संपादकीय |
पौड़ी NH-534 विस्तार: चारधाम, सेना और आम जनता के लिए क्यों अहम
इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाम पर्यावरण: NH-534 से क्या सीखेगा उत्तराखंड
सड़क बनेगी या भरोसा? NH-534 परियोजना पर सवाल
उत्तराखंड के पौड़ी जिले में दुगड्डा से गुमखाल तक राष्ट्रीय राजमार्ग-534 को 2-लेन में विकसित करने की स्वीकृति केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है, बल्कि यह पहाड़ की जीवनरेखा को मज़बूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। 392.52 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह 18.1 किमी का मार्ग पहाड़, प्रशासन, सुरक्षा और आस्था—चारों को एक साथ जोड़ता है।
पर्वतीय राज्यों में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं होतीं, वे स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार और सुरक्षा का आधार होती हैं। कोटद्वार-लैंसडाउन-पौड़ी-श्रीनगर को जोड़ने वाला यह मार्ग लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा है। खराब सड़कें न केवल स्थानीय जनता के लिए परेशानी थीं, बल्कि आपदा, सैन्य और प्रशासनिक आवाजाही में भी गंभीर बाधा बनती रही हैं।
इस परियोजना का सबसे अहम पक्ष इसका रणनीतिक महत्व है। लैंसडाउन कैंटोनमेंट तक बेहतर पहुंच और रक्षा आवाजाही के लिए वैकल्पिक मार्ग देश की सुरक्षा दृष्टि से अनिवार्य है। वहीं चारधाम यात्रा के दबाव को देखते हुए यह हाईवे एक वैकल्पिक और सुरक्षित रूट प्रदान कर सकता है, जिससे पहाड़ी कस्बों पर यातायात का अनावश्यक बोझ कम होगा।
हालांकि, सवाल केवल मंज़ूरी का नहीं, निष्पादन की गुणवत्ता और समयबद्धता का है। पहाड़ों में सड़क निर्माण अक्सर भूस्खलन, पर्यावरणीय क्षति और ठेकेदारी लापरवाही की भेंट चढ़ जाता है। यदि यह परियोजना भी केवल कागज़ी प्रगति और अधूरे काम का उदाहरण बनी, तो इसका उद्देश्य ही खो जाएगा।
ज़रूरत इस बात की है कि निर्माण कार्य में स्थानीय भूगोल, पर्यावरण संतुलन और दीर्घकालिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। पारदर्शिता, जवाबदेही और स्थानीय समुदाय की भागीदारी ही इस सड़क को सचमुच “विकास मार्ग” बना सकती है।
कुल मिलाकर, NH-534 का यह विस्तार पहाड़ के लिए एक अवसर है—अब यह सरकार और तंत्र पर निर्भर करता है कि वह इसे सिर्फ सड़क बनाए या भरोसे का रास्ता।
