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ई-सरस पोर्टल पर 8.99 करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों ने चिप्स, पापड़, शहद, हस्तशिल्प सहित 1,400 से अधिक उत्पाद बेचे

महिला उद्यमी एवं कृषि उपज संग्रहण एवं विपणन किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) आत्मनिर्भर बनते हुए आय के नए अवसर सृजित कर रहे हैं

वर्ष 2029 तक 6 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य के साथ डिजिटल इंडिया की ई-सरस पहल ने महिलाओं एवं ग्रामीण उद्यमियों को अपने उत्पाद बेचने के लिए सक्षम बनाया

प्रविष्टि तिथि: 11 JUL 2026 6:28PM by PIB Delhi

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के 11 वर्ष पूरे होने के साथ भारत विभिन्न क्षेत्रों में नागरिकों के लिए समावेशी अवसर सृजित करने हेतु डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का प्रभावी उपयोग कर रहा है। इस परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण ई-सरस है, जो सरकार समर्थित एक डिजिटल वाणिज्य मंच है और देशभर के ग्रामीण उत्पादकों को ग्राहकों से जोड़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अंतर्गत डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (डीआईसी) द्वारा ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) के सहयोग से विकसित ई-सरस का संचालन दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत किया जा रहा है। यह मंच स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), महिला उद्यमियों, उत्पादक समूहों तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को एक विश्वसनीय डिजिटल बाज़ार उपलब्ध कराता है, जिसके माध्यम से वे अपने उत्पादों का विपणन कर सकते हैं। इससे न केवल उनके लिए दीर्घकालिक आजीविका के अवसर सृजित हो रहे हैं, बल्कि समावेशी डिजिटल विकास के लक्ष्य को भी गति मिल रही है।

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जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम

ई-सरस डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण डिजिटल वाणिज्य मंच बनकर उभरा है। वर्तमान में इसमें 8.99 करोड़ से अधिक पंजीकृत स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्य शामिल हैं, जिससे यह महिलाओं के नेतृत्व में विश्व के सबसे बड़े आजीविका इकोसिस्टम में से एक बन गया है। इस मंच पर 1,400 से अधिक उत्पाद उपलब्ध हैं, जबकि ओएनडीसी आधारित खरीदार एप्लिकेशनों के माध्यम से 800 से अधिक खरीदार स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों तक पहुंच बना रहे हैं। ग्रामीण उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिवर्ष 50 से अधिक सरस मेलों का आयोजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त, स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद ओएनडीसी से जुड़े 11 से अधिक खरीदार एप्लिकेशनों के माध्यम से उपलब्ध हैं, जिससे उनके उत्पादों की बाजार में पहुंच और बिक्री की संभावनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। डिजिटल प्रौद्योगिकी को आजीविका संवर्धन के साथ जोड़ते हुए ई-सरस ग्रामीण महिला उद्यमियों को परिवार की आय बढ़ाने, पारंपरिक कौशलों को संरक्षित रखने तथा समावेशी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लक्ष्य में योगदान देने के लिए सशक्त बना रहा है।

ग्रामीण महिलाओं के लिए डिजिटल व्यापार

डीएववाई-एनआरएलएम के अंतर्गत महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) ग्रामीण आर्थिक विकास के प्रमुख आधार के रूप में उभरे हैं। ई-सरस इस इकोसिस्टम को मजबूत करते हुए स्वयं सहायता समूहों को एक समग्र डिजिटल वाणिज्य मंच उपलब्ध कराता है, जिसके माध्यम से वे देशभर के ग्राहकों के सामने अपने उत्पादों का स्वतंत्र रूप से प्रदर्शन और विपणन कर सकते हैं। यह मंच लोकोएस के विश्वसनीय डिजिटल तंत्र के माध्यम से डिजिटल ऑनबोर्डिंग, ऑनलाइन उत्पाद कैटलॉग, इन्वेंटरी प्रबंधन, सुरक्षित डिजिटल भुगतान, एकीकृत लॉजिस्टिक्स, ऑर्डर प्रबंधन तथा भाषिणी के माध्यम से बहुभाषी सुविधा प्रदान करता है। बिचौलियों पर निर्भरता कम कर राष्ट्रीय बाजार तक प्रत्यक्ष पहुंच उपलब्ध कराने के माध्यम से यह मंच ग्रामीण महिलाओं को अपनी आय बढ़ाने, उद्यम स्थापित करने तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था में अधिक प्रभावी भागीदारी करने में सहायता प्रदान करता है। साथ ही, यह मंच सत्यापित ग्रामीण महिला उद्यमियों को राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराकर वर्ष 2029 तक 6 करोड़ ‘लखपति दीदी’ तैयार करने के सरकार के संकल्प को भी साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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कृषि से बढ़कर ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाना

देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए कृषि आज भी आय का प्रमुख स्रोत है, लेकिन इससे होने वाली आय अधिकांशतः मौसमी होती है। ई-सरस स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) तथा ग्रामीण उत्पादक समूहों को पूरे वर्ष आय अर्जित करने के अवसर प्रदान कर उनकी आय के स्रोतों में विविधता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह मंच खाद्य प्रसंस्करण, कृषि आधारित उद्यमों, हस्तशिल्प, हथकरघा, शहद, डेयरी उत्पादों, हर्बल उत्पादों, व्यक्तिगत देखभाल से जुड़े उत्पादों तथा गृह सज्जा जैसे अनेक आजीविका आधारित क्षेत्रों को बढ़ावा देता है। इससे विशेष रूप से फसल कटाई के बाद के समय में ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त एवं सतत आय के अवसर सृजित होते हैं और उनकी मौसमी कृषि आय पर निर्भरता कम होती है।

बेहतर आय के लिए मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन

ई-सरस केवल बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण उद्यमियों को अपने उत्पादों का बाजार में उतारने से पहले उनमें मूल्य संवर्धन करने के लिए भी प्रोत्साहित करता है। इस पहल के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों को कृषि उपज का प्रसंस्करण और आकर्षक पैकेजिंग कर उन्हें अधिक मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित करने के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इनमें चिप्स, पापड़, अचार, जैम, स्क्वैश, कैंडी, पैक किए गए मसाले, प्रसंस्कृत दालें तथा बोतलबंद शहद जैसे उत्पाद शामिल हैं। उदाहरण के लिए, उत्पादक समूह कच्चे आलू या फलों को सीधे बेचने के बजाय उनका प्रसंस्करण कर बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ खाद्य उत्पादों के रूप में बाजार में उपलब्ध करा सकते हैं। इस प्रकार का मूल्य संवर्धन उत्पादों की गुणवत्ता और विपणन क्षमता को बढ़ाता है तथा ग्रामीण उत्पादकों को उसी कृषि उत्पादन से अधिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाता है।

डिजिटल उद्यमिता के लिए क्षमता निर्माण

डिजिटल व्यापार की सफलता केवल प्रौद्योगिकी पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि ग्रामीण उद्यमियों की क्षमताओं के विकास पर भी समान रूप से आधारित है। डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को डिजिटल ऑनबोर्डिंग, उत्पाद सूचीकरण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, उत्पाद फोटोग्राफी, डिजिटल विपणन, इन्वेंटरी प्रबंधन, ऑर्डर प्रोसेसिंग, ग्राहक सेवा, वित्तीय साक्षरता तथा लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। ये क्षमता निर्माण कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को ऑनलाइन व्यवसाय का स्वतंत्र रूप से संचालन करने तथा व्यापक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करते हैं। प्रशिक्षण को डिजिटल अवसंरचना के साथ जोड़ते हुए ई-सरस महिला उद्यमियों को भारत की तेजी से विस्तारित डिजिटल अर्थव्यवस्था का सक्रिय भागीदार बना रहा है।

विविध ग्रामीण उत्पादों को बढ़ावा  

ई-सरस भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विविधता को प्रतिबिंबित करने वाले अनेक प्रकार के उत्पादों को एक मंच प्रदान करता है। इनमें अचार, पापड़, शहद, मसाले, मोटे अनाज (श्रीअन्न) आधारित खाद्य उत्पाद, बांस एवं बेंत से निर्मित हस्तशिल्प, लकड़ी की हस्तकलाएं, टेराकोटा उत्पाद, हथकरघा साड़ियां, शॉल, सूती परिधान, गृह सज्जा की वस्तुएं, हर्बल साबुन, आवश्यक (एसेंशियल) तेल, डेयरी उत्पाद, घी तथा ऊनी उत्पाद प्रमुख रूप से शामिल हैं। यह मंच स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित पशुपालन एवं अन्य संबद्ध आजीविका गतिविधियों से जुड़े उत्पादों को भी प्रोत्साहित करता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के लिए नए बाजार अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

समावेशी विकास को गति देती प्रौद्योगिकी

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के सिद्धांतों पर आधारित ई-सरस को उमंग, सुरक्षित डिजिटल भुगतान प्रणालियों, लॉजिस्टिक्स भागीदारों तथा एपीआई आधारित डिजिटल सत्यापन सेवाओं के साथ जोड़ा गया है। लोकोएस के माध्यम से डिजिटल विक्रेता सत्यापन उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करता है, जबकि भाषिणी द्वारा संचालित बहुभाषी सेवाएं देश के विभिन्न क्षेत्रों के उपयोगकर्ताओं के लिए मंच की पहुंच को और अधिक सुगम बनाती हैं। यह मंच टेक्स्ट-टू-स्पीच सुविधा, अक्षरों के आकार को आवश्यकता अनुसार बदलने तथा दृश्य-सुगमता जैसे विकल्प भी उपलब्ध कराता है, जिससे दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों और विशेष सुगमता आवश्यकताओं वाले उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल व्यापार अधिक समावेशी बनता है। प्रौद्योगिकी आधारित ये सुविधाएं ई-सरस को एक पारदर्शी, सुरक्षित और नागरिक-अनुकूल डिजिटल बाज़ार के रूप में स्थापित करती हैं, जो देशभर के ग्रामीण उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ रहा है।

लाभार्थी की कहानी : फलक स्वयं सहायता समूह ने खुर्जा पॉटरी को देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाया

ई-सरस का प्रभाव उत्तर प्रदेश के खुर्जा स्थित फलक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की सफलता की कहानी में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यह समूह पारंपरिक जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग प्राप्त खुर्जा पॉटरी की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए डिजिटल व्यापार के माध्यम से अपने उत्पादों के बाजार का निरंतर विस्तार कर रहा है।

ई-सरस से जुड़ने से पहले समूह द्वारा निर्मित हस्तनिर्मित मिट्टी के बर्तनों की बिक्री मुख्यतः स्थानीय बाजारों, प्रदर्शनियों और क्षेत्रीय मेलों तक ही सीमित थी, जिससे उनके उत्पादों की बाजार पहुंच सीमित रहती थी। ई-सरस से जुड़ने के बाद पिछले साढ़े तीन वर्षों से फलक स्वयं सहायता समूह देशभर के ग्राहकों को अपने हस्तनिर्मित पॉटरी उत्पाद सफलतापूर्वक बेच रहा है। इस मंच ने समूह को भौगोलिक सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पादों का विपणन करने का अवसर प्रदान किया है। साथ ही, विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स सुविधा के कारण नाजुक हस्तनिर्मित उत्पादों की सुरक्षित डिलीवरी भी सुनिश्चित हो रही है। इस पहल से समूह की आजीविका के अवसर मजबूत हुए हैं, खुर्जा पॉटरी की पहचान और लोकप्रियता बढ़ी है तथा यह सिद्ध हुआ है कि डिजिटल वाणिज्य पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प को संरक्षित रखते हुए ग्रामीण महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

देशभर में बाजार तक पहुंच का विस्तार

शुरुआत से ही ई-सरस अपने डिजिटल इकोसिस्टम को लगातार मजबूत कर ग्रामीण उत्पादकों के लिए बाजार तक पहुंच का विस्तार कर रहा है। इसका वेब पोर्टल 28 अक्टूबर 2022 को शुरू किया गया, जबकि 28 जून 2023 को इसका एंड्रॉयड मोबाइल एप्लिकेशन शुरू किया गया। इसके बाद ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी), लॉजिस्टिक्स भागीदारों, सुरक्षित डिजिटल भुगतान प्रणालियों, पावर बीआई आधारित विश्लेषण प्रणाली, डिजिटल विक्रेता सत्यापन तथा उमंग के साथ जुड़ने से इस प्लेटफॉर्म की पहुंच और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आज हस्तशिल्प, वस्त्र, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों तथा अन्य ग्रामीण उत्पादों का निर्माण करने वाले महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह देशभर के ग्राहकों तक सीधे पहुंच बना रहे हैं। इससे वे पारंपरिक मेलों और प्रदर्शनियों पर निर्भर रहने के बजाय पूरे वर्ष डिजिटल वाणिज्य के माध्यम से अपने उत्पादों का विपणन करने में सक्षम हो रहे हैं।

अधिक जानकारी के लिए देखें : https://www.esaras.in/


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By udaen

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