हो को छोड़कर, एक वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत सहकारी समितियों के लिए अनुमेय सहायता हेतु पात्र हो जाएगी ।
  •    परियोजना की प्रकृति और कार्यकलापों के आधार पर, परियोजना के भाग के रूप में कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान किया जा सकता है; हालांकि, कार्यशील पूंजी कुल परियोजना लागत के 20% से अधिक नहीं होगी।

ऋण अवधि:

ऋण की अवधि मूलधन के भुगतान पर 2 वर्ष के मोरेटोरियम सहित 5 वर्ष तक हो सकती है। परियोजना के प्रकार और उसकी राजस्व उत्पन्न करने की क्षमता के आधार पर मोरेटोरियम की अवधि भिन्न हो सकती है।

ब्याज दर:

प्रोत्साहन के रूप मेंएनसीडीसी परियोजना कार्यकलापों के लिए सावधि ऋण पर अपनी लागू ब्याज दर से 2% कम दर पर ऋण प्रदान करेगा।  ब्याज प्रोत्साहन केवल समय पर चुकौती करने की स्थिति में ही मान्य होगा।

प्रतिभूति:

सहकारी समिति एनसीडीसी की संतुष्टि के अनुरुप निम्नलिखित में से किसी एक या उनके संयोजन के रूप में ऋण के लिए प्रतिभूति दे सकती है:

  • परिसंपत्तियों का बंधकजिसमें प्रस्तावित परियोजना के तहत सृजित की जाने वाली परिसंपत्तियां भी शामिल हैं।
  • अनुसूचित बैंकों की एफडीआर।
  • विश्वसनीय सहकारी संस्थाओं की गारंटीअर्थात सुदृढ़ वित्तीय स्थिति और प्रामाणिक ट्रैक रिकॉर्ड वाले संस्थान।
  • राज्य/केंद्रीय सरकार की गारंटी
  • केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों /सांविधिक निकायों/केंद्रीय सीपीएसयू के सीएसआर फाउंडेशनों द्वारा गारंटी।
  • लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी)/ पूर्वोतर विकास वित्त निगम (एनईडीएफआई)/ भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) की गारंटी।
  • सावधि जमा रसीदों (एफडीआर) और/या अनुसूचित बैंकों की गारंटी के रूप में निदेशक मंडल/सदस्यों की व्यक्तिगत गारंटी।

सब्सिडी:

यदि प्रस्तावित कार्यकलाप कृषि सहयोग पर केन्द्रीय क्षेत्रक की  एकीकृत योजना (सीएसआईएसएसीअथवा किसी अन्य स्त्रोत के अंतर्गत सब्सिडी के लिए पात्र हैतो यह लागू होगा । हालांकियदि परियोजना लागत में कार्यशील पूंजी ऋण का घटक शामिल हैतो सीएसआईएसएसी सब्सिडी केवल परियोजना लागत के पूंजीगत निवेश (कार्यशील पूंजी को छोड़कर) के लिए ही पात्र होगी। परियोजनाओं के त्वरित और सुगम कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिएसब्सिडी के एवज में पात्र ऋण प्रदान किया जा सकता है । एनसीडीसी को आगे के संवितरण के लिए जब भी सब्सिडी प्राप्त होती हैउसे ऋण खाते में समायोजित किया जाएगा।

वित्तपोषण का पैटर्न:

परियोजनाओं को नीचे दिए गए ऋण: इक्विटी अनुपात के अनुसार वित्तपोषण पैटर्न के साथ सहायता प्रदान की जाएगी:

श्रेणी – क: 
80% : 20% पूर्वोत्तर क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सहकारी समिति।नीति आयोग द्वारा चिह्नित आकांक्षी जिलों में पंजीकृत और प्रचालनरत किसी भी प्रकार की सहकारी समिति।100% महिला सदस्यों वाली किसी भी प्रकार की सहकारी समिति।100% अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / दिव्यांगजन सदस्यों वाली किसी भी प्रकार की सहकारी समिति।
श्रेणी – :
70%: 30% किसी भी प्रकार के कार्यकलापों करने वाली ऐसी किसी भी प्रकार की सहकारी समिति जो श्रेणी-क  के अंतर्गत शामिल नहीं है।
 यदि प्रस्तावित कार्यकलाप के लिए सब्सिडी  की पात्रता हैतो उपलब्धता के अध्यधीनऋण घटक की राशि में उसी अनुपात में कमी कर दी जाएगी। 

सम्यक सतर्कता

एनसीडीसी किसी भी परियोजना को स्वीकृति प्रदान करने से पहले मूल्यांकन और सम्यक सतर्कता की अपनी मानक प्रक्रिया को अपनाएगा।

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।


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By udaen

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