नदियों को परस्पर जोड़ा जाना और प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं
PIB Delhi
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (एनपीपी) के अंतर्गत चिन्हित नदियों को आपस में जोड़ने वाली (आईएलआर) 30 परियोजनाओं में से 26 लिंक की व्यवहार्यता रिपोर्ट (एफआर) और 13 लिंक की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पूर्ण कर ली गई हैं। इसके अतिरिक्त, एनपीपी के अंतर्गत कोई भी नदियों को आपस में जोड़ने वाली परियोजना जम्मू और कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र से संबंधित नहीं है। देश में पिछले पांच वर्षों में स्वीकृत/अनुमोदित की गई या प्रगति दर्ज करने वाली नदियों को आपस में जोड़ने वाली परियोजनाओं की स्थिति, जिनमें गोदावरी-कृष्णा नदी लिंक, कृष्णा (अलमट्टी)-पेन्नार लिंक, बेदती-वरदा लिंक, नेत्रावती-हेमावती लिंक और केन-बेतवा लिंक शामिल हैं, का विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना एकमात्र प्राथमिकता वाली परियोजना है जो कार्यान्वयन चरण में प्रवेश कर चुकी है। इसकी अनुमानित लागत 44,605 करोड़ रुपए है, जिसमें 39,317 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता शामिल है। पोलावरम सिंचाई परियोजना (पीआईपी), जिसमें गोदावरी (पोलावरम)-कृष्णा (विजयवाड़ा) लिंक शामिल है, को कुल 20,658 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता प्राप्त हुई है।
उत्तर कोयल जलाशय परियोजना एक अंतरराज्यीय प्रमुख सिंचाई परियोजना है जिसका कमान क्षेत्र बिहार और झारखंड राज्यों में फैला हुआ है। परियोजना की स्वीकृत लागत 2,430.76 करोड़ रुपए है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 1,836.41 करोड़ रुपए शामिल है। परियोजना के पूरा होने की संशोधित समयावधि जून 2026 है। उक्त परियोजना की सिंचाई क्षमता 1,14,021 हेक्टेयर है।
नदियों को आपस में जोड़ने वाली प्रत्येक परियोजना के लिए व्यवहार्यता रिपोर्ट (एफआर) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करते समय पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) किया जाता है, ताकि नदी तटवर्ती समुदायों सहित सभी समुदायों पर पड़ने वाले पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का आकलन किया जा सके। प्रचलित कानूनों के अनुसार आवश्यक वैधानिक पर्यावरणीय और वन्यजीव संबंधी स्वीकृतियां प्राप्त की जाती हैं। सहभागी राज्यों द्वारा कार्यान्वयन समझौतों पर हस्ताक्षर करने के बाद, केंद्रीय सहायता के मूल्यांकन और विचार के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाते हैं। केंद्र और राज्यों के बीच लागत साझाकरण व्यवस्था एक समान नहीं है और प्रत्येक परियोजना के लिए अलग-अलग निर्धारित की जाती है।
सिंचाई क्षमता, पेयजल उपलब्धता और समग्र क्षेत्रीय जल सुरक्षा से संबंधित इन परियोजनाओं के संभावित लाभों का विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।
पारदर्शिता, पारिस्थितिक स्थिरता और समान जल वितरण सुनिश्चित करने के लिए, आईएलआर कार्यक्रम को नदियों को आपस में जोड़ने संबंधी विशेष समिति (एससीआईएलआर), राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण (एनडब्ल्यूडीए) के शासी निकाय और नदियों को आपस में जोड़ने संबंधी कार्य बल (टीएफआईएलआर) जैसे मजबूत संस्थागत तंत्रों द्वारा निर्देशित किया जाता है। ये मंच राज्यों को तकनीकी, पर्यावरणीय, सामाजिक और जल बंटवारे संबंधी पहलुओं की समीक्षा करने में सक्षम बनाते हैं। एनडब्ल्यूडीए की सभी अध्ययन रिपोर्टें राज्यों के साथ टिप्पणियों के लिए साझा की जाती हैं, जिन्हें विधिवत रूप से शामिल किया जाता है।
यह सूचना केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल द्वारा लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई है।
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एनडी
अनुलग्नक
पिछले पांच वर्षों के दौरान प्रगति दर्ज करने या अनुमोदन प्राप्त करने वाली लिंक परियोजनाओं का इनके लाभ सहित विवरण।
| क्रम संख्या | नाम | लाभान्वित राज्य | वार्षिक सिंचाई (लाख हेक्टेयर) | घरेलू और औद्योगिक (एमसीएम) | जल विद्युत(मेगावाट) | एफआर/डीपीआर के पूरा होने का वर्ष | स्थिति |
| 1. | केन-बेतवा लिंक परियोजना (केबीएलपी) | उत्तर प्रदेश (यूपी) और मध्य प्रदेश (एमपी) | 10.62 (यूपी- 2.51 एमपी – 8.11) | 194 | 103 मेगावाट (हाइड्रो) और 27 मेगावाट (सौर) | डीपीआर वर्ष 2018 में पूर्ण | भारत सरकार ने दिसंबर 2021 में 44605 करोड़ रुपए (वर्ष 2020-21 मूल्य स्तर) की अनुमानित लागत के साथ एक स्पेशल परपस वहिकल अर्थात्; केन बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण (केबीएलपीए) के माध्यम से 36,290 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता के साथ केबीएलपी के कार्यान्वयन को मंजूरी दी है। माननीय प्रधानमंत्री ने दिनांक 25.12.2024 को परियोजना की आधारशिला रखी है।इस परियोजना को 8 साल की अवधि में मार्च 2030 तक पूरा करने की योजना है। |
| 2. | गोदावरी (इंचमपल्ली)-कृष्णा (नागार्जुनसागर) लिंक | तेलंगाना | 2.38 | 232 | 26 | डीपीआर जनवरी, 2024 में पूर्ण | 1. इस संशोधित प्रस्ताव के लिए पक्षकार राज्यों को डीपीआर जनवरी 2024 में परिचालित किया गया था2. कार्यान्वयन के लिए मसौदा एमओए अप्रैल 2024 में पक्षकार राज्यों के बीच परिचालित किया गया था। |
| 3. | कृष्णा (नागार्जुनसागर)-पेन्नार (सोमासिला) लिंक | आंध्र प्रदेश (एपी) | 1.71 | 236 | 40 | डीपीआर जनवरी, 2024 में पूर्ण | |
| 4. | पेन्नार (सोमासिला) – कावेरी (मणिमुक्त) लिंक | एपी | 0.51 | 43 | डीपीआर जनवरी, 2024 में पूर्ण | ||
| तमिलनाडु | 1.14 | 618 | |||||
| पुडुचेरी | — | 62 | |||||
| 5. | संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक | मध्य प्रदेश और राजस्थान | एमओए के अनुसार लाभ: एमपी – 6.11राजस्थान – 4.03कुल = 10.15 लाख हेक्टेयर | एमओए के अनुसार लाभ:एमपी- (71.39 पेय +21.50 औद्योगिक) = 92.9राजस्थान – (1744.16 पेय + 205.75 औद्योगिक) = 1949.91कुल = 2043 एमसीएम | – | कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन पर वर्ष 2024 में हस्ताक्षर किए गए हैं | डीपीआर तैयार करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर दिनांक 28.01.2024 को दोनों राज्यों (एमपी और राजस्थान) द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे।कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओए) पर दिसंबर 2024 में हस्ताक्षर किए गए हैं।राजस्थान के घटकों की डीपीआर पूरी कर ली गई है और मूल्यांकन के लिए सीडब्ल्यूसी के ई-पीएएमएस पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है। |
| 6. | कृष्णा (अलमट्टी) – पेन्नार लिंक | कर्नाटक | 0.69 | 464.51 | —- | डीपीआर सितंबर 2025 में पूर्ण। | |
| आंध्र प्रदेश | 1.57 | 10.1-पेयजल22.3- औद्योगिक | —- | ||||
| 7. | बेट्टी-वरदा लिंक | कर्नाटक | 1.05 | 38 | —- | डीपीआर सितंबर 2022 में पूर्ण। | वर्तमान में, अगस्त 2025 में राज्य को वैकल्पिक लिंक का पीएफआर प्रस्तुत किया गया है। |
| 8. | नेत्रावती – हेमवती लिंक | कर्नाटक | 0.34 | — | — | पीएफआर वर्ष 1994 में पूर्ण | आगे के अध्ययन नहीं किए गए हैं क्योंकि कर्नाटक सरकार द्वारा वर्ष 2014 में येट्टीनाहोल परियोजना के कार्यान्वयन के बाद, इस लिंक के माध्यम से डायवर्जन के लिए नेत्रावती बेसिन में कोई अधिशेष पानी उपलब्ध नहीं है। |
| 9. | गोदावरी (एसएसएमपी / इंचमपल्ली) -कृष्णा (पुलिचिंतला) लिंक | तेलंगाना और आंध्र प्रदेश | कुल 4.74तेलंगाना – 0.36 | तेलंगाना- 26.8 | 90.0 | डीपीआर मार्च 2024 में पूर्ण | |
| आंध्र प्रदेश – 4.38 | आंध्र प्रदेश – 319.7 | ||||||
| 10. | गोदावरी (पोलावरम)-कृष्णा (विजयवाड़ा) लिंक (पोलावरम सिंचाई परियोजना) | आंध्र प्रदेश | 4.36 | 665 | 960 | डीपीआर वर्ष 2005 में पूर्ण | यहां शामिल लाभ पोलावरम सिंचाई परियोजना के अंतर्गत कुल लाभ हैं। |
| 11. | कृष्णा (श्रीशैलम) – पेन्नार लिंक | आंध्र प्रदेश | 1.79 | 58 | 11 | डीपीआर मार्च 2024 में पूर्ण | |
| 12. | कोसी-घाघरा लिंक | बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल | कुल 8.356.05 –बिहार | 0 | — | एफआर पूर्ण | |
| 1.20 – उत्तर प्रदेश | |||||||
| नेपाल -1.10 | |||||||
| 13. | गंडक-गंगा लिंक | उत्तर प्रदेश और नेपाल | कुल – 34.58उत्तर प्रदेश -28.80नेपाल -5.78 | 700 | 4375 (बांध पीएच) और 180 (नहर पीएच) | एफआर जून 2024 में पूर्ण | |
| 14. | यमुना-राजस्थान लिंक | हरियाणा और राजस्थान | हरियाणा – 0.11 | 30 | 1702 | एफआर सितंबर, 2021 में पूर्ण | |
| राजस्थान- 2.40 | |||||||
| 15. | राजस्थान-साबरमती लिंक | राजस्थान और गुजरात | कुल – 11.53राजस्थान – 11.21 | 102 | 5126 | एफआर फरवरी, 2021 में पूर्ण | |
| गुजरात-0.32 | |||||||
| 16. | चुनार-सोन बैराज लिंक | बिहार और उत्तर प्रदेश | कुल – 0.60बिहार – 0.10यूपी – 0.49 | — | — | एफआर सितंबर, 2025 में पूर्ण | |
| 17. | गंगा (फरक्का) – दामोदर-सुवर्णरेखा लिंक | पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड | पश्चिम बंगाल -11.18ओडिशा – 0.39झारखंड- 0.73 | 432 | — | एफआर मार्च 2021 में पूरा हुआ | |
| 18. | सुवर्णरेखा-महानदी लिंक | पश्चिम बंगाल और ओडिशा | कुल – 2.16पश्चिम बंगाल – 0.18ओडिशा – 1.98 | 198 | 20 | एफआर फरवरी 2021 में पूर्ण | |
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