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पारिवारिक न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा

PIB Delhi

पारिवारिक न्यायालय अधिनियम, 1984 में राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा अपने-अपने उच्च न्यायालयों के परामर्श से पारिवारिक न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान है, ताकि विवाह और पारिवारिक मामलों से संबंधित विवादों के शीघ्र निपटारे और सुलह को बढ़ावा दिया जा सके। पारिवारिक न्यायालय अधिनियम की धारा 3(1)(क) के तहत, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के लिए यह अनिवार्य है कि वे राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के प्रत्येक ऐसे क्षेत्र में पारिवारिक न्यायालय की स्थापना करें जिसमें एक मिलियन से अधिक जनसंख्या वाला शहर या कस्बा शामिल हो। राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के अन्य क्षेत्रों में भी पारिवारिक न्यायालयों की स्थापना की जा सकती है, यदि राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारें इसे आवश्यक समझें।

देश भर के पारिवारिक न्यायालयों सहित सभी न्यायालयों में डिजिटल अवसंरचना उपलब्ध कराने के लिए, भारत सरकार का विधि एवं न्याय मंत्रालय, सर्वोच्च न्यायालय की ई-समिति के समन्वय से ई-न्यायालय परियोजना का कार्यान्वयन कर रहा है। इस परियोजना के तीसरे चरण (2023-2027) के अंतर्गत, न्यायालयों, जेलों और अस्पतालों सहित विभिन्न संस्थानों में उपलब्ध वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इंफ्रास्‍ट्रक्चर को बढ़ाने और उन्नत करने के लिए 228.48 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो संस्थान के आकार पर निर्भर करता है। हालांकि, पारिवारिक न्यायालयों में सुनवाई, मध्यस्थता और परामर्श के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं का उपयोग संबंधित उच्च न्यायालयों के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत न्यायिक विवेकाधिकार के अधीन है।

देश भर में 3,240 न्यायालय परिसरों और 1,272 जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा शुरू कर दी गई है। 31.12.2025 तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कुल 3.93 करोड़ मामलों (जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में 2,95,33,143 और उच्च न्यायालयों में 97,89,552 मामले) की सुनवाई की गई है। उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निपटाए गए मामलों की संख्या (वर्चुअल सुनवाई) अनुलग्नक-में दी गई है। इन संख्याओं में पारिवारिक न्यायालयों में निपटाए गए मामले भी शामिल हैं। हालांकि, पारिवारिक न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं के उपयोग से संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार आंकड़े अलग से उपलब्ध नहीं हैं।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुमोदित ‘न्यायालयों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के आदर्श नियम’ सभी उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों में लागू किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, अंतरसंचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस) के अंतर्गत 2024 में न्याय श्रुति ऐप का शुभारंभ किया गया है, ताकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अभियुक्तों, गवाहों, पुलिस अधिकारियों, अभियोजकों, वैज्ञानिक विशेषज्ञों, कैदियों आदि की वर्चुअल उपस्थिति और गवाही को सुगम बनाया जा सके, जिससे समय और संसाधनों की बचत हो और मुकदमों का निपटारा शीघ्र हो सके। न्याय श्रुति को आईसीजेएस के अन्य स्तंभों के साथ प्रभावी ढंग से कार्यान्वित और एकीकृत करने के लिए, 20 उच्च न्यायालयों ने न्याय श्रुति नियमों को अधिसूचित कर दिया है।

न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में वर्चुअल सुनवाई एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से, वकील और वादी किसी भी स्थान से अदालत के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं, जिससे अदालती कार्यवाही में शारीरिक उपस्थिति से जुड़े बोझ को कम किया जा सकता है और समय और धन की काफी बचत होती है, साथ ही वंचित वादियों और कामकाजी पेशेवरों को भी लाभ मिलता है। इसके अलावा, वकील कम समय के नोटिस पर कई स्थानों पर सुनवाई में शामिल हो सकते हैं और गवाहों को सुरक्षित स्थानों से पेश किया जा सकता है।

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अनुलग्नक- I

उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निपटाए गए मामलों की संख्या (वर्चुअल सुनवाई):

क्रमांकउच्च न्यायालय के नामउच्च न्यायालयजिला न्यायालयकुल योग
1इलाहाबाद24906066738186922878
2आंध्र प्रदेश42130714574011878708
3बंबई94493310408404901
4कलकत्ता181591185189366780
5छत्तीसगढ105175459698564873
6दिल्ली32220175031317825332
7गुवाहाटी–अरुणाचल प्रदेश3574877912353
8गुवाहाटी–असम267767547962815729
9गुवाहाटी–मिजोरम42941326817562
10गुवाहाटी–नागालैंड147712782755
11गुजरात420087234667654754
12हिमाचल प्रदेश186350202660389010
13जम्मू-कश्मीर और लद्दाख265337598259863596
14झारखंड225235745304970539
15कर्नाटक12784601922851470745
16केरल280384693555973939
17मध्य प्रदेश69737411729121870286
18मद्रास15316204791952010815
19मणिपुर551601881173971
20मेघालय69307748384413
21ओडिशा359593366450726043
22पटना27821232752643553476
23पंजाब और हरियाणा65308937345234387612
24राजस्थान254597266506521103
25सिक्किम9261789018816
26तेलंगाना15314722018181733290
27त्रिपुरा225354273765272
28उत्तराखंड9125251892143144
 कुल97895522953314339322695

विधि एवं न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।


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By udaen

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